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सहायक शिक्षक भर्ती: 'अधिकारियों की खाल बचाने में लगी सरकार,' कोर्ट ने समझा अभ्यर्थियों का दर्द

Thu, 01 Nov 2018 10:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Nov 2018 10:07 PM IST
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high court hard statement on assistant teacher recruitment fraud
Allahabad High Court

सहायक शिक्षक भर्ती घोटाले में कदम-कदम पर अधिकारियों को मिली छूट ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। जस्टिस इरशाद अली ने अपने फैसले में इस पूरे मामले में अब तक कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों और सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का सिलसिलेवार ढ़ग से आंकलन किया।

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हाईकोर्ट ने हर बिंदु पर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों न सिर्फ अनुचित पाया बल्कि मंशा पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा 'सरकार अपने अधिकारियों की खाल बचाने में लगी हुई है।' कोर्ट ने यह टिप्पणी सरकार द्वारा गठित जांच टीम में बेसिक शिक्षा विभाग के ही दो अधिकारियों को रखने और अब तक किसी भी जिम्मेदार का नाम समाने न आने पर की। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने परीक्षा आयोजित करने वाली फर्म को भी दोषी करार दिया।
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हाईकोर्ट ने प्रदेश में आयोजित भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली को लेकर भी सरकार को जमकर फटकारा। कोर्ट ने कहा कि ‘पिछले 20 साल से प्रदेश सरकार, किसी बोर्ड या आयोग की हर चयन प्रक्रिया में... कभी प्रश्नपत्र आउट हो जाता है तो कभी खुद अफसर भ्रष्टाचार करते मिलते हैं। इसके बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। केवल अभ्यर्थियों का ध्यान भटका दिया जाता है। कुछ जांच समितियां बनाई जाती हैं, लेकिन वे कुछ नहीं करतीं। ऐसे हालात में हाईकोर्ट को ही कोई फूलप्रूफ तरीके से चयन प्रक्रिया की जांच करवानी होगी।’ यह अभ्यर्थियों के साथ विश्वासघात का मामला है, जो इस उम्मीद में परीक्षा देते हैं कि यहां निष्पक्षता बरती जाएगी।

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जानिए कड़ी दर कड़ी मामला

  • सोनिका देवी द्वारा याचिका दायर की गई, जिसकी सुनवाई में हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को सरकार को उसकी उत्तर पुस्तिका कोर्ट के सामने रखने के लिए कहा था।
  •  28 अगस्त को हुई सुनवाई में सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।
  •  30 अगस्त को फिर सुनवाई रखी गई, जिसमें सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकरण को दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा गया। यहां सामने आया कि सोनिका देवी को परीक्षा के बाद दी गई उत्तर पुस्तिका में दर्ज हस्तलिपि और प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत सोनिका की उत्तर पुस्तिका में मौजूद हस्तलिपि अलग-अलग हैं। इनके बार-कोड भी अलग-अलग थे।
  •  31 अगस्त को हुई सुनवाई में तकनीकी विशेषज्ञ धर्मेंद्र शाही ने जांच करके कोर्ट में बताया कि सोनिका की मूल उत्तर पुस्तिका के पहले पृष्ठ का बार-कोड और अंदर के पृष्ठों का बार कोड अलग-अलग है। यानी अंदर के पेज बदले गए थे। इसी दिन कोर्ट को महाधिवक्ता ने आश्वस्त किया कि इसकी जांच करवाई जाएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
  •  17 सितंबर को अगली सुनवाई में कोर्ट को बताया कि जांच जारी है और हर अभ्यर्थी की कॉपी में दिए गए अंकों की पुनर्गणना करवाई जा रही है, जिससे पता चले कि वे चुने गए हैं या नहीं। इसके लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। कोर्ट ने सभी नियुक्तियों का भविष्य याचिका पर हुए निर्णय के अधीन रखने का आदेश दिया।
  •  25 सितंबर को सरकार ने बताया कि प्राधिकरण की सचिव सुत्ता सिंह को निलंबित कर दिया गया है। आठ सितंबर का आदेश दिखाया जिसमें तीन सदस्यीय समिति में प्रमुख सचिव चीनी उद्योग संजय आर भूस रेड्डी को अध्यक्ष, सर्व शिक्षा अभियान निदेशक वेदपति मिश्रा और बेसिक शिक्षा के डायरेक्टर सर्वेंद्र विक्रम सिंह को सदस्य बनाया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई कि समिति बने तीन हफ्ते होने के बावजूद जांच में प्रगति नहीं हुई है। समिति उन लोगों के नाम तक पता नहीं कर सकी जिन्हाेंने कॉपियां बदली हैं। 
  •  26 सितंबर को सरकार ने बताया कि कुल 12 अभ्यर्थियों की कॉपियाें में गड़बड़ियां सामने आई हैं। यह भी बताया कि 23 अभ्यर्थी जिन्हें नियुक्ति के योग्य माना गया है, वह पहली लिस्ट में योग्य नहीं माने गए थे। वहीं, 24 अभ्यर्थी, जिन्हें दूसरी लिस्ट में योग्य नहीं माना गया था, वे दरअसल योग्य थे। यह उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग कर रही फर्म की गलती से हुआ।

सामने आई ऐसी गड़बड़ियां

  • अभ्यर्थी सोनिका देवी की उत्तर पुस्तिका में सामने आया कि उसकी पुस्तिका के अंदर के पेज बदले गए।
  • अभ्यर्थी विमलेश चंद्रा को 65 नंबर दिए गए, जबकि उनके वर्ग में 67 अंक वाले अभ्यर्थी का चयन हुआ था। जांचने पर उसकी उत्तर पुस्तिका में सामने आया कि उसके दो प्रश्नों के जवाब सही होते हुए उसे शून्य अंक दिए गए। यानी ये दो अंक  उसे मिलते तो वह पास हो जाती।
  • अभ्यर्थी किरण देवी के मामले में सामने आया कि उन्हें भी 65 अंक दिए गए, उनकी कॉपी जांची गई तो उसमें उसे 70 अंक मिले रहे थे, यानी वह भी पास थी।
  • अभ्यर्थी रेखा सिंह के मामले में 65 अंक दिए गए, कॉपी जांचने के बाद उसे 80 अंक मिले।
  • अभ्यर्थी अनुपम शर्मा को 61 अंक दिए गए थे, जांच में सामने आया कि उसे 91 अंक मिले।
  • शिवपूजा को 66 अंक दिए गए, जबकि उसे 80 अंक मिले। 
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