सरकार किसानों को नहीं दे पाई एक तिहाई मुआवजा भी
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मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल की मार झेल रहे किसानों को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भी राहत नहीं दे पा रही हैं। दोनों सरकारें मिलकर भी किसान को उसकी फसल की लागत का तिहाई मुआवजा भी नहीं दे पा रही हैं।
कृषि विभाग के मुताबिक, गेहूं की खेती करने पर एक एकड़ जमीन में औसतन 23 हजार रुपये की लागत आती है। केंद्र और राज्य, दोनों से मिलने वाली सहायता राशि जोड़ दें तो भी यह प्रति एकड़ 7284 रुपये ही बैठ रहा है।
यानी, कुल नुकसान के एक-तिहाई हिस्से की भी भरपाई नहीं की जा रही है। यह तो सरकारी आंकड़ा है। विशेषज्ञों की मानें तो किसानों को खेती पर सरकारी आंकड़े से कहीं ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है।
कुछ ऐसा ही हाल लाही और सरसों की फसल का भी है। बुंदेलखंड को छोड़ दें तो सूबे के ज्यादातर हिस्सों में इस फसल में कुल लागत करीब 21082 रुपये प्रति एकड़ है।
चना, मटर, मसूर और अरहर को हुए नुकसान को देखें तो सरकार अपने निर्धारित लागत मूल्य का थोड़ा हिस्सा ही मुआवजे के बतौर किसानों को दे रही है।
लागत अलग-अलग पर मुआवजे की दर एक जैसी
भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत और अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि एक तो सरकार ने प्रति एकड़ लागत मूल्य काफी कम माना है। हकीकत में लागत इससे कहीं ज्यादा आती है।
फिर भी उस लागत मूल्य के हिसाब से भी मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। फसलों का बीमा कराने वाले किसानों के लिए भी बीमा कंपनियां इसी लागत मूल्य के हिसाब से भुगतान करती हैं। इससे किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ रही हैं।
सरकारी आंकड़े के अनुसार अलग-अलग जिलों में फसलों की लागत भी अलग-अलग है। लेकिन सरकार सभी को एक समान दर से ही मुआवजा दे रही है।
कृषि विभाग के मुताबिक, गेहूं में सबसे ज्यादा लागत हापुड़ में और सबसे कम महोबा में। चना में सबसे कम लागत चित्रकूट में और सबसे ज्यादा कानपुर देहात में आंकी गई है।
वहीं, लाही/सरसों में सबसे ज्यादा लागत मथुरा में और सबसे कम ललितपुर में आती है। ऐसे में सभी को एक दर से मुआवजा किसानों के साथ धोखा करने जैसा है।
नुकसान के सर्वे में जाति नहीं देखें: नितिन गडकरी
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अफसरों को निर्देश दिया कि वे मौके पर पहुंचकर किसानों को राहत राशि वितरित करें। साथ ही वैकल्पिक फसल की कार्ययोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करने को भी कहा है।
फसलों के नुकसान का जायजा लेने आगरा पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राज्य सरकार सर्वे में किसानों की जाति न देखे। केंद्र किसानों को मुआवजे की राशि सीधे उनके खाते में भेजेगा।
यूपी कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के अध्यक्ष और वरिष्ठ सपा नेता हनुमान प्रसाद ने माना कि फसलें बर्बाद हो जाने से किसान खून के आंसू रो रहे हैं और लेखपाल घर में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। अफसर भी सच्चाई छिपाते हैं। मीडिया इस हकीकत को उजागर करे।