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महिलाओं को स्टांप शुल्क में मिल रही छूट खत्म करने पर विचार कर रही सरकार
Mon, 23 Sep 2019 01:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, महेंद्र तिवारी
अमर उजाला ब्यूरो, महेंद्र तिवारी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 23 Sep 2019 01:00 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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प्रदेश सरकार अपना खजाना बढ़ाने के लिए कई नए कदम उठाने पर विचार कर रही है। इसमें रजिस्ट्री पर महिलाओं को स्टांप शुल्क में दी जा रही 10 प्रतिशत की छूट समाप्त करने व प्राइवेट वाहनों से लाई जा रही सवारियों पर न्यूनतम शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
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सूत्रों ने बताया हाल में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने तय राजस्व लक्ष्य प्राप्त करने व अतिरिक्त राजस्व जुटाने के स्रोत पर चर्चा के लिए शासन के वरिष्ठ अफसरों के साथ लंबा विचार विमर्श किया। इसमें कई महत्वपूर्ण सुझाव आए।
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यहां पता चला कि पिछले वर्ष की तुलना में चार लाख रजिस्ट्री कम हुई है। इसके अलावा निवेशकों को स्टांप शुल्क में दी जाने वाली छूट से राजस्व आय पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
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तय हुआ कि दूसरे विभागों की नीतियों के अंतर्गत स्टांप शुल्क में छूट से जुड़े सभी मामलों का नए सिरे से परीक्षण किया जाए और अन्य राज्यों में स्टांप शुल्क की दरों का अध्ययन कर रिपोर्ट दी जाए। इसके अलावा महिलाओं के नाम सम्पत्ति कि रजिस्ट्री करने पर स्टांप शुल्क में 10 प्रतिशत की दी जा रही छूट को समाप्त करने पर विचार करने को कहा गया।
परिवहन विभाग ने आय बढ़ाने के लिए 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों की फिर से रजिस्ट्री कराने और प्राइवेट वाहनों से लाई जा रही सवारियों पर न्यूनतम शुल्क तय करने का सुझाव दिया है। अब इन प्रस्तावों पर विभाग विस्तृत विचार-विमर्श कर आगे की कार्यवाही करेंगे।
एमपी से आने वाले बालू पर सेस, पत्थर की नीलामी कर बढ़ाएंगे आय
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की घटती आई भी सरकार की चिंता का विषय है। पड़ताल में पता चला कि पिछले वर्ष बालू की नीलामी तय सीमा से अधिक हुई थी इसलिए इस वर्ष इस मद में आय होने की संभावना नहीं है। इसी तरह सोनभद्र में 300 हेक्टेयर के स्थान पर मात्र 26 हेक्टेयर में खनन की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
इसके अलावा मिट्टी पर रॉयल्टी समाप्त कर दी गई है और मध्य प्रदेश से आ रहे बालू से भी आय पर प्रभाव पड़ रहा है। तय हुआ कि मध्य प्रदेश से आ रहे बालू पर सेस लगाया जाए। विभाग की ओर से बताया गया कि इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, इसे जल्दी ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके अलावा आय बढ़ाने के लिए पत्थर के खनन को भी नीलामी प्रक्रिया में लाने का फैसला हुआ।
ओटीएस लाकर आय बढ़ाने की तरकीब
वैट के लंबित मामलों को निपटाने के लिए वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम लाने का प्रस्ताव है। पता चला है कि वैट के तमाम मामले लंबे समय से न्यायालय में लंबित हैं। विभाग ने प्रस्ताव किया है कि वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम लागू कर कमाई बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।
देशी के कम उत्पादन और हरियाणा से तस्करी ने बढ़ाई चिंता
प्रदेश में शराब बिक्री से होने वाली कमाई सरकार की आय का बड़ा साधन है। वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार ने 31,600 करोड़ का लक्ष्य तय किया है लेकिन प्राप्ति अभी 11,470 करोड़ ही हुई है। यह वार्षिक लक्ष्य का 38.2 प्रतिशत है। लक्ष्य के अनुपात में धीमी प्रगति की पड़ताल में पता चला कि प्रदेश में देशी शराब की जितनी मांग हैए आबकारी विभाग उस मात्रा में आपूर्ति भी नहीं कर पा रहा है।
मांग के सापेक्ष आपूर्ति करीब 10 प्रतिशत कम हो रही है। इसी तरह कई अन्य राज्यों खासकर हरियाणा से शराब की तस्करी के कारण राजस्व आय प्रभावित हुई है। आबकारी विभाग को देशी शराब का उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने और शराब तस्करी रोकने के प्रयास को कहा गया है।
विभाग लक्ष्य प्राप्त आय (करोड़ रुपये में)
वाणिज्य कर 77,640 29,689
आबकारी विभाग 31,600 11,478
स्टांप एवं निबंधन 19,179 6,835
परिवहन 7,863 2,890
ऊर्जा 3,120 836
भूतत्व एवं खनिकर्म 4,400 827
मंडी परिषद 2,172 768
नोट- आंकड़े अगस्त 2019 तक हैं।
इसके अलावा मिट्टी पर रॉयल्टी समाप्त कर दी गई है और मध्य प्रदेश से आ रहे बालू से भी आय पर प्रभाव पड़ रहा है। तय हुआ कि मध्य प्रदेश से आ रहे बालू पर सेस लगाया जाए। विभाग की ओर से बताया गया कि इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, इसे जल्दी ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके अलावा आय बढ़ाने के लिए पत्थर के खनन को भी नीलामी प्रक्रिया में लाने का फैसला हुआ।
ओटीएस लाकर आय बढ़ाने की तरकीब
वैट के लंबित मामलों को निपटाने के लिए वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम लाने का प्रस्ताव है। पता चला है कि वैट के तमाम मामले लंबे समय से न्यायालय में लंबित हैं। विभाग ने प्रस्ताव किया है कि वन टाइम सेटेलमेंट स्कीम लागू कर कमाई बढ़ाने का प्रस्ताव किया है।
देशी के कम उत्पादन और हरियाणा से तस्करी ने बढ़ाई चिंता
प्रदेश में शराब बिक्री से होने वाली कमाई सरकार की आय का बड़ा साधन है। वित्त वर्ष 2019-20 में सरकार ने 31,600 करोड़ का लक्ष्य तय किया है लेकिन प्राप्ति अभी 11,470 करोड़ ही हुई है। यह वार्षिक लक्ष्य का 38.2 प्रतिशत है। लक्ष्य के अनुपात में धीमी प्रगति की पड़ताल में पता चला कि प्रदेश में देशी शराब की जितनी मांग हैए आबकारी विभाग उस मात्रा में आपूर्ति भी नहीं कर पा रहा है।
मांग के सापेक्ष आपूर्ति करीब 10 प्रतिशत कम हो रही है। इसी तरह कई अन्य राज्यों खासकर हरियाणा से शराब की तस्करी के कारण राजस्व आय प्रभावित हुई है। आबकारी विभाग को देशी शराब का उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने और शराब तस्करी रोकने के प्रयास को कहा गया है।
विभाग लक्ष्य प्राप्त आय (करोड़ रुपये में)
वाणिज्य कर 77,640 29,689
आबकारी विभाग 31,600 11,478
स्टांप एवं निबंधन 19,179 6,835
परिवहन 7,863 2,890
ऊर्जा 3,120 836
भूतत्व एवं खनिकर्म 4,400 827
मंडी परिषद 2,172 768
नोट- आंकड़े अगस्त 2019 तक हैं।