मोदी की 'आदर्श' योजना पर हाईकोर्ट ने उठाया सवाल
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। दरअसल हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका के आधार पर केंद्र की सांसद आदर्श ग्राम योजना के वाजिब होने सहित कई सवालों के जवाब कोर्ट ने मांगे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने केंद्र सरकार से सांसद आदर्श ग्राम योजना पर कई सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने ये स्पष्ट करने को कहा है कि क्या ये योजना लोकहित की है।
कोर्ट ने इस योजना के भेदभावपूर्ण होने पर भी सवाल उठाया है। नैतिक पार्टी की एक याचिका पर जस्टिस एपी शाही और जस्टिस महेंद्र दयाल ने केंद्र से इस योजना की वैधानिकता और उपयुक्तता के बारे में तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।
याचिका में इस योजना को बंद करने की मांग की गई थी। इसमें ये भी कहा गया था कि सांसदों के किसी खास गांव के चुनने की प्रक्रिया को बंद कर देना चाहिए।
कोर्ट में दी गई ये दलीलें
याचिका में राज्य सरकार को संविधान की अनुसूची 11 के तहत ग्राम पंचायत को ज्यादा सशक्त बनाने की बात कही गई थी।
याचिककर्ता की तरफ से जिरह करते हुए वकील सीबी पांडेय ने कहा कि 1992 में संविधान में हुए 73वें संशोधन के मुताबिक ये तय हुआ था कि ग्रामीण और शहरी स्तर पर स्थानीय निकायों को ज्यादा से ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे।
याचिका में ये भी कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद 243 सांसद और विधायक को ग्राम पंचायत सहित स्थानीय निकायों का प्रतिनिधित्व करने की इजाजत नहीं देता।
वकील पांडेय ने दलील दी, ‘इन परिस्थितियों में अगर सांसदों को हर निर्वाचन क्षेत्र से विकास के लिए एक गांव चुनने की इजाजत दी गई तो ये पंचायती राज व्यवस्था में सीधा हस्तक्षेप होगा जो कि असंवैधानिक है।’