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ऐसे खेला खां साहब ने खेल
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 22 Jul 2014 11:40 AM IST
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रामपुर वाले खां साहब ने एक ही दांव से उन सभी को चारो खाने चित कर दिया जो उनके ड्रीम प्रोजेक्ट में अडंगा बने थे।
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जैसे ही मौका हाथ आया उन्होंने ऐसी चाल चली कि पार्टी में उनके विरोधी भी मान गए कि खां साहब मंझे हुए खिलाड़ी हैं।
खां साहब नहीं चाहते कि उनके शिक्षण संस्थान पर किसी और का नियंत्रण रहे। जैसा वह चाहें वैसा ही हो सो उन्होंने अपने शिक्षण संस्थान के लिए कानून ऐसा कानून तैयार कराया जिसे मंजूरी देने में दो राज्यपालों की कलम रुक गई। खां साहब ने ठान लिया कि इसे मंजूर कराकर ही रहेंगे।
बहुत उंगली टेढ़ी की लेकिन घी नहीं निकला। राजभवन में निजाम बदला तो खां साहब सक्रिय हो गए। ‘सरकार’ फॉरेन टूर पर थे। खां साहब ने राजभवन में हाजिरी लगाई और हो गया काम।
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अब कहने वाले कुछ भी कहते रहें उन्हें जो हासिल करना था कर लिया। पार्टी में भी उनके इस अंदाज पर चुटकी ली जा रही है कि बड़ा सटीक जुगाड़ किया। इसी को कहते हैं गरम लोहे पर हथौड़ा मारना। इसमें उन्हें महारथ भी हासिल है।
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