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Lucknow News: गांवों में स्तन कैंसर का खतरा आधा
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केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग मे इमेजिंग और इंटरवेंशन पर आयोजित कार्यशाला में शामिल डॉक्टर।
लखनऊ। एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया की अध्यक्ष डॉ. नवनीत कौर के मुताबिक शहर के मुकाबले गांवों में स्तन कैंसर होने का खतरा आधा रहता है। इसकी वजह सामाजिक (जल्द शादी होना) के साथ पर्यावरण आधारित है। इससे गांवों में जहां हर 50 से 60 महिलाओं में एक को स्तन कैंसर की समस्या है। शहर में यह आंकड़ा 28 है।
केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग मे इमेजिंग और इंटरवेंशन पर आयोजित कार्यशाला में डॉ. नवनीत कौर ने बताया कि स्तन कैंसर सीधे तौर पर विकास से भी जुड़ा है। विकसित देशों में स्तन कैंसर के मामले बहुत ज्यादा हैं। इस वजह से वहां 40 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला की स्क्रीनिंग होती है। भारत में पांच वर्ष पहले तक शहरी आबादी में हर 35 में से एक महिला में स्तन कैंसर का मामला मिलता था। अब इनकी संख्या बढ़ रही है। केजीएमयू की डॉ. गीतिका नंदा सिंह ने बताया कि टोमो सिथेंसिस जैसी नई जांच से स्तन कैंसर की पहचान इसके पनपने से पहले ही की जा सकती है। शुरुआत में स्तन कैंसर की पहचान होने पर इलाज सस्ता व प्रभावी भी है।
सात वर्ष में 15 गुना हो हुए मरीज
केजीएमयू के सिर्फ इंडोक्राइन सर्जरी विभाग में ही वर्ष 2016 में आने वाले मरीजों की संख्या 2169 थी। अब इनकी संख्या 30 हजार पार हो चुकी है। इनमें से 22,490 मरीज ब्रेस्ट कैंसर के थे। इनमें से कई को सर्जरी की जरूरत पड़ी। अन्य विभाग में भी स्तन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
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स्तन कैंसर के लक्षण
स्तन में गांठ पड़ना या त्वचा के गाढ़ा क्षेत्र का आसपास के ऊतकों से अलग महसूस होना, निपल का चपटा दिखना या अंदर की ओर मुड़ जाना, स्तन की त्वचा के रंग में परिवर्तन होना, स्तन के आकार, आकार या स्वरूप में परिवर्तन, स्तन की त्वचा का छिलना, पपड़ीदार होना या पपड़ी बनना।
ये हैं प्रमुख कारण
आनुवंशिक कारण, एक स्तन में कैंसर होने पर दूसरे में होने की आशंका, कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना, अधिक उम्र में रजोनिवृत्ति, अधिक उम्र में पहला बच्चा होना, मोटापा, खराब जीवन शैली, प्रदूषण।
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केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग मे इमेजिंग और इंटरवेंशन पर आयोजित कार्यशाला में डॉ. नवनीत कौर ने बताया कि स्तन कैंसर सीधे तौर पर विकास से भी जुड़ा है। विकसित देशों में स्तन कैंसर के मामले बहुत ज्यादा हैं। इस वजह से वहां 40 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला की स्क्रीनिंग होती है। भारत में पांच वर्ष पहले तक शहरी आबादी में हर 35 में से एक महिला में स्तन कैंसर का मामला मिलता था। अब इनकी संख्या बढ़ रही है। केजीएमयू की डॉ. गीतिका नंदा सिंह ने बताया कि टोमो सिथेंसिस जैसी नई जांच से स्तन कैंसर की पहचान इसके पनपने से पहले ही की जा सकती है। शुरुआत में स्तन कैंसर की पहचान होने पर इलाज सस्ता व प्रभावी भी है।
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सात वर्ष में 15 गुना हो हुए मरीज
केजीएमयू के सिर्फ इंडोक्राइन सर्जरी विभाग में ही वर्ष 2016 में आने वाले मरीजों की संख्या 2169 थी। अब इनकी संख्या 30 हजार पार हो चुकी है। इनमें से 22,490 मरीज ब्रेस्ट कैंसर के थे। इनमें से कई को सर्जरी की जरूरत पड़ी। अन्य विभाग में भी स्तन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।
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स्तन कैंसर के लक्षण
स्तन में गांठ पड़ना या त्वचा के गाढ़ा क्षेत्र का आसपास के ऊतकों से अलग महसूस होना, निपल का चपटा दिखना या अंदर की ओर मुड़ जाना, स्तन की त्वचा के रंग में परिवर्तन होना, स्तन के आकार, आकार या स्वरूप में परिवर्तन, स्तन की त्वचा का छिलना, पपड़ीदार होना या पपड़ी बनना।
ये हैं प्रमुख कारण
आनुवंशिक कारण, एक स्तन में कैंसर होने पर दूसरे में होने की आशंका, कम उम्र में मासिक धर्म शुरू होना, अधिक उम्र में रजोनिवृत्ति, अधिक उम्र में पहला बच्चा होना, मोटापा, खराब जीवन शैली, प्रदूषण।

केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग मे इमेजिंग और इंटरवेंशन पर आयोजित कार्यशाला में शामिल डॉक्टर।