Lucknow News : हनुमंत धाम जहां हर तरफ नजर आते हैं सिर्फ बजरंगबली, 108 फीट की मूर्ति बनेगी पहचान
महंत राम सेवक दास कहते हैं कि हमारी चार पीढ़ी इस मंदिर की सेवा में है। इसकी स्थापना गुरु नरसिंह दास ने करवाई थी, जो हमारे गुरु के गुरु थे। नीचे स्थित पूरबमुखी हनुमान सिद्ध पीठ है और मेरी समझ से यह 400 साल पुरानी है। कहते हैं जो भी मांगों पूरा होता है। नए गर्भगृह में दक्षिण मुखी हनुमान पधारे हैं।
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मन अशांत हो, प्राकृतिक वातावरण में आंख बंद कर बैठने को व्याकुल हो रहे हैं, ईश भक्ति में लीन होने के लिए शांत माहौल की तलाश है तो पहुंच जाएं हनुमंत धाम। शहर के बीचोबीच, बेगम हजरत महल पार्क से मोती महल लॉन की तरफ आते वक्त बीच में हनुमंत धाम का बोर्ड आपको दिख जाएगा। चंद सीढ़ियां, छोटा सा दरवाजा आपको एक बारगी भ्रमित करेगा मंदिर की भव्यता को लेकर, पर अंदर पहुंचने के बाद आपके सारे भ्रम दूर हो जाएंगे और आपका अचंभित होना तय मानिए। चलिए, आपके जाने से पहले हम आपको सैर करवाते हैं हनुमंत धाम की। सैर से पहले एक बात और, यहां छोटे-बड़े सब मिलाकर आपको सवा लाख हनुमान जी दिखेंगे जिनका आशीर्वाद आपको मिलेगा। ये भी जान लीजिए इस धाम की परिकल्पना से लेकर इसे जमीन पर उतारने तक में जिनकी मेहनत है वे तीन भाई हैं-संजय सिन्हा, उदय सिन्हा और विजय सिन्हा।
सामने दक्षिण मुखी और नीचे पूरब मुखी हनुमान
महंत राम सेवक दास मिलेंगे मंदिर में आपको। कहते हैं कि हमारी चार पीढ़ी इस मंदिर की सेवा में है। इसकी स्थापना गुरु नरसिंह दास ने करवाई थी, जो हमारे गुरु के गुरु थे। नीचे स्थित पूरबमुखी हनुमान सिद्ध पीठ है और मेरी समझ से यह 400 साल पुरानी है। कहते हैं जो भी मांगों पूरा होता है। नए गर्भगृह में दक्षिण मुखी हनुमान पधारे हैं। नर्मदा नदी से लाए गए शिवलिंग भी अलग है, एक तरफ ओम तो दूसरी तरफ नाग के दर्शन होते हैं। दीवारों में उकेरी गई पेंटिंग भी स्टोन की बनी हैं, जो सदियों तक अक्षुण्ण रहेंगी।
जिधर देखो उधर हनुमान, सरोवर और नदिया की धारा
आपके कदम जिधर भी चल पड़ेंगे,यकीन मानिए आपको हर कहीं, जर्रे-जर्रे में हनुमान के दर्शन होंगे। कहीं शिवलिंग को गले लगाए हनुमान तो कहीं राम कीर्तन में मगन हनुमान हैं। सीढ़ियों से उतरते हुए जब आप नदी किनारे की ओर जैसे ही बढ़ते जाएंगे, चारों तरफ प्रकृति की गोद में बसी एक देव नगरी का अहसास होगा। चलते-चलते थक जाएं या फिर आंख बंद कर ध्यान लगाने की इच्छा हो तो पत्थरों को काटकर बनाए गए स्थान आपको सुरम्य वन जैसा अहसास कराएंगे।
राजस्थानी कारीगरों ने निखारा
पीठाधीश्वर संजय सिन्हा कहते हैं कि मंदिर में बना भगवान भोलेनाथ की नीली मूर्ति मंदिर की आभा कई गुना बढ़ा देती है। हमारी बनाई डिजाइन है, जिसे बनाने में राजस्थानी कारीगरों की मेहनत व हुनर ने कमाल दिखाया है।
108 फीट की मूर्ति बनेगी पहचान
संजय सिन्हा कहते हैं कि बीते दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 108 फीट की मूर्ति का शिलान्यास किया है। मेरे हिसाब से दो साल लग जाएंगे इसे तैयार होने में। ये भी क्या अद्भुत दृश्य होगा कि एक कोने में 151 फीट ऊंची लक्ष्मण की प्रतिमा तो दूसरी ओर 108 फीट ऊंची हनुमान की प्रतिमा होगी।