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राष्ट्र्पति शासन की चेतावनी, फिर भी नहीं कम हो रही है डेंगू से मौत पर पैंतरेबाजी
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 27 Oct 2016 12:49 PM IST
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डेंगू से मौतों पर सरकारी पैंतरेबाजी से खफा हाईकोर्ट की प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की चेतावनी का भी स्वास्थ्य विभाग पर कोई असर होता नहीं दिख रहा। अदालत की सख्ती के बाद भी डेथ ऑडिट कर रही टीम केवल झूठ का पुलिंदा तैयार करने में जुटी है।
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स्वास्थ्य विभाग ने 115 मौतों का रिकॉर्ड तो जुटा लिया लेकिन इनमें सिर्फ 13 में डेंगू की पुष्टि की। 83 मौतों को संदिग्ध डेंगू की श्रेणी में रखा गया जबकि 19 लोगों की तो मौत का कारण ही नहीं ढूंढ सके हैं डॉक्टर।
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साफ है कि डेंगू को लेकर लगातार आंकड़े छिपाने में जुटा विभाग अपने झूठ को सच साबित करने में जुटा है। अब डेथ ऑडिट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि ऐसा कैसे संभव है कि तीन डॉक्टरों की टीम मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर मृत्यु का कारण ही नहीं पता कर सकी।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सीएमओ द्वारा गठित डेथ ऑडिट टीम में शामिल एसीएमओ डॉ. सईद अहमद, डॉ. बीके यादव, डॉ. आनंद त्रिपाठी ने 115 मृत मरीजों की फाइल देखी। टीम कोर्ट की फटाकर के बाद बीस दिन से मरीजों के इलाज का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
एक अधिकारी की मानें तो 83 मौतों को संदिग्ध डेंगू बताने के पीछे स्वास्थ्य विभाग नियमों के सहारे अपना बचाव कर रहा है। गाइड लाइन के मुताबिक जब तक मरीज की एलाइजा जांच नहीं होती उसे डेंगू नहीं माना जाता।
लेकिन एलाइजा जांच कराने की जिम्मेदारी किसकी थी। ये लापरवाही का मामला है कि साफ है विभाग जिन 83 मौतों को संभावित डेंगू कह रहा है वह सिर्फ उसकी चूक से हुई हैं।
विभाग बता रहा है गलत आंकड़े
डेमो
अब सस्पेंस उन 19 मरीजों पर है डेथ ऑडिट टीम जिनकी मौत का कारण ही नहीं तलाश पा रही है। राजधानी में अब तक 212 मरीजों की मौत हो चुकी है और 729 मरीजों में एलाइजा से डेंगू की पुष्टि हुई है।
संचारी रोग विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में डेंगू के कुल 36,330 संभावित मरीज मिले जिनमें डेंगू की पुष्टि कार्ड टेस्ट से हुई। इनकी प्रदेश के अलग-अलग सेटरों पर जांच कराई गई तो पता चला कि 11,320 मरीज डेंगू की चपेट में हैं।
इसमें भी अधिकारी खेल कर रहे हैं। 11,320 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई लेकिन स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ 4853 मरीजों की सही जानकारी जुटा सका। 6467 मरीज किस जनपद हैं इसका पता स्वास्थ्य विभाग को अभी नहीं है।
डेंगू की जांच की सुविधा शहर के चार सेंटरों पर है। पीजीआई में अब तक 407, स्टेट लैब में 1174, केजीएमयू में 1070 और लोहिया संस्थान में 2129 मरीजों में एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि हुई। यह हाल तब है जबकि 50 फीसदी मरीजों की एलाइजा जांच कराई ही नहीं गई।
हाईकोर्ट की सख्ती और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से नाराज हाईकोर्ट के सवालों का जवाब बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव राहुल भटनागर कोर्ट में देंगे।
25 अक्तूबर को कोर्ट ने अफसरों को कहा था कि हालात इमरजेंसी जैसे हैं और स्वास्थ्य विभाग डेंगू को रोकने में पूरी तरह नाकाम हो रहा है।
इस आधार पर क्यों न राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए। कोर्ट बीमारी को रोकने के इंतजाम के बारे में पूछ रहा है लेकिन विभाग गलत आंकड़े बताकर जान बचाने की कोशिश में लगा है।
संचारी रोग निदेशालय के अनुसार प्रदेश में अब तक डेंगू से 27 मरीजों की मौत हो चुकी है। लखनऊ में सर्वाधिक 13, जौनपुर 3, अंबेडकरनगर, अमेठी, सीतापुर में दो-दो जबकि बस्ती, गाजियाबाद, हरदोई, मेरठ और इलाहाबाद में एक-एक मरीज की मौत हो चुकी है।
‘डेंगू को लेकर मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोलूंगा। कोर्ट के सवालों का जवाब दूंगा। डेंगू से मौतों को नहीं छिपाया जा रहा है। जो भी तस्वीर सामने आई है, उसे कोर्ट में पेश किया गया है।कोर्ट के निर्देश पर डेथ ऑडिट और अन्य काम जारी है, इसकी निगरानी सीधे प्रमुख सचिव कर रहे हैं।’ - एसएनएस यादव, सीएमओ
संचारी रोग विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में डेंगू के कुल 36,330 संभावित मरीज मिले जिनमें डेंगू की पुष्टि कार्ड टेस्ट से हुई। इनकी प्रदेश के अलग-अलग सेटरों पर जांच कराई गई तो पता चला कि 11,320 मरीज डेंगू की चपेट में हैं।
इसमें भी अधिकारी खेल कर रहे हैं। 11,320 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई लेकिन स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ 4853 मरीजों की सही जानकारी जुटा सका। 6467 मरीज किस जनपद हैं इसका पता स्वास्थ्य विभाग को अभी नहीं है।
डेंगू की जांच की सुविधा शहर के चार सेंटरों पर है। पीजीआई में अब तक 407, स्टेट लैब में 1174, केजीएमयू में 1070 और लोहिया संस्थान में 2129 मरीजों में एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि हुई। यह हाल तब है जबकि 50 फीसदी मरीजों की एलाइजा जांच कराई ही नहीं गई।
हाईकोर्ट की सख्ती और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट से नाराज हाईकोर्ट के सवालों का जवाब बृहस्पतिवार को मुख्य सचिव राहुल भटनागर कोर्ट में देंगे।
25 अक्तूबर को कोर्ट ने अफसरों को कहा था कि हालात इमरजेंसी जैसे हैं और स्वास्थ्य विभाग डेंगू को रोकने में पूरी तरह नाकाम हो रहा है।
इस आधार पर क्यों न राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए। कोर्ट बीमारी को रोकने के इंतजाम के बारे में पूछ रहा है लेकिन विभाग गलत आंकड़े बताकर जान बचाने की कोशिश में लगा है।
संचारी रोग निदेशालय के अनुसार प्रदेश में अब तक डेंगू से 27 मरीजों की मौत हो चुकी है। लखनऊ में सर्वाधिक 13, जौनपुर 3, अंबेडकरनगर, अमेठी, सीतापुर में दो-दो जबकि बस्ती, गाजियाबाद, हरदोई, मेरठ और इलाहाबाद में एक-एक मरीज की मौत हो चुकी है।
‘डेंगू को लेकर मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोलूंगा। कोर्ट के सवालों का जवाब दूंगा। डेंगू से मौतों को नहीं छिपाया जा रहा है। जो भी तस्वीर सामने आई है, उसे कोर्ट में पेश किया गया है।कोर्ट के निर्देश पर डेथ ऑडिट और अन्य काम जारी है, इसकी निगरानी सीधे प्रमुख सचिव कर रहे हैं।’ - एसएनएस यादव, सीएमओ