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Lucknow News: राजधानी के 88 गांवों में अपर्याप्त भूगर्भ जल मामले में सुनवाई आज
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हाईकोर्ट।
लखनऊ। राजधानी के 88 गांवों के लिए अपर्याप्त भूगर्भ जल के मामले में हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। कोर्ट ने एलडीए समेत अन्य संबंधित विभागों से विभिन्न आवासीय योजनाओं में वर्षा जल संचयन के मामले में प्रगति रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मामले के पक्षकार पहले दिए गए आदेशों के तहत पूरक हलफनामों पर कारवाई की प्रगति का ब्योरा पेश करें।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ यह आदेश उत्कर्ष लोकसेवा संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया था। यह मामला चार मई को सुनवाई के लिए खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। इसमें याची ने लखनऊ के कई इलाकों में पीने के पानी और अपर्याप्त भूगर्भ जल समस्या का मुद्दा उठाया है। याचिका में इस समस्या को दूर करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय जल आयोग समेत अन्य पक्षकारों ने अपने हलफनामे दाखिल किए हैं। कोर्ट ने कहा था कि इनकी प्रतियां एलडीए के अधिवक्ता को भी दी जाएं। इन पर गौर कर प्राधिकारियों की जिम्मेदारी रेखांकित करते हुए एलडीए खास तौर पर अपनी विभिन्न आवासीय योजनाओं आदि में वर्षा जल संचयन पर अपना पक्ष पेश करे।
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वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि अपर्याप्त भूगर्भ जल की समस्या के अपकालिक व दीर्घकालिक समाधान के लिए बैठक में प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकारी वकील ने इसके लिए ने अन्य विभागों की भूमिका होने की भी बात कही थी। इस पर कोर्ट ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग समेत राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिवों को मामले पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने इन अफसरों से इस मामले में जवाब भी मांगा है।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ यह आदेश उत्कर्ष लोकसेवा संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया था। यह मामला चार मई को सुनवाई के लिए खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। इसमें याची ने लखनऊ के कई इलाकों में पीने के पानी और अपर्याप्त भूगर्भ जल समस्या का मुद्दा उठाया है। याचिका में इस समस्या को दूर करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
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कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय जल आयोग समेत अन्य पक्षकारों ने अपने हलफनामे दाखिल किए हैं। कोर्ट ने कहा था कि इनकी प्रतियां एलडीए के अधिवक्ता को भी दी जाएं। इन पर गौर कर प्राधिकारियों की जिम्मेदारी रेखांकित करते हुए एलडीए खास तौर पर अपनी विभिन्न आवासीय योजनाओं आदि में वर्षा जल संचयन पर अपना पक्ष पेश करे।
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वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि अपर्याप्त भूगर्भ जल की समस्या के अपकालिक व दीर्घकालिक समाधान के लिए बैठक में प्रस्ताव तैयार किया गया है। सरकारी वकील ने इसके लिए ने अन्य विभागों की भूमिका होने की भी बात कही थी। इस पर कोर्ट ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग समेत राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिवों को मामले पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने इन अफसरों से इस मामले में जवाब भी मांगा है।