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लाल-नीली बत्तियों के अवैध इस्तेमाल पर हाईकोर्ट सख्त

Fri, 02 Aug 2013 04:25 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Fri, 02 Aug 2013 04:25 PM IST
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hc lucknow bench furious on red beacon usage

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वाहनों पर अनधिकृत रूप से लगाई गई लाल-नीली बत्तियों, फ्लैशर व बेकन लाइटें लगाकर वीआईपी का रौब झाड़ने वालों पर प्रभावी अंकुश के मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है।

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अदालत ने आखिरी मौका दिए जाने के बावजूद लाल-नीली लाइटें लगाने के लिए अधिकृत लोगों की संशोधित वरीयता सूची पेश न करने पर सूबे के प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन को 11 जुलाई को तलब किया है।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह एवं न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने बुधवार को मामले में करीब 12 साल से लंबित एक पीआईएल पर यह आदेश दिया।

वर्ष 2001 में नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर की तरफ से यह याचिका दायर कर यह मद्दा उठाया गया था। याची की तरफ से वकील अमरेंद्र कुमार बाजपेयी ने बताया कि पहले कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार की तरफ से लाल-नीली लाइटें लगाने को अधिकृत प्राधिकारियों की जो सूची पेश की गई थी।
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इसमें कानूनी प्राधिकारियों को संवैधानिक प्राधिकारियों के ऊपर वरीयता दी गई थी। इस पर कोर्ट की सख्ती के चलते सरकार की तरफ से इसमें संशोधन कर संशोधित वरीयता सूची पेश करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह सूची पेश नहीं की गई।


गत मई में सुनवाई के दौरान अदालत ने 10 जुलाई को सूची पेश करने का अंतिम मौका दिया था। इसके बावजूद जब बुधवार को सूची नहीं पेश की गई तो कोर्ट ने प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन को 11 जुलाई को तलब किया है। उधर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल पेश हुईं।

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