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लखनऊ: पुराने मकान या दुकान खरीदने पर गृहकर नामांतरण में लगने वाले शुल्क का घटेगा बोझ

Tue, 21 Feb 2023 01:53 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 21 Feb 2023 01:53 AM IST
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Government going to decrease house tax mutation charge
प्रवेंद्र गुप्ता, लखनऊ। पुराना मकान, फ्लैट या दुकान खरीदने पर अपने नाम गृहकर कराने पर नगर निगम में संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क (म्यूटेशन) लगता है। दूसरी ओर नया मकान, फ्लैट या दुकान लेने पर गृहकर निर्धारण कराने में कोई फीस नहीं देनी होती है। इससे नामांतरण शुल्क को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सदन में शुल्क कम करने का मामला उठा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बीते साल मुख्यमंत्री द्वारा पारिवारिक संपत्तियों के बैनामे की फीस कम कर पांच हजार रुपये किए जाने के बाद एलडीए व आवास विकास परिषद में नामांतरण शुल्क घटाया गया, लेकिन नगर निगम ने कम नहीं किया। अब शासन स्तर पर इसको लेकर पहल हुई है। नामांतरण शुल्क कम करने को लेकर नियमावली बनाई जा रही है, जो अप्रैल से लागू भी हो सकती है। हालांकि, इसको लेकर अधिकारी अभी चुप्पी साधे हैं।
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वरिष्ठ निर्वतमान भाजपा पार्षद व कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रजनीश गुप्ता का कहना है कि संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क बहुत अधिक है। इसे कम किया जाए। आठ साल पहले ऐसा नहीं था। एलडीए व आवास विकास परिषद ने नामांतरण शुल्क अब कम कर दिया है। सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू, निवर्तमान पार्षद मोहम्मद सलीम यावर हुसैन रेशू, राजकुमार सिंह राजा और कांग्रेस पार्षद दल नेता ममता चौधरी, गिरीश मिश्र व पूर्ष पार्षद रुद्र प्रताप सिंह का कहना है कि नामांतरण में कोई शुल्क लेना जरूरी है तो कम से कम लिया जाए। जब नए मकान वाले से कोई अतिरिक्त शुल्क गृहकर निर्धारण कराने पर नहीं लिया जाता है तो फिर पुराना मकान खरीदने वाले पर नामांतरण के नाम पर एक प्रतिशत शुल्क क्यों लिया जाता है। इसे समाप्त किया जाए।
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... तो कई गुना देना पड़ता है शुल्क
कोई मकान या दुकान चाहे जितनी बार बेची या खरीदी जाए, उसके गृहकर पर काेई फर्क नहीं पड़ता है। नामांतरण कराने को लेकर नगर निगम जो एक प्रतिशत शुल्क लेता है, उसमें वह सिर्फ इतना करता है कि पुराने भवनस्वामी का नाम हटाकर नए का नाम चढ़ा देता है। कोई भवनस्वामी यदि किसी संपत्ति को खरीदने के बाद उसका नामांतरण नगर निगम में नहीं कराता है और पुराने भवनस्वामी के नाम पर ही टैक्स जमा करता रहता है तो उसे कोई समस्या नहीं होती है। नगर निगम का कहना है कि वह टैक्स संपत्ति पर लेता है व्यक्ति पर नहीं। ऐसे में यदि कोई संपत्ति कई बार बेची-खरीदी गई और नगर निगम में उसका नामांतरण नहीं कराया गया है तो वह पहले व्यक्ति के नाम पर ही चढ़ी रहती है। ऐसे में नामांतरण कराने पर सबसे आखिरी वाले खरीदार को उन व्यक्तियों का भी नामांतरण शुल्क भरना पड़ता हैं, जिन्होंने संपत्ति का नामांतरण अपने नाम नहीं कराया था। ---
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2014 से पांच गुना हो गया नामांतरण शुल्क
साल 2014 से पहले नगर निगम में संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क नहीं लिया जाता था। उस समय इसे लेकर स्लैब बना था। इसमें पारिवारिक विरासत की संपत्ति का नामांतरण कराने पर महज एक हजार रुपये शुल्क लगता था, जिसे 2014 में बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया गया। इसी तरह बैनामा से खरीदी गई संपत्तियों में पांच लाख की कीमत वाली का नामांतरण शुल्क दो हजार रुपये, पांच से 10 लाख रुपये वाली संपत्ति का शुल्क चार हजार रुपये और 10 लाख से अधिक की संपत्ति पर प्रति पांच लाख पर दो हजार रुपये और जुड़ जाता था।

शासन कम करने जा रहा नामांतरण शुल्कनगर विकास विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रदेश भर के निकायों में नामांतरण शुल्क की व्यवस्था अलग-अलग है। सभी निकायों में उनके बोर्ड से प्रस्ताव पास कर शुल्क तय किया गया है। ऐसे में अब शासन से एक नियमावली बनाई जा रही है, जिसमें एकरूपता रहेगी। यह नियमावली इसलिए जरूरी हो गई है, क्योंकि पारिवारिक संपत्तियों का बैनामा पांच हजार रुपये में किए जाने के मुख्यमंत्री के आदेश के बाद आवास विकास ने नामांतरण शुल्क कम कर दिया है। नगर निगमों में अभी नामांतरण शुल्क कम नहीं किया गया है। ऐसे में अब शासन खुद नियमावली बना रहा है।
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