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सुना है क्या: हर ख्वाहिश पर दम निकले, छुट्टी में बुलावे पर अघोषित बगावत; 'माननीय का तंज' के पढ़ें किस्से

Fri, 08 May 2026 12:05 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 08 May 2026 12:05 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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Have You Heard? Dying to Fulfill Every Whim, Yet Staging an 'Undeclared Rebellion' When Summoned During Leave—
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'धरी रह गईं माननीयों की नोटशीट' की कहानी। इसके अलावा 'टेंपर्ड ग्लास से दिखने लगे गुनाह' और 'चुस्त महकमे में सुस्त फाइलें' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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हर ख्वाहिश पर दम निकले

सूबे के एक प्रमुख विश्वविद्यालय के पूर्व मुखिया का राजधानी प्रेम खत्म नहीं हो रहा है। मुखिया सशरीर भले ही कई सौ मील दूर बैठे हैं, लेकिन उनका दिल राजधानी में ही धड़कता है। अभी भी वो अपने पूर्व संस्थान को लेकर जानकारी जुटाते रहते हैं। 

इसी मोह में उन्होंने हाल ही में एक बड़े विश्वविद्यालय के लिए चल रही चयन प्रक्रिया के तहत खुद भी आवेदन कर दिया है। अपने लोगों के बीच वह फिर से वापसी के दावे भी कर रहे हैं। परिसर में चर्चा है कि साहब की तो हर ख्वाहिश ही ऐसी है कि उनकी हर ख्वाहिश पर दम निकले।

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छुट्टी में बुलावे पर अघोषित बगावत

यूपी के विकास के लिए रात दिन काम में रत एक साहब छुट्टियों में भी दफ्तर में बैठे रहते हैं। संडे हो या मंडे...होली हो या दिवाली..दफ्तर खोलकर फाइलें निपटाते रहते हैं। लिहाजा स्टाफ को भी आना पड़ता है। ऐसे ही औद्योगिक जमीनों वाले प्राधिकरण में छुट्टी के दिन जाकर काम देखने लगे। 

शुरू में कामकाजी स्टाफ की छवि चमकाने के लिए कर्मचारी-अफसर खूब आए, लेकिन जब अधिकांश छुट्टियों में दफ्तर से बुलावा आने लगा तो मातहतों ने अघोषित विद्रोह कर दिया। अब उस विभाग के अफसर-कर्मचारी कह रहे हैं कि पांच दिन में ही हांफ जाते हैं। हर बार शनिवार कुर्बान नहीं करेंगे।



 

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माननीय का तंज, सब दंग

फल उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा के लिए आयोजित कार्यक्रम में महकमे के ही कई अफसर गायब रहे। लिहाजा संबोधन के दौरान विभागीय माननीय ने ऐसे अधिकारियों का नाम लिए बीना ताना मारा तो कई मौजूद अफसर सकते में आ गए। चंद सेकेंड में माननीय के ताने की सूचना गैरहाजिर साहबों तक पहुंच गई।

लिहाजा कार्यक्रम में मौजूद अफसरों के फोन घनघनाने लगे। जो लोग कार्यक्रम से गायब थे, वे पता करने में जुट गए कि माननीय ने कहा क्या। ऐसे सभी अफसर यह जानने की कोशिश में जुटे थे कि माननीय ने किसके बारे में कहा है।

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