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मनमाने ढंग से यश भारती देने पर घिरी यूपी सरकार, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Thu, 22 Dec 2016 06:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 22 Dec 2016 06:46 PM IST
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high court ask explanation from up government about yash bharti award
कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यश भारती पुरस्कार देने  के विरोध में दायर याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है।
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जस्टिस देवेन्द्र कुमार अरोड़ा और जस्टिस राजन रॉय की बेंच के समक्ष याची सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज ने कहा कि इन पुरस्कारों में सार्वजनिक धन का उपयोग होता है, जिसे मनमाने तरीके से नहीं दिया जा सकता।

इस पर कोर्ट ने जवाब देने के लिए संस्कृति सचिव को अभिलेखों के साथ तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी।

सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज की वकील नूतन ठाकुर ने कोर्ट से कहा, सरकार हर पुरस्कृत व्यक्ति को 11 लाख रुपये नकद और मासिक पेंशन दे रही है। ये पुरस्कार मनमाने ढंग से दिए जा रहे हैं। इस पर शासकीय अधिवक्ता ने जवाब के लिए समय मांगा।
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कोर्ट से आग्रह किया गया है कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड  जज की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बना कर 2012 से 2016 के बीच दिए गए सभी यश भारती पुरस्कारों की समीक्षा कराई जाए।
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गौरतलब है, पहले भी आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने इस मामले में याचिका दायर की थी जिस पर कई सवालों के जवाब मांगे गए थे।
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