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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष लल्लू की जमानत पर सुनवाई आज
Fri, 12 Jun 2020 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 12 Jun 2020 06:08 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की जमानत पर आज सुनवाई होगी। लल्लू ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है। उनकी अर्जी 12 जून को जस्टिस एआर मसूदी की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
उन्हें 20 मई को आगरा में अवैध रूप से धरना प्रदर्शन करने के आरेाप में गिरफ्तार किया गया था लेकिन उन्हें उसी दिन जमानत मिल गई। उसके तुरंत बाद हांलाकि लखनऊ पुलिस ने उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया। उनके ऊपर आरोप है कि प्रवासी मजदूरों को भेजने के लिए मंगाई गई बसों के कागजों में फर्जीवाड़ा किया।
विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने लल्लू की जमानत अर्जी एक जून को खारिज कर दी थी। जिस पर उन्होंने अब हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी है। जमानत अर्जी में उनकी ओर से दलील दी गई है कि लल्लू की मामले में कोई अहम भूमिका नहीं है और सरकार ने उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया है।
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गौरतलब है कि एक जून को विशेष एमपी-एमएलए अदालत में विशेष न्यायाधीश पी. के. राय ने कहा था कि मामला गंभीर प्रकृति का है। मामले की विवेचना अभी चल रही है ऐसे में इस स्तर पर जमानत देने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने यह आदेश जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी मनोज त्रिपाठी की ओर से पेश तर्कों को स्वीकार करते हुए दिया था। त्रिपाठी का तर्क था कि लल्लू के खिलाफ अब तक की विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य पाए गए हैं।
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उन्हें 20 मई को आगरा में अवैध रूप से धरना प्रदर्शन करने के आरेाप में गिरफ्तार किया गया था लेकिन उन्हें उसी दिन जमानत मिल गई। उसके तुरंत बाद हांलाकि लखनऊ पुलिस ने उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लिया। उनके ऊपर आरोप है कि प्रवासी मजदूरों को भेजने के लिए मंगाई गई बसों के कागजों में फर्जीवाड़ा किया।
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विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने लल्लू की जमानत अर्जी एक जून को खारिज कर दी थी। जिस पर उन्होंने अब हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी है। जमानत अर्जी में उनकी ओर से दलील दी गई है कि लल्लू की मामले में कोई अहम भूमिका नहीं है और सरकार ने उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया है।
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गौरतलब है कि एक जून को विशेष एमपी-एमएलए अदालत में विशेष न्यायाधीश पी. के. राय ने कहा था कि मामला गंभीर प्रकृति का है। मामले की विवेचना अभी चल रही है ऐसे में इस स्तर पर जमानत देने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने यह आदेश जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी मनोज त्रिपाठी की ओर से पेश तर्कों को स्वीकार करते हुए दिया था। त्रिपाठी का तर्क था कि लल्लू के खिलाफ अब तक की विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य पाए गए हैं।