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हॉलमार्क आभूषण की वापसी पर मिलेगा पूरा पैसा

Fri, 27 Sep 2013 02:15 AM IST
लखनऊ/अभिषेक यादव
लखनऊ/अभिषेक यादव Updated Fri, 27 Sep 2013 02:15 AM IST
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hallmark is the guarantee of pure ornaments

अगर आप चाहते हैं कि आभूषण खरीदते समय आपके पूरे पैसे वसूल हों तो हॉलमार्क

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गहनें ही खरीदें। क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि जब आप गहनें बेचने जाते हैं तो आपको उसके उचित दाम नहीं मिलते हैं।

22 कैरेट का बताकर 16-18 कैरेट सोने के आभूषण न बेचे जाएं, इसके लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने 13 वर्ष पूर्व हॉलमार्क व्यवस्था विकसित की।

लखनऊ में सिर्फ 36 जौहरियों ने फिलहाल इसमें खुद को पंजीकृत करवाया है। दूसरी ओर प्रदेश में यह आंकड़ा सिर्फ 244 है।

इसकी वजह गुरुवार को बीआईएस द्वारा जौहरियों के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में सामने आई, जहां खुद जौहरियों ने इसकी कमियां गिनाईं।

दूसरी ओर बीआईएस के अधिकारियों ने हॉलमार्क व्यवस्था के महत्व और जरूरत के बारे में जानकारी दी जिसे सभी जौहरियों ने स्वीकार भी किया। वहीं अपनी मजबूरियां भी गिनाईं।

वरिष्ठ वैज्ञानिक एके सिन्हा व बीआईएस लखनऊ के प्रमुख डॉ. आरके बजाज ने बताया कि सोना-चांदी के आभूषण खरीदने वाले नागरिक जब इसे बेचने जाते हैं तो उसके जायज दाम नहीं मिलते।
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अध्ययन में सामने आया कि इसकी वजह कैरेट से होने वाली छेड़छाड़ है। कई बार खुद आभूषण कारोबारी भी बड़े डीलरों से मूल्यवान धातु खरीदने के दौरान ठगे गए।

ऐसे में हॉलमार्क जरूरी हो गया। 2000 में सोने के आभूषण और 2005 से सोने-चांदी व चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग व्यवस्था बीआईएस ने लागू की, जिसे धीरे-धीरे लोकप्रियता मिली।
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प्रदेश में 8 सर्टिफिकेशन सेंटर
वैज्ञानिक एसके सिन्हा ने बताया कि प्रदेश में हॉलमार्क सर्टिफिकेशन के लिए 8 सेंटर हैं, जिनमें लखनऊ, कानपुर और मेरठ में 2-2 और आगरा व गोरखपुर में 1-1 सेंटर हैं।

ये कमियां गिनाईं जौहरियों ने
आभूषण कारोबारी राम कुमार वर्मा के अनुसार एक बार आवेदन करने के दौरान त्र20 हजार फीस देकर 3 साल का लाइसेंस मिलता है, जब इसे री-न्यू करवाने जाओ तो फिर से पूरे 20 हजार रुपये चार्ज किए जाते हैं। री-न्यू कर रहे हैं या फिर से लाइसेंस बेच रहे हैं?

चौक सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष केसी जैन ने मुद्दा उठाया कि लखनऊ में सोने के आभूषणों में 18 और 19 कैरेट सोने के आभूषणों की अधिक मांग रहती है, जबकि इन दोनों श्रेणियों के आभूषणों की श्रेणी ही निर्धारित नहीं है।


ऐसे में कारोबारी क्यों लाइसेंस लें, जब उसे 18 और 19 कैरेट श्रेणियों के आभूषण बिना हॉल मार्क के ही बेचने हैं। रजिस्ट्रेशन की फीस को भी बहुत अधिक बताया गया, और छोटे कारोबारियों के लिए इसे कम करने की मांग की गई।

चांदी के आभूषणों में नई डिजाइन मायने रखती हैं, इनमें कम शुद्धता की जरूरत होती है, लेकिन हॉलमार्क 990 से 800 प्वाइंट का दिया जा रहा है।

कारोबारियों की जरूरत 750, 700 और 585 प्वाइंट की है, यानी 80 प्रतिशत से कम शुद्धता वाले चांदी के आभूषणों की भी हॉलमार्किंग होनी चाहिए।

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