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कन्नौज हादसे में बुझ गए परिवार के चिराग, चीखों के बीच जलीं चिताएं
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हादसे में जाने गंवाने वाले सोनू यादव के परिवरीजन रोते-बिलखते।
- फोटो : ??? ?????
काकोरी के कलियाखेड़ा, बुधड़िया और पानखेड़ा में पांच युवकों व किशोर के मौत की सूचना मिली तो तीनों गांव में मातम छा गया।
जब दोपहर बाद एक साथ कलियाखेड़ में चार युवकों की चिताएं जलीं तो गांव के लोगों की आंख में आंसू थे। हर किसी के जुबान पर एक ही सवाल था अब परिवारों को कौन संभालेगा।
बुधड़िया निवासी सचिवालय से सेवानिवृत्त भैयालाल यादव का बेटा ज्ञानेंद्र यादव (32) अपने बहनोई के छोटे भाई कलियाखेड़ा निवासी प्रमोद यादव उर्फ पप्पू (35), सोनू यादव (31), सत्येंद्र यादव (18), सूरज (15) और मोहित पाल (36) के साथ शुक्रवार शाम राजस्थान के दौसा स्थित मेंहदीपुर बालाजी जा रहा था।
सभी एक ही कार में थे और ज्ञानेंद्र ड्राइविंग कर रहा था। करीब एक बजे आगरा एक्सप्रेस-वे पर तालग्राम थानाक्षेत्र में चलते ट्रक से जा टकराई और सभी की मौत हो गई।
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देर रात करीब 3.30 बजे सभी मृतकों के घर पर सूचनाएं पहुंच गईं। इसके बाद परिवारीजन कुछ करीबी लोगों को लेकर कन्नौज मेडिकल कॉलेज पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर दोपहर को गांव लौट पाए।
हादसे में जान गंवाने वाले कालियाखेड़ा के प्रमोद, उसके चचेेरे भाई सत्येंद्र व पट्टीदार सूरज के अलावा मोहित का शव गांव पहुंचा तो चीखपुकार मच गई। महिलाओं को संभालना मुश्किल हो गया।
हृदय विदारक मंजर देख बडे़ बुजुर्ग सभी की आंखें नम हो गईं। गांव के किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। कुछ देर तक शव दरवाजे पर रखने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले गए। परिवारीजनों की चीखों और रुदन के बीच एक साथ चारों की चिताओं को मुखाग्नि दी गई।
परिवार का अकेला कमाऊ सदस्य था प्रमोद
कमाई का एक मात्र जरिया प्रमोद की मौत की खबर ने परिवार पर वज्रपात कर दिया। प्रमोद प्रॉपर्टी का काम करता था। परिवार में पिता जंगी यादव, मां रामदुलारी के अलावा पत्नी खुशबू, बेटी किट्टू व बेटा युवराज है। दो छोटे भाई विनोद व संतोष है। प्रॉपर्टी के कारोबार से ही परिवार पल रहा था। आंख में आंसू लिए जंगी यादव के लड़खड़ाई जुबान से सिर्फ यही निकला कि भगवान ने न जाने किस अपराध की सजा दी।
मासूम बस यही पूछ रहे थे, पापा को क्या हो गया है
नौमी लाल यादव का बेटा सोनू ठेके पर राजगीर का काम करता था। हादसे की सूचना पर नौमी लाल व पत्नी तुलसा देवी का बुरा हाल हो गया और सोनू की पत्नी सरिता बेहोश हो गई। जबकि बेटा शिवांश और बेटी शिवांशी बार-बार पूछ रहे थे पापा को क्या हो गया और दादा-दादी व मम्मी क्यों रो रही हैं। जब शव दरवाजे पर पहुंचा तो उनसे पांव छूने के लिए कहा गया। तब दोनों मासूमों को पता चला कि अब पिता इस संसार में नहीं रहे। मासूम बेटे ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। यह देख पूरे सभी का कलेजा फट गया।
बीफार्मा के बाद सत्येंद्र बटाता था पिता का हाथ
परिवारीजनों के मुताबिक, सत्येंद्र की मां अर्चना की मौत हो चुकी है। परिवार में पिता गोपी यादव व भाई सुधीर है। उसने हाल ही बीफार्मा की पढ़ाई पूरी की थी और काम करने लगा था ताकि पिता का हाथ बंटा सके। वह अपने खर्चे खुद निकालता था। जवा बेटे की मौत के बाद पिता के सपने टूट गए। गोपी यादव ने उसे सरकारी अस्पताल में नौकरी करते देखना चाहते थे। वहीं, भाई सुधीर भी एक टक सत्येंद्र के शव को देखता रहा। उसके आंख के आंसू नहीं थम रहे थे।
अस्त हो गया अभिमन्यु और रामजानकी का सूरज
अभिमन्यु और रामजानकी को कोई औलाद नहीं थी। अभिमन्यू किराना की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते रहे। एक औलाद के लिए दंपती ने कई मंदिरों व देव स्थानों पर मत्था टेका और मिन्नतें कीं। इसके बाद सूरज उनकी जिंदगी में आया। पिता के मुताबिक, उसके जन्म पर बाबा काफी खुश थे। उन्होंने पूरे गांव में मिठाई बांटी थी। 15 साल इकलौता बेटा सूरज सातवीं का छात्र था। अभिमन्यु के मुताबिक, सूरज के जन्म के बाद किसी भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। शनिवार सुबह जैसे ही मोबाइल की घंटी बजी एक बार तो अटपटा लगा कि इतनी सुबह कौन जगा रहा है। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद उनका कलेजा मुंह को आ गया। उनकी चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी जाग गए। दोपहर बाद बेटे का शव जैसे ही दरवाजे पर पहुंचा तो मां रामजानकी बेहोश हो गईं।
ज्ञानेंद्र का शव देखकर मां और पत्नी बेहोश
बुधड़िया निवासी भैयालाल यादव सचिवालय से रिटायर हैं। उनका इकलौता बेटा ज्ञानेंद्र अपने बहनोई के भाई प्रमोद संग मिलकर इलाके में रीयल एस्टेट का काम करता था। पिता की पेंशन व उसकी कमाई से घर चल रहा था। जवान बेटे की अर्थी लेकर भैयालाल घर पहुंचे तो ज्ञानेंद्र की मां सियापति गुमसुम हो र्गईं। पति का शव देख रीना बेहोश हो गई। भैयालाल किसी तरह जवान बेटे का शव दरवाजे तक लेकर पहुंचे लेकिन उनकी हिम्मत भी जवाब भी दे गई। वह एकटक शव को देखते रहे। वहीं ज्ञानेंद्र का मासूम बेटा अथर्व इन सब से अंजान था। वह घर पर मौजूद लोगों के चेहरों को देख रहा था और पूछ रहा था कि पापा कुछ बोल क्यों नहीं रहे हैं। पापा को क्या हो गया है।
मोहित की मौत से परिवार को लगा सदमा
मोहान रोड के पानखेड़ा निवासी राजकुमार के चार बेटे थे। मोहित पाल तीसरे नंबर का बेटा था। राजकुमार दूध बेचने का काम करते थे। पिता की मदद के लिए मोहित ने रियल एस्टेट का काम शुरू किया था। वह अपने बड़े भाइयों आशीष व सर्वेश की मदद करता था तो छोटे भाई दशरथ को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना चाहता था। शनिवार सुबह जवान बेटे की मौत की सूचना पर राजकुमार सुधबुध खो बैठे और मां रामकली बेहोश हो गईं। परिवारीजनों के मुताबिक, मोहित के भाई की शादी तय थी। मई में तिलक है।
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जब दोपहर बाद एक साथ कलियाखेड़ में चार युवकों की चिताएं जलीं तो गांव के लोगों की आंख में आंसू थे। हर किसी के जुबान पर एक ही सवाल था अब परिवारों को कौन संभालेगा।
बुधड़िया निवासी सचिवालय से सेवानिवृत्त भैयालाल यादव का बेटा ज्ञानेंद्र यादव (32) अपने बहनोई के छोटे भाई कलियाखेड़ा निवासी प्रमोद यादव उर्फ पप्पू (35), सोनू यादव (31), सत्येंद्र यादव (18), सूरज (15) और मोहित पाल (36) के साथ शुक्रवार शाम राजस्थान के दौसा स्थित मेंहदीपुर बालाजी जा रहा था।
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सभी एक ही कार में थे और ज्ञानेंद्र ड्राइविंग कर रहा था। करीब एक बजे आगरा एक्सप्रेस-वे पर तालग्राम थानाक्षेत्र में चलते ट्रक से जा टकराई और सभी की मौत हो गई।
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देर रात करीब 3.30 बजे सभी मृतकों के घर पर सूचनाएं पहुंच गईं। इसके बाद परिवारीजन कुछ करीबी लोगों को लेकर कन्नौज मेडिकल कॉलेज पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर दोपहर को गांव लौट पाए।
हादसे में जान गंवाने वाले कालियाखेड़ा के प्रमोद, उसके चचेेरे भाई सत्येंद्र व पट्टीदार सूरज के अलावा मोहित का शव गांव पहुंचा तो चीखपुकार मच गई। महिलाओं को संभालना मुश्किल हो गया।
हृदय विदारक मंजर देख बडे़ बुजुर्ग सभी की आंखें नम हो गईं। गांव के किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला। कुछ देर तक शव दरवाजे पर रखने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले गए। परिवारीजनों की चीखों और रुदन के बीच एक साथ चारों की चिताओं को मुखाग्नि दी गई।
परिवार का अकेला कमाऊ सदस्य था प्रमोद
कमाई का एक मात्र जरिया प्रमोद की मौत की खबर ने परिवार पर वज्रपात कर दिया। प्रमोद प्रॉपर्टी का काम करता था। परिवार में पिता जंगी यादव, मां रामदुलारी के अलावा पत्नी खुशबू, बेटी किट्टू व बेटा युवराज है। दो छोटे भाई विनोद व संतोष है। प्रॉपर्टी के कारोबार से ही परिवार पल रहा था। आंख में आंसू लिए जंगी यादव के लड़खड़ाई जुबान से सिर्फ यही निकला कि भगवान ने न जाने किस अपराध की सजा दी।
मासूम बस यही पूछ रहे थे, पापा को क्या हो गया है
नौमी लाल यादव का बेटा सोनू ठेके पर राजगीर का काम करता था। हादसे की सूचना पर नौमी लाल व पत्नी तुलसा देवी का बुरा हाल हो गया और सोनू की पत्नी सरिता बेहोश हो गई। जबकि बेटा शिवांश और बेटी शिवांशी बार-बार पूछ रहे थे पापा को क्या हो गया और दादा-दादी व मम्मी क्यों रो रही हैं। जब शव दरवाजे पर पहुंचा तो उनसे पांव छूने के लिए कहा गया। तब दोनों मासूमों को पता चला कि अब पिता इस संसार में नहीं रहे। मासूम बेटे ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। यह देख पूरे सभी का कलेजा फट गया।
बीफार्मा के बाद सत्येंद्र बटाता था पिता का हाथ
परिवारीजनों के मुताबिक, सत्येंद्र की मां अर्चना की मौत हो चुकी है। परिवार में पिता गोपी यादव व भाई सुधीर है। उसने हाल ही बीफार्मा की पढ़ाई पूरी की थी और काम करने लगा था ताकि पिता का हाथ बंटा सके। वह अपने खर्चे खुद निकालता था। जवा बेटे की मौत के बाद पिता के सपने टूट गए। गोपी यादव ने उसे सरकारी अस्पताल में नौकरी करते देखना चाहते थे। वहीं, भाई सुधीर भी एक टक सत्येंद्र के शव को देखता रहा। उसके आंख के आंसू नहीं थम रहे थे।
अस्त हो गया अभिमन्यु और रामजानकी का सूरज
अभिमन्यु और रामजानकी को कोई औलाद नहीं थी। अभिमन्यू किराना की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते रहे। एक औलाद के लिए दंपती ने कई मंदिरों व देव स्थानों पर मत्था टेका और मिन्नतें कीं। इसके बाद सूरज उनकी जिंदगी में आया। पिता के मुताबिक, उसके जन्म पर बाबा काफी खुश थे। उन्होंने पूरे गांव में मिठाई बांटी थी। 15 साल इकलौता बेटा सूरज सातवीं का छात्र था। अभिमन्यु के मुताबिक, सूरज के जन्म के बाद किसी भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। शनिवार सुबह जैसे ही मोबाइल की घंटी बजी एक बार तो अटपटा लगा कि इतनी सुबह कौन जगा रहा है। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद उनका कलेजा मुंह को आ गया। उनकी चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी जाग गए। दोपहर बाद बेटे का शव जैसे ही दरवाजे पर पहुंचा तो मां रामजानकी बेहोश हो गईं।
ज्ञानेंद्र का शव देखकर मां और पत्नी बेहोश
बुधड़िया निवासी भैयालाल यादव सचिवालय से रिटायर हैं। उनका इकलौता बेटा ज्ञानेंद्र अपने बहनोई के भाई प्रमोद संग मिलकर इलाके में रीयल एस्टेट का काम करता था। पिता की पेंशन व उसकी कमाई से घर चल रहा था। जवान बेटे की अर्थी लेकर भैयालाल घर पहुंचे तो ज्ञानेंद्र की मां सियापति गुमसुम हो र्गईं। पति का शव देख रीना बेहोश हो गई। भैयालाल किसी तरह जवान बेटे का शव दरवाजे तक लेकर पहुंचे लेकिन उनकी हिम्मत भी जवाब भी दे गई। वह एकटक शव को देखते रहे। वहीं ज्ञानेंद्र का मासूम बेटा अथर्व इन सब से अंजान था। वह घर पर मौजूद लोगों के चेहरों को देख रहा था और पूछ रहा था कि पापा कुछ बोल क्यों नहीं रहे हैं। पापा को क्या हो गया है।
मोहित की मौत से परिवार को लगा सदमा
मोहान रोड के पानखेड़ा निवासी राजकुमार के चार बेटे थे। मोहित पाल तीसरे नंबर का बेटा था। राजकुमार दूध बेचने का काम करते थे। पिता की मदद के लिए मोहित ने रियल एस्टेट का काम शुरू किया था। वह अपने बड़े भाइयों आशीष व सर्वेश की मदद करता था तो छोटे भाई दशरथ को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना चाहता था। शनिवार सुबह जवान बेटे की मौत की सूचना पर राजकुमार सुधबुध खो बैठे और मां रामकली बेहोश हो गईं। परिवारीजनों के मुताबिक, मोहित के भाई की शादी तय थी। मई में तिलक है।