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सरकारी वकील ही करा रहे सरकार की फजीहत

Sun, 06 Oct 2013 01:21 AM IST
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
महेंद्र तिवारी/लखनऊ Updated Sun, 06 Oct 2013 01:21 AM IST
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govt lawyers responsible for embarrassment

सरकार से मोटी फीस और सुविधाएं लेने वाले सरकारी वकील भी शासन को मुकदमे से जुड़ी सूचनाएं तक ठीक से नहीं देते।

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नतीजा ये होता है कि सरकार कई बार कोर्ट में सही तरीके से जवाब दाखिल नहीं कर पाती है और उसे न्यायालय के कोप का शिकार होना पड़ता है।

शासन ने इस तरह की मुश्किलों का हवाला देते हुए संबंधित अधिवक्ताओं को नए सिरे से दिशानिर्देश जारी किया है।

न्याय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्चतम न्यायालय, हाईकोर्ट व राज्य लोक सेवा अधिकरण में दाखिल की जाने वाली तमाम तरह की याचिकाओं में मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव वित्त को प्रतिवादी बना दिया जाता है।

जबकि पहली नजर में ही यह पता चल जाता है कि उससे इन अधिकारियों से सीधे कोई संबंध नहीं होता है।

मगर विभिन्न याचिकाओं में मुख्य स्थायी अधिवक्ता उच्च न्यायालय, एडवोकेट आन रिकार्ड व स्थायी अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट और राज्य लोक सेवा अधिकरणों के प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों की ओर से शासन को जो नोटिस भेजी जाती है अथवा न्यायालय द्वारा जो निर्देश दिए जाते हैं, उसमें केवल रिट याचिका संख्या डालकर भेज दिया जाता है।
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इस तरह की नोटिस से यह तक नहीं पता लग पाता कि प्रकरण किस विभाग से जुड़ा है और मामला क्या है?

अधिकारी ने बताया कि इस वजह से न्यायालय के निर्देशों का समय से पालन मुश्किल हो जाता है। कई बार न्यायालय यह मान लेते हैं कि शासन उनके आदेशों को गंभीरता से नहीं लेता।
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कभी-कभी ऐसे मामलों में शासन का पक्ष समय से प्रस्तुत न होने की वजह से न्यायालय द्वारा शासन के नियमों, नियमावलियों व निर्णयों के विपरीत निर्देश जारी हो जाते हैं।

इससे न सिर्फ शासन को बल्कि प्रकरण से जुड़े दूसरे पक्ष को भी असुविधा होती है। वजह, सही तथ्य संज्ञान में आने पर फिर अपील और मुकदमेबाजी का दौर शुरू होने का संकट रहता है जो किसी भी दशा में उचित नहीं होता। ऐसे में नोटिस के समय ही सही तथ्य दिए जाने चाहिए।

ऐसे में विशेष सचिव न्याय अजय कृष्ण विश्वेश की ओर से सुप्रीमकोर्ट के समस्त एडवोकेट आन रिकार्ड, हाईकोर्ट के मुख्य स्थायी अधिवक्ता व राज्य लोक सेवा अधिकरणों के वरिष्ठ प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों को नए सिरे से दिशानिर्देश जारी किया गया है।


अधिवक्ताओं से विशेष अनुमति याचिका, रिट याचिका, निर्देश याचिका व न्यायालय के निर्देश के संबंध में जानकारी देते समय निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने को कहा गया है।

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