आजम की 'ड्रीम यूनिवर्सिटी' में फंस गया पेंच!
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आजम खां ने भले ही यूपी के कार्यवाहक राज्यपाल रहे डॉ. अजीज कुरैशी से अपने सपनों की जौहर यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक दर्जा दिलवा लिया हो, लेकिन इसमें एक पेंच फंस गया है।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय बनाने संबंधी अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रदेश के महाधिवक्ता विनय चंद्र मिश्र को नोटिस जारी किया है।
साथ ही राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का वक्त दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
असंवैधानिक घोषित करने की मांग
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ व न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने गुरुवार को यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस संगठन की याचिका पर दिया।
इसमें विश्वविद्यालय संबंधी अधिनियम को असंवैधानिक घोषित किए जाने का आग्रह किया गया है।
याची संगठन की तरफ से तर्क दिया गया कि राज्य विधानमंडल को किसी धर्म विशेष के लिए कानून बनाने का हक नहीं है और अल्पसंख्यक संस्थाएं खुद अपनी संस्थाएं तो बना सकती हैं लेकिन इनके लिए कोई अधिनियम नहीं बनाया जा सकता है।
22 को दायर हुई थी याचिका
22 जुलाई को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति देवेंद्र उपाध्याय की बेच के समक्ष इस याचिका पर गुरुवार सुबह सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह नोटिस भेजा।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से याचिका का विरोध किया गया। चूंकि याचिका में अधिनियम की वैधता को चुनौती दी गई है, लिहाजा कोर्ट ने मामले में पक्ष पेश करने को महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है।