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सहायक शिक्षक भर्ती : हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ खंडपीठ में जाने की तैयारी में सरकार

Fri, 02 Nov 2018 12:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 02 Nov 2018 12:46 AM IST
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government will challenge the high court decision for cbi inquiry in double bench
राज्य चिह्न - फोटो : amar ujala

68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा की सीबीआई जांच और 12460 सहायक अध्यापकों की भर्ती निरस्त करने से रोजगार की रफ्तार बढ़ाने में जुटी योगी सरकार को धक्का लगा है। योगी सरकार और सत्तारूढ़ दल भाजपा के मिशन 2019 के मद्देनजर सरकार की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी भर्ती के भविष्य पर लटकी तलवार ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। 

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हालांकि सरकार ने सीबीआई जांच और भर्ती निरस्त करने के एकल पीठ के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने की तैयारी की है। बेसिक शिक्षा महकमे के तत्कालीन और मौजूदा अफसरों की बेअंदाज कार्यशैली से 68500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा शुरुआत से लेकर परिणाम जारी करने तक कठघरे में रही।
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19 महीने की योगी सरकार में पहली बार किसी मामले में उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है और भर्ती को निरस्त किया है। महकमे के आला अधिकारी समय रहते कार्यशैली में सुधार कर अभ्यर्थियों की सुनवाई करते तो बात बिगड़ने से बच सकती थी।
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सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में पहले सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी की कटऑफ निर्धारित करने और उसके बाद कटऑफ कम करने को लेकर अभ्यर्थियों ने न्यायालय में गुहार लगाई। उच्च न्यायालय के आदेश से भर्ती के विज्ञापन के समय निर्धारित कटऑफ के आधार पर परिणाम घोषित हुआ।

स्क्रूटनी पर भी उठे सवाल

बेसिक शिक्षा विभाग ने अनियमितताओं की शिकायत के बाद सभी 1 लाख 7 हजार 873 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी कराई। इसमें 51 ऐसे अभ्यर्थी सामने आए, जिन्हें परिणाम में फेल बताया गया था जबकि वे मेरिट में आ रहे थे। 53 अभ्यर्थी ऐसे थे जिन्हें परिणाम में सफल बताया गया, जबकि वे स्क्रूटनी में फेल हुए। 1 लाख 7 हजार 873 उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी में केवल 343 में गड़बड़ी की रिपोर्ट पेश होने से अभ्यर्थियों ने स्क्रूटनी पर भी सवाल खड़े किए थे।

जांच कमेटी से भी संतुष्ट नहीं थे अभ्यर्थी

गन्ना विकास आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी की जांच कमेटी ने 285 शिकायतकर्ताओं में से केवल 158 अभ्यर्थियों की शिकायत पर पुनर्मूल्यांकन कराने की सिफारिश से भी अभ्यर्थी खफा थे।

पहले ही पुनर्मूल्यांकन कराते तो नहीं बिगड़ती बात
शिक्षक भर्ती की जांच कमेटी के अध्यक्ष संजय आर भूसरेड्डी ने शुरुआती जांच में ही सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन कराने की मौखिक सिफारिश की थी। इसके विपरीत विभाग ने केवल स्क्रूटनी करानी शुरू की। आखिरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी अभ्यर्थियों को निशुल्क पुनर्मूल्यांकन का अवसर दिया। महकमे के अफसरों का मानना है कि यदि पहले ही पुनर्मूल्यांकन करा दिया जाता तो बात नहीं बिगड़ती।

एकल पीठ के फैसले के खिलाफ खंडपीठ में जाने पर विचार

सरकार एकल पीठ के फैसले के खिलाफ खंडपीठ में जाने पर विचार कर रही है। बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच का निर्णय आते ही बेसिक शिक्षा विभाग से लेकर सरकार में खलबली मच गई। विभाग और सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारियों के बीच हुई वार्ता में खंडपीठ में अपील करने का विचार किया गया। अफसरों को भरोसा है कि सरकार द्वारा कराई गई जांच से खंडपीठ संतुष्ट हो जाएगी।  

सरकार को इसलिए है भरोसा 

सरकार ने मामला सामने आते ही तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया।
जवाबदेह माने गए अधिकारियों में परीक्षा नियामक प्राधिकारी की तत्कालीन सचिव सुत्ता सिंह, रजिस्ट्रार जितेंद्र सिंह नेगी और डिप्टी रजिस्ट्रार प्रेमचंद कुशवाह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका की स्क्रूटनी कराई।
स्क्रूटनी में उत्तीर्ण पाए अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्णय किया।
जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सभी अभ्यर्थियों को पुनर्मूल्यांकन का अवसर दिया गया।
पुनर्मूल्यांकन करने वाली फर्म को ब्लैक लिस्ट किया। परीक्षकों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

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