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चारबाग से पीलीभीत तक रखे विसरा के 48 नमूनों को भूल गई जीआरपी, आठ स्टेशनों पर कई माह से रखे हैं सैंपल

Tue, 03 Dec 2019 05:38 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 03 Dec 2019 05:38 PM IST
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GRP forgot 48 samples of visara kept between Charbagh to Pilibhit.
- फोटो : अमर उजाला

विसरा की जांच कराने के मामले में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) भी कम लापरवाह नहीं है। लखनऊ जीआरपी के अंतर्गत आने वाले स्टेशन पर महीनों से रखे विसरा के नमूनों को रेलवे पुलिस भूल गई। 

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जीआरपी सूत्रों का कहना है कि 13 जनपद के आठ स्टेशन में विसरा के 48 नमूने कई माह से रखे हुए हैं लेकिन इन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक लैब नहीं भेजा जा रहा है। हालांकि, जीआरपी के क्षेत्राधिकारी द्वितीय कृष्णकांत शुक्ला ने बताया कि जो नमूने रखे हैं, वह ज्यादा दिन पुराने नहीं हैं। 
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जल्द औपचारिकताएं पूरी कर सभी नमूने लैब भेजे जाएंगे। जीआरपी के लखनऊ अनुभाग में चारबाग के अलावा, उन्नाव, सीतापुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, हरदोई, बाराबंकी, फैजाबाद (अयोध्या), कानपुर देहात का अकबरपुर, लखीमपुर, शाहजहांपुर और पीलीभीत शामिल हैं। 
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इतने विस्तृत कार्य क्षेत्र में रोज ही कोई न कोई हादसा, खुदकुशी या अन्य कारणों से मौत के मामले सामने आते हैं। जीआरपी के सूत्र बताते हैं कि बीते एक साल के दौरान संदिग्ध हालात में हुई मौतों व खुदकुशी के लगभग 600 मामलों में विसरा सुरक्षित रखा गया था। 

स्टेशन के स्टाफ बरत रहे लापरवाही

अधिकतर नमूनों को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भिजवाया जा चुका है और ज्यादातर की रिपोर्ट भी आ चुकी है। अनुभाग के अधीन 13 में से आठ स्टेशन के 48 केस अब भी लंबित हैं। यह विसरा तीन से छह माह पुराने बताए जा रहे हैं। इन नमूनों को अब तक फॉरेंसिक लैब क्यों नहीं भेजा गया? 

इसका जवाब किसी के पास नहीं है। एक अधिकारी ने बताया कि कुछ लापरवाही स्टेशन के स्टाफ के स्तर पर है तो स्टेशन और अनुभाग प्रभारियों के बीच तालमेल की कमी से भी विसरा पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं।

फॉरेंसिक लैब में अटके हैं 150 से अधिक नमूने
जीआरपी के अधिकारियों ने बताया कि फॉरेंसिक लैब में विसरा की जांच तो दूर, कोई अधिकारी नमूने लेने को ही तैयार नहीं होता। अधिकारियों अथवा कोर्ट के हस्तक्षेप से अगर नमूने ले भी लिए गए तो उनकी जांच महीनों तक नहीं होती।

वर्तमान में लखनऊ जीआरपी के अंतर्गत आने वाले 13 स्टेशन के 150 से अधिक नमूने लैब में पडे़ हैं लेकिन जांच नहीं हो रही। जिनकी जांच हो भी गई है, उनकी रिपोर्ट अनुभाग अधिकारियों को नहीं मिल सकी है जिससे मुकदमों की सुनवाई और विवेचना प्रभावित हो रही है।

90 प्रतिशत मामले ट्रेन से कटकर खुदकुशी व हादसों के

राजकीय रेलवे पुलिस लखनऊ के अधीन स्टेशन में मौतों के जो भी मामले हैं, उसमें 90 प्रतिशत ट्रेन से कटकर खुदकुशी अथवा हादसों के हैं। शेष 10 प्रतिशत केस जहरखुरानी, हत्या अथवा संदिग्ध हालात में हुई मौतों के हैं।

जीआरपी के अधिकारी बताते हैं कि ट्रेन में जहरखुरानी की घटनाएं बहुत होती हैं लेकिन इसके शिकार ज्यादातर लोगों का जीवन बचा लिया जाता है। यही वजह है कि जहरखुरानी से मौतों का आंकड़ा काफी कम है।

यहां पर लंबित हैं विसरा
चारबाग - 19
अकबरपुर - 06
सुल्तानपुर - 05
शाहजहांपुर - 05
रायबरेली - 04
बाराबंकी - 03
प्रतापगढ़ - 02
लखीमपुर - 02
हरदोई - 02

इन स्टेशन पर नो पेंडेंसी
फैजाबाद, उन्नाव, सीतापुर और पीलीभीत

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