बेहिसाब संपत्ति बनाने वाले कर्मी सरकार के निशाने पर, शासन ने मांगा ब्योरा
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सरकारी नौकरी में आकर बेहिसाब संपत्ति बनाने वाले कर्मचारी और अफसर योगी सरकार के निशाने पर आ गए हैं। शासन ने समस्त सरकारी सेवकों से प्रत्येक पांच वर्ष पर दिए जाने वाले अचल संपत्ति का ब्योरा तलब किया है।
विशेष सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक शीतला प्रसाद ने शासन के समस्त अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को इस संबंध में पत्र लिखा है।
उन्होंने सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 का हवाला देकर बताया है कि प्रथम नियुक्ति के समय और इसके बाद हर पांच वर्ष की अवधि बीतने पर प्रत्येक कर्मी को अपने नियुक्ति अधिकारी को अचल संपत्ति की जानकारी देनी अनिवार्य है।
इसमें ऐसी संपत्ति आएगी जिसका वह स्वयं मालिक हो, जिसे उसने खुद अर्जित किया हो या जिसे उसने किसी से प्राप्त किया हो या जिसे वह पट्टे या रेहन पर रखे हो। वह ऐसे हिस्सों या अन्य लगी हुई पूंजी की घोषणा भी करेगा जिसे उसने समय-समय पर रखा हो या प्राप्त किया हो, या उसकी पत्नी या उसके साथ रहने वाले या किसी प्रकार भी उस पर आश्रित उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा रखी गई हो या प्राप्त की गई हो। इन घोषणाओं में संपत्ति, हिस्सों और अन्य लगी हुई पूंजियों के पूरे ब्योरे दिए जाने हैं।
विशेष सचिव कार्मिक ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं। इस आदेश की प्रति सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, सभी विभागाध्यक्षों व प्रमुख कार्यालयाध्यक्षों को भी भेजी गई है। सचिवालय के समस्त अनुभाग अधिकारियों को भी यह पत्र भेजकर संपत्ति का ब्योरा लेने को कहा गया है। यह सूचना आने से कुछ साल में ही रईस बने कर्मचारियों की पोल खुलनी तय मानी जा रही है।
आय से अधिक संपत्ति में सचिवालय कर्मी की गिरफ्तारी के बाद जारी हुआ आदेश
सूत्रों ने बताया कि सरकार को लगातार शिकायत मिल रही थी कि कई कर्मचारी नाजायज तरीके से बेहिसाब संपत्ति बढ़ा रहे हैं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर लाखों के मकान, फ्लैट, महंगी गाड़ियां लेकर चलते हैं। कई कर्मचारियों ने अपने 10 से 15 वर्ष के सेवाकाल में ही अपने पूरी सर्विस से होने वाली आय से अधिक संपत्ति बना ली है। लेकिन शासन के पास इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।
पिछले 15 वर्षों में ऐसे कर्मियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही न होने से ईमानदार कर्मियों में सिस्टम के प्रति आक्रोश बढ़ता है। 10 दिसंबर को सचिवालय के एक कर्मी की आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तारी के बाद शासन ने नियमानुसार सभी सरकारी कर्मियों की संपत्ति का हिसाब-किताब लेने का आदेश जारी कर दिया। शासन ने सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में दी गई व्यवस्था का हवाला देकर अचल संपत्ति का ब्योरा तलब किया है।