Hathras Gang Rape Case: पुलिस ने जबरदस्ती नहीं कराया अंतिम संस्कार, शव हो रहा था खराबः एडीजी कानून व्यवस्था
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हाथरस की घटना में किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरती गई है। यह कहना है प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार का। प्रशांत कुमार ने पत्रकारो को बताया कि इस मामले में पुलिस की ओर से कोई कोताही नहीं बरती गई है। मृतका के भाई की तहरीर पर तत्काल एफआईआर दर्ज की गई। गैंगरेप का तथ्य प्रकाश में आते ही गैंगरेप की धाराएं बढ़ाई गई और अब उस एफआईआर में 302 की धारा भी बढ़ा दी गई है।
प्रशांत कुमार ने बताया कि सभी जरूरी जांच कराई गई। मृतका के भाई की तहरीर पर 14 सितंबर को ही धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। उसके इलाज का भी पूरा बंदोबस्त किया गया। बाद में 22 सितंबर को जब पीड़िता बोलने की स्थिति में आई और उसने गैंग रेप की बात बताई उसे भी तत्काल गैंग रेप की धाराओं को एफआईआर में बढ़ाया गया। जिन लोगों पर पीड़िता ने आरोप लगाया उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया पुलिस की ओर से कोई कोताही नहीं बरती गई है।
प्रशांत कुमार ने एएमयू ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों के हवाले से कहा कि डॉक्टरों ने लिखकर दिया है कि पीड़िता ने किसी भी तरह के दुष्कर्म की बात नहीं बताई। उन्होंने कहा कि जहां तक अंतिम संस्कार की बात है उसमें परिवार के सहमति से अंत्येष्टि की गई। उन्होंने कहा कि संभव है कि परिवार के कुछ सदस्यों की सहमति नहीं रही हो। पुलिस ने जबरदस्ती नहीं की।
उन्होंने कहा कि पीड़िता की मौत सुबह हो गई थी और पोस्टमार्टम के बाद शव खराब हो रहा था। उन्होंने बताया कि मृतका का पोसटमार्टम दिल्ली में कराया गया। डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया है। उसकी रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। उन्होंने बताया कि गृह सचिव की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी सभी पहलुओं की जांच करेगी। स्थानीय पुलिस के स्तर पर अगर कोई चूक हुई तो वह सच्चाई भी सामने आ जाएगी। किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
नहीं काटी गई थी जुबान
एडीजी ने कहा कि जुबान कटने का आरोप गलत है। एम्स रिफर किए जाने से पहले जो रिपोर्ट एएमयू ट्रामा सेंटर ने दी है, उसमें जुबान कटने का जिक्र नहीं है। बाकी चीजें पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होंगी।
एसआईटी में दलित और महिला भी
शासन स्तर से गठित की गई एसआईटी में एक दलित अफसर और महिला अफसर को शामिल किया गया है। आईजी भगवान स्वरूप के साथ इस एसआईटी में डीआईजी चंद्रप्रकाश और महिला अफसर के रूप में पूनम को शामिल किया गया है। चंद्र प्रकाश उन्नाव में पीटीएस में डीआईजी के पद पर तैनात हैं जबकि पूनम आगरा में पीएसी में सेनानायक के पद पर तैनात हैं।
पीड़िता को अनाथों की तरह पुलिस के जोर से जला दिया गयाः सोनिया गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि हाथरस की निर्भया की मृत्यु नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार की उपेक्षा और उसके प्रशासन ने उसे मारा है। जब वह जिंदा थी, तो उसकी सुनवाई नहीं हुई। उसकी रक्षा नहीं हुई। उसकी मृत्यु के बाद उसे अपने घर की मिट्टी और हल्दी भी नसीब नहीं होने दी।
उन्होंने कहा कि उस बच्ची को अनाथों की तरह पुलिस के जोर से जला दिया गया। ये कैसा न्याय है? ये कैसी सरकार है? आपको लगता है कि आप कुछ भी कर लेंगे और देश देखता रहेगा। मैं कांग्रेस की तरफ से हाथरस पीड़ित परिवार के न्याय की मांग के साथ खड़ी हूं।