फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   High Court's decision: Married daughter is also a claimant for compassionate appointment

हाईकोर्ट का फैसला: विवाहित पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति की दावेदार, मृतक आश्रितों की सेवा मामले में अहम फैसला

Sat, 13 Apr 2024 06:16 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 13 Apr 2024 06:16 AM IST
सार

High Court decision: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसला सुनाते हुए विवाहित पुत्रियों को भी अनुकंपा नियुक्तियों में हकदार माना है। 

विज्ञापन
High Court's decision: Married daughter is also a claimant for compassionate appointment
lucknow highcourt - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

 इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक मृतक आश्रितों की सेवा मामले में दिए अहम फैसले में माना कि मृतक आश्रित कर्मी की विवाहित पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति का दावा कर सकती है। इस नजीर के साथ कोर्ट ने सिंचाई विभाग के मृतक कर्मी की विवाहित पुत्री की अनुकंपा नियुक्ति की अर्जी पर दो माह में दोबारा गौर करने का आदेश अफसरों को दिया। पहले विवाहित पुत्री की अनुकंपा नियुक्ति के दावे की अर्जी को यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि वह परिवार में आश्रित नहीं है, उसके दो भाई नौकरी करते हैं और उसकी माता को पेंशन मिलती है। इसके खिलाफ पुत्री ने फिर कोर्ट की शरण ली थी।

विज्ञापन


यह फैसला व आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने मृतक आश्रित कर्मचारी की पुत्री कविता तिवारी की याचिका मंजूर करके दिया। याची ने अर्जी को खारिज करने के आदेश को चुनौती देकर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया था।
विज्ञापन


याची का कहना था कि उसके पिता सिंचाई और जल संसाधन विभाग में बतौर ड्राइवर लखनऊ में कार्यरत थे। जिनकी वर्ष 2019 में सेवाकाल में मृत्यु हो गई थी। जब याची ने अनुकंपा नियुक्ति देने के आग्रह के साथ विभाग को अर्जी दी तो अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि विवाहित होने से वह परिवार में आश्रित नहीं है, उसके दो भाई नौकरी करते हैं और उसकी माता को पेंशन मिलती है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने पहले वर्ष 1974 के संबंधित नियमों के तहत विवाहित पुत्री के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर पुनः गौर करने का निर्देश दिया था। क्योंकि यह नियम ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं करते हैं कि याची के भाई सरकारी सेवा में हैं या फिर उसकी माता को पेंशन मिलती है। उधर, सरकारी वकील ने याचिका का विरोध किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि वर्ष 1974 के नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति के दावेदार के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह मृतक कर्मी पर आश्रित हो। साथ ही कोर्ट ने एक अन्य नजीर के हवाले से कहा कि मृतक कर्मी के पुत्र का सरकारी सेवा में होना भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रतिबंध नहीं है। क्योंकि पुत्र की आय अपनी पत्नी व बच्चों वाले परिवार के लिए है। सिर्फ मृतक की पत्नी या पति में से अगर कोई सरकारी सेवा में है,तो इनमें से कोई अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता। ऐसे में याची के भाईयों का सरकारी सेवा में होना और उसकी माता को पेंशन मिलना, विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति मांगने से प्रतिबंधित नहीं करते। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याची के अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed