सरकार किसानों को नहीं दे पाई एक तिहाई मुआवजा भी

अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लख्ानऊ Updated Wed, 08 Apr 2015 09:21 AM IST
govt. will not give one third remebercement to farmers
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मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल की मार झेल रहे किसानों को केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भी राहत नहीं दे पा रही हैं। दोनों सरकारें मिलकर भी किसान को उसकी फसल की लागत का तिहाई मुआवजा भी नहीं दे पा रही हैं।
कृषि विभाग के मुताबिक, गेहूं की खेती करने पर एक एकड़ जमीन में औसतन 23 हजार रुपये की लागत आती है। केंद्र और राज्य, दोनों से मिलने वाली सहायता राशि जोड़ दें तो भी यह प्रति एकड़ 7284 रुपये ही बैठ रहा है।

यानी, कुल नुकसान के एक-तिहाई हिस्से की भी भरपाई नहीं की जा रही है। यह तो सरकारी आंकड़ा है। विशेषज्ञों की मानें तो किसानों को खेती पर सरकारी आंकड़े से कहीं ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है।

कुछ ऐसा ही हाल लाही और सरसों की फसल का भी है। बुंदेलखंड को छोड़ दें तो सूबे के ज्यादातर हिस्सों में इस फसल में कुल लागत करीब 21082 रुपये प्रति एकड़ है।

चना, मटर, मसूर और अरहर को हुए नुकसान को देखें तो सरकार अपने निर्धारित लागत मूल्य का थोड़ा हिस्सा ही मुआवजे के बतौर किसानों को दे रही है।
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लागत अलग-अलग पर मुआवजे की दर एक जैसी

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