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Lucknow News: गुरुजी बने अभ्यर्थी, दिया योग्यता का इम्तिहान
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राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से दूसरे दिन शुक्रवार को भी राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई। परीक्षा में प्रशिक्षु अभ्यर्थियों के साथ बड़ी संख्या में परिषदीय विद्यालयों के कार्यरत शिक्षक भी शामिल हुए। 45 से 55 वर्ष की उम्र वाले कई शिक्षक वर्षों तक विद्यार्थियों को पढ़ाने के बाद इस बार खुद परीक्षा कक्ष में छात्र बनकर अपनी योग्यता साबित करने के लिए सवालों के जवाब देते नजर आए।
परीक्षा देकर निकले शिक्षकों ने बताया कि यूपीटीईटी के प्रश्न रोजमर्रा के शिक्षण कार्य से अलग थे। प्राथमिक और जूनियर स्तर की परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षण विधि, गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी सहित कई विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे गए। उनका कहना था कि विद्यालय में शिक्षक अपने निर्धारित विषय पढ़ाते हैं, जबकि इस परीक्षा में कई विषयों की तैयारी के साथ बैठना पड़ा। शिक्षकों ने इसे अनावश्यक बताते हुए कहा कि सरकार केवल परेशान करने के लिए यह परीक्षा करा रही है।
16 साल से पढ़ा रहे, 55 की उम्र में फिर परीक्षा
गोंडा के परिषदीय विद्यालय में पिछले 16 वर्षों से कार्यरत शिक्षक मोहम्मद आरिफ ने कहा कि 55 वर्ष की उम्र में भी परीक्षा देनी पड़ रही है। उनका कहना है कि यूपीटीईटी के प्रश्न कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों से अलग थे, जिनके लिए नियमित तैयारी जरूरी थी। हालांकि, उनका पेपर ठीक-ठाक रहा।
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बहू के साथ पहुंचे परीक्षा देने
कानपुर देहात के शिक्षक अरविंद बौद्ध ने बताया कि वह पिछले 27 वर्षों से सेवा दे रहे हैं और इस बार उनकी बहू भी यूपीटीईटी में शामिल हुई। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षण कार्य के अलावा लगातार अन्य जिम्मेदारियां देती रही है। अब सेवानिवृत्ति में सात-आठ वर्ष शेष हैं, ऐसे में दोबारा परीक्षा देना उचित नहीं लगता।
कई विषयों से पूछे गए सवाल
कानपुर देहात के शिक्षक रजनीश सक्सेना ने बताया कि परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षण विधि, हिंदी, अंग्रेजी, गणित एवं विज्ञान या सामाजिक विज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। विदेश नीति, पर्यावरण और योग से संबंधित सवाल भी शामिल थे। उनके अनुसार प्रश्न कक्षा के सामान्य शिक्षण माहौल से अलग थे।
सेवानिवृत्ति से पहले फिर योग्यता की कसौटी
गोरखपुर के शिक्षक अशोक शर्मा ने कहा कि सेवानिवृत्ति में केवल सात वर्ष बचे हैं, फिर भी उन्हें इस परीक्षा में शामिल होना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी गोरखपुर में और वह स्वयं लखनऊ में परीक्षा दे रहे हैं। तैयारी के अनुरूप उनका पेपर बेहतर रहा।
90 फीसदी से अधिक रही अभ्यर्थियों की उपस्थिति
राजधानी के 46 केंद्रों पर आयोजित यूपीटीईटी में 90 फीसदी से अधिक अभ्यर्थियों की उपस्थिति रही। जिलाधिकारी विशाख जी के अनुसार, पहली पाली में 19,734 पंजीकृत उम्मीदवारों में से 18,351 (92.99 फीसदी) शामिल हुए। दूसरी पाली में 18,717 अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे, जिसमें 94.84 फीसदी उपस्थिति दर्ज की गई।
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परीक्षा देकर निकले शिक्षकों ने बताया कि यूपीटीईटी के प्रश्न रोजमर्रा के शिक्षण कार्य से अलग थे। प्राथमिक और जूनियर स्तर की परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षण विधि, गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी सहित कई विषयों से जुड़े प्रश्न पूछे गए। उनका कहना था कि विद्यालय में शिक्षक अपने निर्धारित विषय पढ़ाते हैं, जबकि इस परीक्षा में कई विषयों की तैयारी के साथ बैठना पड़ा। शिक्षकों ने इसे अनावश्यक बताते हुए कहा कि सरकार केवल परेशान करने के लिए यह परीक्षा करा रही है।
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16 साल से पढ़ा रहे, 55 की उम्र में फिर परीक्षा
गोंडा के परिषदीय विद्यालय में पिछले 16 वर्षों से कार्यरत शिक्षक मोहम्मद आरिफ ने कहा कि 55 वर्ष की उम्र में भी परीक्षा देनी पड़ रही है। उनका कहना है कि यूपीटीईटी के प्रश्न कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों से अलग थे, जिनके लिए नियमित तैयारी जरूरी थी। हालांकि, उनका पेपर ठीक-ठाक रहा।
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बहू के साथ पहुंचे परीक्षा देने
कानपुर देहात के शिक्षक अरविंद बौद्ध ने बताया कि वह पिछले 27 वर्षों से सेवा दे रहे हैं और इस बार उनकी बहू भी यूपीटीईटी में शामिल हुई। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षण कार्य के अलावा लगातार अन्य जिम्मेदारियां देती रही है। अब सेवानिवृत्ति में सात-आठ वर्ष शेष हैं, ऐसे में दोबारा परीक्षा देना उचित नहीं लगता।
कई विषयों से पूछे गए सवाल
कानपुर देहात के शिक्षक रजनीश सक्सेना ने बताया कि परीक्षा में बाल विकास एवं शिक्षण विधि, हिंदी, अंग्रेजी, गणित एवं विज्ञान या सामाजिक विज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए। विदेश नीति, पर्यावरण और योग से संबंधित सवाल भी शामिल थे। उनके अनुसार प्रश्न कक्षा के सामान्य शिक्षण माहौल से अलग थे।
सेवानिवृत्ति से पहले फिर योग्यता की कसौटी
गोरखपुर के शिक्षक अशोक शर्मा ने कहा कि सेवानिवृत्ति में केवल सात वर्ष बचे हैं, फिर भी उन्हें इस परीक्षा में शामिल होना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी गोरखपुर में और वह स्वयं लखनऊ में परीक्षा दे रहे हैं। तैयारी के अनुरूप उनका पेपर बेहतर रहा।
90 फीसदी से अधिक रही अभ्यर्थियों की उपस्थिति
राजधानी के 46 केंद्रों पर आयोजित यूपीटीईटी में 90 फीसदी से अधिक अभ्यर्थियों की उपस्थिति रही। जिलाधिकारी विशाख जी के अनुसार, पहली पाली में 19,734 पंजीकृत उम्मीदवारों में से 18,351 (92.99 फीसदी) शामिल हुए। दूसरी पाली में 18,717 अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे, जिसमें 94.84 फीसदी उपस्थिति दर्ज की गई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।

राजधानी के 46 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) आयोजित हुई।