Fraud: फर्म सिर्फ कागजों में... लेन-देन बिलों में... जीएसटी में 6.96 करोड़ का फर्जीवाड़ा, जांच शुरू
गोंडा जिले में करीब सात करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। कोतवाली नगर में तीन फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। वहीं, पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है।
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जीएसटी सिस्टम को चकमा देकर 6.96 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ये खेल लंबे समय से चल रहा था। फर्म थीं, लेकिन सिर्फ कागजों में। लेन-देन था, लेकिन सिर्फ बिलों में। माल कहीं नहीं, गोदाम नहीं, दुकान नहीं फिर भी करोड़ों का इनपुट टैक्स क्रेडिट पास हो गया। राज्य कर विभाग की जांच में इस खेल का खुलासा हुआ है।
जांच में सामने आया कि दिल्ली की एम/एस वैभव एंटरप्राइजेज, गोंडा शहर के पांडेय तालाब की अनिंदिता एंटरप्राइजेज और रानी बाजार की श्री ट्रेडिंग कंपनी नाम की फर्मों ने बिना किसी वास्तविक व्यापार के फर्जी बिलिंग के जरिए सरकार को छह करोड़ 96 लाख रुपये का चूना लगाया। विभाग की तहरीर पर नगर कोतवाली में तीनों फर्म के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। सहायक आयुक्त राज्य कर खंड दो बाबर अली ने बताया कि फर्मों की जांच की प्रक्रिया चल रही है। जहां-जहां कमी मिल रही है, उस पर कार्रवाई की जा रही है।
जहां फर्म होनी चाहिए थी, वहां ताला और सन्नाटा
राज्य कर विभाग की टीम जब इन फर्मों के घोषित पतों पर पहुंची तो वहां न दुकान मिली, न गोदाम और न कोई कर्मचारी। स्थानीय लोगों ने भी ऐसी किसी फर्म के अस्तित्व से साफ इनकार कर दिया। कई मामलों में दिए गए मोबाइल नंबर बंद मिले, तो कहीं फर्म मालिक का कोई अता-पता नहीं चला। जांच रिपोर्ट के अनुसार, फर्मों ने केवल कागजी खरीद-बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया और उसे अन्य फर्मों को पास-ऑन कर दिया।
ऐसे हुआ खेल
- दिल्ली की एम/एस वैभव एंटरप्राइजेज की जांच में खुलासा हुआ कि बिना वास्तविक माल की खरीद-फरोख्त किए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत लाभ उठाकर सरकारी राजस्व को 56.10 लाख रुपये की क्षति पहुंचाई गई। राज्य कर अधिकारियों के अनुसार, फर्म का जीएसटी पंजीकरण 30 सितंबर 2024 को कराया गया था, लेकिन जांच के दौरान घोषित व्यापार स्थल पर कोई कारोबार नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने भी इस फर्म से अनभिज्ञता जताई।
- अनिंदिता एंटरप्राइजेज की जांच में सामने आया कि फर्म ने बिना वास्तविक आपूर्ति के आईटीसी का दावा करके करीब 1.61 करोड़ रुपये की जीएसटी हानि पहुंचाई। विभागीय जांच में घोषित व्यापार स्थल और आवासीय पते पर फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला। संपर्क के लिए दर्ज मोबाइल नंबर भी बंद पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, फर्म ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण प्राप्त कर कागजों पर ही कारोबार दिखाया।
- श्री ट्रेडिंग कंपनी ने वर्ष 2019-20 में बिना वास्तविक माल की आपूर्ति किए ही 4.79 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पास-ऑन किया। विभागीय टीम द्वारा घोषित व्यापार स्थल की जांच में वहां किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि नहीं पाई गई।