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हाथरस केस: हाई कोर्ट ने सीबीआई से पूछा कब तक पूरी होगी तफ्तीश, 25 नवंबर से पहले तलब की स्टेटस रिपोर्ट
Thu, 05 Nov 2020 10:53 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 05 Nov 2020 10:53 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस काण्ड मामले में विवेचना कर रही सीबीआई से पूछा है कि केस की तफ्तीश पूरी करने में लगभग कितना समय लगेगा। साथ ही सीबीआई को निर्देश दिया कि मामले की अगली सुनवाई (25 नवंबर) के पहले केस की जारी तफ्तीश की स्टेटस रिपोर्ट पेश करे।
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कोर्ट ने सीआरपीएफ के महानिदेशक को मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि अगली सुनवाई के पहले सीआरपीएफ का कोई जिम्मेदार अफसर यह बताते हुए हलफनामा दाखिल करे कि पीड़िता के परिवार को किस तरह की सुरक्षा दी गई है और इसके लिए क्या उपाय किए गए हैं। कोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर बीते सोमवार को सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया था, जो गुरुवार को कोर्ट की वेबसाईट पर अपलोड हुआ।
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न्यायमूर्ति पंकज मितल और न्यायमूर्ति राजन राय की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार, गृह सचिव तरुण गाबा, हाथरस के तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, हाथरस के डीएम और वहां के तत्कालीन एसपी ने मामले में जवाबी हलफनामे दाखिल किए।
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केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसपी राजू, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही, केस के आरोपियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और पीड़िता के परिजनों की ओर से वकील सीमा कुशवाहा ने पक्ष पेश किए थे। मामले में नियुक्त न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर भी पेश हुए थे।
कोर्ट ने इससे पहले गत 12 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान हाथरस में परिवार की मर्जी के बिना रात में मृतका का अंतिम संस्कार किए जाने पर तीखी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि बिना धार्मिक संस्कारों के युवती का दाह संस्कार करना पीड़ित, उसके स्वजन और रिश्तेदारों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इसके लिए जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने इस मामले में मीडिया, राजनीतिक दलों व सरकारी अफसरों की अतिसक्रियता पर भी नाराजगी प्रकट करते हुए उन्हें इस मामले में बेवजह बयानबाजी न करने की हिदायत भी दी थी।
मालूम हो कि उतर प्रदेश के हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव में गत 14 सितंबर को दलित युवती से चार लड़कों ने कथित रूप के साथ सामूहिक दुष्कर्म और बेरहमी से मारपीट की थी। इस लड़की को पहले जिला अस्पताल, फिर अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। हालत खराब होने पर पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां 29 सितंबर को मृत्यु हो गई थी। मौत के बाद आनन-फानन में पुलिस ने रात में अंतिम संस्कार कर दिया था, जिसके बाद काफी बवाल हुआ।
परिवार का कहना है कि उनकी मर्जी के खिलाफ पुलिस ने पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया, हालांकि पुलिस इन दावों को खारिज कर रही है। हाथरस के तत्कालीन एसपी विक्रान्त वीर ने सोमवार को कोर्ट में कहा कि पीड़िता के शव का रात में अंतिम संस्कार कराने का निर्णय उनका और डीएम का था। मामले की अब हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच कर रही है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को नियत की है। अदालत ने सोमवार को पेश हुए अफसरों को अगली सुनवाई पर हजिरी से छूट दे दी है।