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Lucknow News: दामन में सोने-चांदी, ''जज्बा'' कर्जदार
Fri, 16 Feb 2024 02:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 16 Feb 2024 02:33 AM IST
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रायबरेली। खेल...। कहने को बस एक शब्द। लेकिन भावनाओं पर गौर कर उम्मीदों के मैदान में उतरेंगे तो फिर आनंद ही आनंद आएगा। जुनून जोश में तब्दील हो जाएगा। हौसले का साथ मिलते ही उल्लास चरम पर पहुंचेगा। यहां तक तो सब सही, पर जब सोने-चांदी के तमगे से भरी झोली में फूटी कौड़ी न हो तो उम्मीद टूटती है। मन मसोसता है।
अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी सबा बुतूल आब्दी के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। वर्ष 2017 से अब तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सिल्वर व गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया। खेल के प्रति इस जज्बे ने उसे कर्ज तले दबा दिया। इस विकट स्थिति में मां का संबल मिला और रिश्तेदार भी हौसला बढ़ा रहे हैं। सवाल साफ है...आखिर कब तक ?
सब्जी मंडी क्षेत्र निवासी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सबा बुतूल आब्दी के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। खेल के प्रति बेटी का लगाव देखकर मां नाहिद आब्दी ने संबल दिया। सिलाई कर पैसे जोड़े। रिश्तेदारों से कर्ज लेकर तैयारी कराई और काठमांडू के साथ ही थाईलैंड भी भेजा। सबा भी उम्मीदों पर खरी उतरीं। बेहतर प्रदर्शन कर मेडल हासिल किया। मां को विश्वास है कि बेटी खेल में आगे बढ़ेगी तो सब ठीक हो जाएगा। परिवार में खुशियों का बसेरा होगा।
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हाल ही में थाईलैंड चैंपियनशिप में भाग लेने वाली सबा बताती हैं कि मुकाबले में हिस्सा लेने के लिए उन्हें करीब 60 हजार रुपये खर्च करने पड़े। इस रकम को जुटाना आसान नहीं था। इसके लिए कर्ज तक लेना पड़ा। कुछ धनराशि आपसी सहयोग से भी मिली। आज नहीं तो कल, कर्ज लौटाना पड़ेगा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले भी नेपाल में हुए मुकाबले के लिए कर्ज लेना पड़ा। किसी तरह से मां के जेवरात बेचकर उसे चुकाया।
उपलब्धियों की फेहरिस्त
-24 से 31 जनवरी तक थाईलैंड में हुई अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
-2023 में अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में स्वर्ण और कांस्य पदक।
-2023 में इंडिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड से भारत गौरव सम्मान।
-2020 में नेशनल यूथ आइकॉन अवार्ड।
सबा का ताइक्वांडो एसोसिएशन में पंजीकरण नहीं है। वह संगठन से कभी खेलने नहीं गईं। टूर्नामेंट में उनकी ओपन एंट्री होती है। अगर वह एसोसिएशन की तरफ से खेलें तो भरसक मदद की जाएगी।
मोहम्मद परवेज खान, सचिव रायबरेली ताइक्वांडो एसोसिएशन
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अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी सबा बुतूल आब्दी के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। वर्ष 2017 से अब तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सिल्वर व गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया। खेल के प्रति इस जज्बे ने उसे कर्ज तले दबा दिया। इस विकट स्थिति में मां का संबल मिला और रिश्तेदार भी हौसला बढ़ा रहे हैं। सवाल साफ है...आखिर कब तक ?
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सब्जी मंडी क्षेत्र निवासी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सबा बुतूल आब्दी के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। खेल के प्रति बेटी का लगाव देखकर मां नाहिद आब्दी ने संबल दिया। सिलाई कर पैसे जोड़े। रिश्तेदारों से कर्ज लेकर तैयारी कराई और काठमांडू के साथ ही थाईलैंड भी भेजा। सबा भी उम्मीदों पर खरी उतरीं। बेहतर प्रदर्शन कर मेडल हासिल किया। मां को विश्वास है कि बेटी खेल में आगे बढ़ेगी तो सब ठीक हो जाएगा। परिवार में खुशियों का बसेरा होगा।
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हाल ही में थाईलैंड चैंपियनशिप में भाग लेने वाली सबा बताती हैं कि मुकाबले में हिस्सा लेने के लिए उन्हें करीब 60 हजार रुपये खर्च करने पड़े। इस रकम को जुटाना आसान नहीं था। इसके लिए कर्ज तक लेना पड़ा। कुछ धनराशि आपसी सहयोग से भी मिली। आज नहीं तो कल, कर्ज लौटाना पड़ेगा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले भी नेपाल में हुए मुकाबले के लिए कर्ज लेना पड़ा। किसी तरह से मां के जेवरात बेचकर उसे चुकाया।
उपलब्धियों की फेहरिस्त
-24 से 31 जनवरी तक थाईलैंड में हुई अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
-2023 में अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में स्वर्ण और कांस्य पदक।
-2023 में इंडिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड से भारत गौरव सम्मान।
-2020 में नेशनल यूथ आइकॉन अवार्ड।
सबा का ताइक्वांडो एसोसिएशन में पंजीकरण नहीं है। वह संगठन से कभी खेलने नहीं गईं। टूर्नामेंट में उनकी ओपन एंट्री होती है। अगर वह एसोसिएशन की तरफ से खेलें तो भरसक मदद की जाएगी।
मोहम्मद परवेज खान, सचिव रायबरेली ताइक्वांडो एसोसिएशन