गर्भवती महिला के इलाज में लापरवाही पर दोनों डॉक्टर व नर्सें सस्पेंड
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डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भवती की मौत के मामले में सरकार ने 48 घंटे के भीतर कड़ी कार्रवाई करते हुए राम मनोहर लोहिया अस्पताल की दो महिला डॉक्टरों समेत दो नर्सों को निलंबित कर दिया है।
डॉक्टरों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि चिकित्सा सेवा में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिन दो डॉक्टरों को निलंबित किया गया है, उनमें डॉ. शालू महेश और डॉ. शुभ्रा सिंह और नर्सों में अरुणिमा श्रीवास्तव और रेनू बरनवाल शामिल हैं।
सीतापुर, रामपुर के नसीरूद्दीन की पत्नी कलीमुन (24) प्रसव पीड़ा के बाद 22 अप्रैल की रात लोहिया अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंची थी, लेकिन वहां तैनात महिला डॉक्टर ने उसका इलाज करने के बजाय उसे सिर्फ इंजेक्शन लगाकर दो घंटे तक बेंच पर बिठा दिया। दर्द में आराम होने पर उसे वापस घर भेज दिया गया।
23 अप्रैल की सुबह हालत बिगड़ने पर कलीमुन के पति व अन्य परिजन उसे लेकर फिर लोहिया अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने कलीमुन और उसकी कोख में पल रहे बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इसपर परिवारीजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा भी किया था।
24 घंटे में सौंपी जांच रिपोर्ट
अगले दिन डॉक्टरों की लापरवाही से गर्भवती महिला व उसके शिशु की मौत की खबर अखबारों में छपी तो मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए तत्काल स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह को अस्पताल जाकर मामले की छानबीन कर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
24 अप्रैल को अस्पताल पहुंचकर मंत्री ने करीब दो घंटे तक डॉक्टरों व वहां के स्टाफ से पूछताछ की थी। इसके बाद महानिदेशक चिकित्सा (डीजी) को पूरे मामले की जांच करके 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि डीजी ने 24 घंटे के बजाय उसी दिन जांच पूरी करके रात को ही रिपोर्ट दे दी थी, जिसे मुख्यमंत्री की मंजूरी केलिए भेज दी गई थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद बुधवार दोषी डॉक्टरों व नर्सों को निलंबित कर दिया गया है।