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7 नवंबर तक कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकार देगी 80 फीसदी अनुदान

Sat, 27 Oct 2018 08:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 27 Oct 2018 08:29 PM IST
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government will pay eighty percent of farmer product cost
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही

प्रदेश में 7 नवंबर तक कृषि यंत्रों की खरीद पर किसानों को 80 फीसदी अनुदान मिलेगा। यह घोषणा कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने की। वे शनिवार को कृषि कुंभ में हुई कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों को इसका लाभ फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत दिया जाएगा। 

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कृषि विकास के लिहाज से कम वृद्धि दर वाले सात जिलों के लिए विशेष योजना भी चलाई जाएगी।
फसल अवशेष प्रबंधन पर विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए शाही ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित आठ में से कोई तीन कृषि यंत्र खरीदने पर किसानों को 80 फीसदी तक छूट मिलेगी।
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योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को 29 अक्तूबर से 7 नवंबर तक यंत्र खरीदने होंगे। इस अवधि तक हर हाल में पोर्टल पर खरीद की रसीद अपलोड करनी होगी। ये आठ यंत्र हैं- रोटावेटर, जीरो सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, हैपी सीडर, मल्चर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर, श्रव मास्टर, रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ।
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इनमें से कोई तीन यंत्रों की कीमत करीब ढाई लाख रुपये होगी। इनके अलावा अन्य यंत्रों पर  7 नवंबर तक किसानों को आउट ऑफ टर्न निर्धारित अनुदान दिया जाएगा। इसमें किसी तरह की वरीयता सूची नहीं होगी। इस अवधि तक संबंधित खरीद दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने वाले किसानों को ही योजना का लाभ मिलेगा।

अगर कोई एक यंत्र खरीदता है तो उसे 50 प्रतिशत ही छूट मिलेगी। इसके अलावा ट्रैक्टर की खरीद पर 40 फीसदी का अनुदान मिलेगा। शाही ने कहा कि कृषि विकास दर के लिहाज से पिछड़े सात जिलों चंदौली, सोनभद्र, श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, फतेहपुर और चित्रकूट के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएंगी।

इन जिलों के किसानों को अनुदान योजनाओं का अधिक लाभ मिल सकेगा। कार्यशाला किसानों को कचरा से कंचन बनाने का सुझाव देते हुए फसल अवशेष न जलाने की अपील की गई। इसमें 9 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। कार्यशाला के बाद फसल अवशेषों से संबंधित विभिन्न कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। 

तेजी से बदल रहा कृषि क्षेत्र : कृष्णा राज

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कृष्णा राज ने कहा कि 5 वर्ष पूर्व तक कृषि की छवि खेत में हल जोतता किसान के रूप में होती रही थी। लेकिन अब यह क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। खेती-किसानी अब उद्यमिता का रूप लेती जा रही है। यह क्षेत्र तेजी से प्रगति कर रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों में भी अब मिलवां खेती को किसान तेजी  से अपना रहे हैं।  मिलवां खेती हमारी बहुत पुरानी परंपरा रही है, लेकिन लोग इसे भूलते जा रहे थे।
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