फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   hamirpur army recruitment scam investigated by cbi

सेना भर्ती घोटाला: 5 से 10 लाख में हुई थी डील, नेपाली युवा थे निशाने पर

Fri, 11 May 2018 05:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 11 May 2018 05:40 PM IST
विज्ञापन
hamirpur army recruitment scam investigated by cbi
Demo Pic - फोटो : अमर उजाला

सेना भर्ती में गड़बड़ी की सीबीआई जांच का दायरा बढ़ा तो सेना और राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। सीबीआई फिलहाल हमीरपुर में हुए भर्ती घोटाले की जांच कर रही है। हमीरपुर जैसा ही मामला लखनऊ और वाराणसी में भी सामने आ चुका है।

विज्ञापन


2016 में यूपी एसटीएफ ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 29 जवानों की भर्ती का खुलासा किया था। सेना इन सबके खिलाफ आंतरिक जांच कर रही है। एसटीएफ का दावा था कि यह भर्तियां पांच से दस लाख रुपये में फर्जी दस्तावेज के सहारे हुई हैं।
विज्ञापन


इसमें राजस्व विभाग, तहसील और सैन्य कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई थी। नौकरी दिलाने वाले कैंट स्थित एमबी क्लब के दो नौकर मिलन थापा व संदीप थापा के साथ कोचिंग सेंटर संचालक अनिल श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नेपाल मिलेट्री इंटेलीजेंस का बर्खास्त कर्मचारी था। वह नेपाली नागरिकों से भारतीय सेना में भर्ती कराने के नाम पर सात से दस लाख रुपये लेता था। इस फर्जीवाड़े में सेना के रिटायर्ड हवलदार और राजस्व विभाग के अस्थाई कर्मचारी के नाम भी सामने आए थे।

 एसटीएफ की जांच से पता चला कि फर्जी दस्तावेज से सेना में 29 जवानों की भर्ती हुई थी। इन सबके नाम लखनऊ के कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें अमित थापा, भानु प्रताप राय, बिसेन बुधा, अमित सिंह राना, भानु प्रताप सिंह, नारायण सिंह, मनीष शर्मा, निर्मल गुरूंग, त्रिभुवन, देवनाथ, करन सिंह, प्रदुम्न सिंह, अभिमन्यु सिंह, मदन थापा, आशीष रावत, दीपक थापा, नरेन्द्र सिंह, योगेन्द्र सिंह, करन सिंह, सिराज राय, हरिकेश सिंह, राजेश थापा, कमल थापा, रंजीत राय, किशन उर्फकृष्णपाल सिंह, रेशम थापा, हिमांशु सिंह, भारत थापा और राहुल गौतम का नाम शामिल था।

वहीं पिछले साल यूपी एटीएस ने वाराणसी से एक युवक को गिरफ्तार कर नेपाली युवकों की भर्ती का खुलासा किया था। चंद्र बहादुर खत्री नामक युवक पूर्व में सेना का सिपाही था। नेपाल निवासी चंद्र बहादुर 1982 में गोरखा रेजीमेंट, गोरखपुर से भर्ती हुआ।

1991 में उसे सेना से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद वह वाराणसी रेजिमेंट के आस-पास किराए का मकान लेकर रहने लगा। नेपाल से सेना में भर्ती होने के लिए आने वाले युवक इसके निशाने पर होते थे।


इस मामले में सेना के एक हवलदार की भूमिका सामने आई थी। साथ ही फर्जी तरीके से निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज बनवाने के मामले में स्थानीय तहसील कर्मियों से भी एटीएस ने पूछताछ की थी। माना जा रहा है कि लखनऊ और वाराणसी में हुई भर्ती से जुड़े दस्तावेज भी सीबीआई खंगाल सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed