ऐसी मेहरबानियां... तरसते रहे किसान, शुगर इंडस्ट्री को दे दीं बड़ी रियायतें
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पिछले दो पेराई सत्रों में तो राज्य सरकार ने नकद प्रोत्साहन राशि भी दी गई। केंद्र सरकार से किसानों को ब्याज मुक्त व सस्ते ऋण के पैकेज मिले। शुगर इंडस्ट्री को यूपीए सरकार ने जाते-जाते चीनी को नियंत्रण मुक्त और लेवी चीनी की व्यवस्था समाप्त कर गई थी।
इससे चीनी मिलों को सालाना लाभ मिल रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौ मार्च 2013 को चीनी मिलों की ब्याज माफी रद्द करते हुए शुगर इंडस्ट्री को दी गई रियायतों का भी जिक्र किया है।
प्रदेश के 40 जिलों में करीब 50 लाख गन्ना किसान हैं। सूबे में गन्ना 25 से 30 हजार करोड़ रुपये की नकदी फसल है। इस साल चीनी के रेट अच्छे होने से शुगर मिलों केचेहरे खिले हैं लेकिन इससे पहले तीन सीजन उनके लिए ज्यादा अच्छे नहीं रहे।
इसकी सीधा मार किसानों पर पड़ी। परचेज टैक्स, एंट्री टैक्स और समितियों के कमीशन में छूट दी गई। इसकी शर्तें शासन स्तर पर बनी उच्च समिति ने तय की। पेराई सत्र 2013-14, 2014-15 और 2015-16 में चीनी मिलों को ज्यादा रियायतें दी गईं।
यूपी की शुगर इंडस्ट्री को 25 फीसदी फायदा
इस दौरान 8.40 रुपये से 19 रुपये प्रति क्विंटल तक प्रोत्साहन राशि दी गई। कुल मिलाकर तीन साल में राज्य व केंद्र सरकारों ने अलग-अलग तरीके से चीनी मिलों को लगभग आठ हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया है।
वर्ष 2013 में चीनी को नियंत्रण मुक्त व लेवी चीनी की व्यवस्था समाप्त कर देने से प्रदेश की शुरु इंडस्ट्री को हर साल औसतन 900 करोड़ रुपये का लाभ हो रहा है। यूपीए व एनडीए सरकार ने देश की शुगर इंडस्ट्री को ब्याज उपादान योजना के तहत क्रमश: 6600 व 4400 रुपये के पैकेज दिए।
यूपी की शुगर इंडस्ट्री को लगभग 25 फीसदी फायदा मिला है। इस दौरान 8.40 रुपये से 19 रुपये प्रति क्विंटल तक प्रोत्साहन राशि दी गई। कुल मिलाकर तीन साल में राज्य व केंद्र सरकारों ने अलग-अलग तरीके से चीनी मिलों को लगभग आठ हजार करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया है।
वर्ष 2013 में चीनी को नियंत्रण मुक्त व लेवी चीनी की व्यवस्था समाप्त कर देने से प्रदेश की शुरु इंडस्ट्री को हर साल औसतन 900 करोड़ रुपये का लाभ हो रहा है।
यूपीए व एनडीए सरकार ने देश की शुगर इंडस्ट्री को ब्याज उपादान योजना के तहत क्रमश: 6600 व 4400 रुपये के पैकेज दिए। यूपी की शुगर इंडस्ट्री को लगभग 25 फीसदी फायदा मिला है।
कमीशन चीनी मिलों के हवाले
चीनी मिलों की मदद के नाम पर सहकारी गन्ना विकास समितियों के चार साल के कमीशन का बड़ा हिस्सा चीनी मिलों के हवाले कर दिया गया। वर्ष 2012-13 में कमीशन में 4.40 रुपये की कटौती की गई।
2013-14 में कमीशन पूरा कमीशन मिला लेकिन 2014-15 में केवल 2 रुपये, 2015-16 में 3 रुपये तथा 2016-17 में 4.50 रुपये कमीशन दिया गया।
सहकारी गन्ना समितियों के अध्यक्ष संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. अरविंद कुमार सिंह का कहना है कि कमीशन में एक फीसदी कटौती से गन्ना समितियों को 70 से 80 करोड़ रुपये का नुकसान और चीनी मिलों को इतना ही फायदा होता है।
राज्य सरकार ने समितियों की कीमत पर हर साल चीनी मिलों को 200 से 300 करोड़ का लाभ पहुंचाया। कमीशन घटाए जाने से समितियां बेहाल है, उनमें स्ट्राफ की भारी कमी है।
बहुत सारी समितियों में अभी भी पंचम वेतन आयोग ही लागू है। गौरतलब है कि गन्ना समितियों को केंद्र सरकार द्वारा घोषित उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) पर 3 प्रतिशत कमीशन देय होता है।
यह कमीशन चीनी मिलों को देना होता है। चालू पेराई सीजन के लिए 230 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी है। इस पर गन्ना समितियों का 6.90 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन बनता है। मगर उन्हें 4.50 रुपये कमीशन दिया जा रहा है।
देखें, किस मद में कितना लाभ
1. तीन पेराई सत्रों की ब्याज माफी।
2- पिछले चार सालों से गन्ने पर परचेज टैक्स, चीनी पर एंट्री टैक्स और गन्ना समितियों के कमीशन के रूप में लगभग 11.50 रुपये प्रति क्विंटल की छूट।
3- पिछले दो पेराई सत्र में तय समय में गन्ना मूल्य भुगतान करने पर नकद इंसेटिव।
4- पिछले तीन सालों में दो किस्तों में गन्ना मूल्य भुगतान की छूट।
5- यूपीए सरकार में 6600 करोड़ और एनडीए सरकार में 4400 करोड़ ब्याज मुक्त व सस्ता ऋण। इसका 25 फीसदी हिस्सा यूपी की शुगर इंडस्ट्री को मिला।
6- 2013 में लेवी चीनी की व्यवस्था खत्म होने से सालाना 800 करोड़ का लाभ।
किस मद में कितना लाभ
मद छूट/लाभ प्रति क्विंटल कहां से
लेवी चीनी 809 करोड 10.15 रुपये केंद्र सरकार
गन्ना क्रय कर 160 करोड़ 2.00 रुपये राज्य सरकार
एंट्री टेक्स 219 करोड़ 2.73 रुपये राज्य सरकार
ब्याज उपादान योजना 190 करोड़ --- केंद्र सरकार
शीरा नियंत्रण शिथिल 167 करोड़ 2.10 रुपये राज्य सरकार
समितियों के कमीशन में कमी 200 करोड़ राज्य सरकार
प्रोत्साहन राशि (दो सत्र) 3000 करोड़ राज्य सरकार
ब्याज मुक्त ऋण 1200 करोड़ केंद्र सरकार
(नोट : गन्ना विभाग के अधिकारी के मुताबिक ये आंकड़े अनुमानित हैं। )