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लविवि: सेल्फ फाइनेंस कोर्स चलने तक के लिए तैनात होंगे शिक्षक-कर्मचारी
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लखनऊ। लविवि प्रशासन ने विश्वविद्यालय व सहयुक्त महाविद्यालयों के सेल्फ फाइनेंस कोर्स के शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। अब विवि व सहयुक्त महाविद्यालयों में सेल्फ फाइनेंस कोर्स के शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों की तैनाती कोर्स चलने तक के लिए होगी। जबकि पहले यह पांच साल के लिए ही होती थी। इससे लगभग 6000 शिक्षक प्रभावित होंगे।
विश्वविद्यालय व सहयुक्त महाविद्यालयों में काफी संख्या में सेल्फ फाइनेंस कोर्स चलते हैं। खास ये कि इन कोर्सों का शुल्क भी सामान्य कोर्सों से ज्यादा होता था लेकिन इनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों व काम करने वाले शिक्षणेतर कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलता था। वह लंबे समय से अपना पारिश्रमिक भी रिवाइज न होने से नाराज थे। शासन द्वारा पूर्व में जारी आदेश के क्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय की हाल में हुई कार्य परिषद की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव पास किया गया। रजिस्ट्रार संजय मेधावी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में चल रहे स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में संविदा पर नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों के सेवा विस्तार संबंधित प्रकरण पर गठित समिति की संस्तुति कार्य परिषद ने एप्रूव कर दी है। इस क्रम में विश्वविद्यालय व सहयुक्त महाविद्यालयों में चल रहे सभी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में संविदा पर काम कर रहे शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सेवा विस्तार का अनुमोदन किया गया है। वहीं हर दो साल पर उनके काम का रिव्यू किया जा सकेगा। उनकी सेवा संतोषजनक होने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा।
विवि में शिक्षकों का मानदेय भी बढ़ाया
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने उक्त के साथ ही विश्वविद्यालय में चल सभी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को दिए जाने वाले मानदेय को भी रिवाइज किया है। रजिस्ट्रार की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि शासनादेश के अनुपालन के क्रम में विश्वविद्यालय द्वारा गठित कमेटी की संस्तुति पर शिक्षकों का वेतनमान रिवाइज कर दिया गया है। यूजी, पीजी व डिप्लोम कोर्सों, इंजीनियरिंग संकाय व आईएमएस आदि में पढ़ा रहे 200 से ज्यादा शिक्षक इससे लाभांवित होंगे।
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विश्वविद्यालय व सहयुक्त महाविद्यालयों में काफी संख्या में सेल्फ फाइनेंस कोर्स चलते हैं। खास ये कि इन कोर्सों का शुल्क भी सामान्य कोर्सों से ज्यादा होता था लेकिन इनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों व काम करने वाले शिक्षणेतर कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलता था। वह लंबे समय से अपना पारिश्रमिक भी रिवाइज न होने से नाराज थे। शासन द्वारा पूर्व में जारी आदेश के क्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय की हाल में हुई कार्य परिषद की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव पास किया गया। रजिस्ट्रार संजय मेधावी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में चल रहे स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में संविदा पर नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों के सेवा विस्तार संबंधित प्रकरण पर गठित समिति की संस्तुति कार्य परिषद ने एप्रूव कर दी है। इस क्रम में विश्वविद्यालय व सहयुक्त महाविद्यालयों में चल रहे सभी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में संविदा पर काम कर रहे शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सेवा विस्तार का अनुमोदन किया गया है। वहीं हर दो साल पर उनके काम का रिव्यू किया जा सकेगा। उनकी सेवा संतोषजनक होने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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विवि में शिक्षकों का मानदेय भी बढ़ाया
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने उक्त के साथ ही विश्वविद्यालय में चल सभी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को दिए जाने वाले मानदेय को भी रिवाइज किया है। रजिस्ट्रार की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि शासनादेश के अनुपालन के क्रम में विश्वविद्यालय द्वारा गठित कमेटी की संस्तुति पर शिक्षकों का वेतनमान रिवाइज कर दिया गया है। यूजी, पीजी व डिप्लोम कोर्सों, इंजीनियरिंग संकाय व आईएमएस आदि में पढ़ा रहे 200 से ज्यादा शिक्षक इससे लाभांवित होंगे।
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