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Lucknow News: भारतीय ज्ञान का परचम लहराएंगे दुनिया में फैले गिरमिटिया

Fri, 19 Sep 2025 02:41 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Sep 2025 02:41 AM IST
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Girmitiyas spread across the world will hoist the flag of Indian knowledge
लखनऊ विश्वविद्यालय।
लखनऊ। लगभग दो सौ साल पहले मजबूरी में छोड़ आए थे अपने गांव, अपनी मिट्टी... हजारों मील दूर जाकर बने खेतों के मजदूर... मन में बिछोह था, पलायन की पीड़ा थी। वक्त के थपेड़ों को झेलते हुए बने वहीं के नेता, प्रधानमंत्री और सत्ताधीश। ये हैं गिरमिटिया... भारत की वो धड़कनें, जो दुनियाभर में बसी हैं। ये दुनिया में जहां भी गए-बसे वहां तुलसी की चौपाइयां, पुरातन लोक गीत, तीज त्योहारों की महिमा का साथ नहीं छोड़ा। अब लखनऊ विश्वविद्यालय ने शुरू की है एक अनूठी पहल... ‘गिरमिटियालॉजी वेबसाइट’, जो इन भारतवंशियों को न सिर्फ उनकी जड़ों से जोड़ेगी... बल्कि भारतीय ज्ञान और परंपरा का परचम भी पूरी दुनिया में लहराएगी।
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बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. मनुका खन्ना ने ‘गिरमिटियालॉजी वेबसाइट’ का लोकार्पण किया। ऑनलाइन कार्यशाला में नीदरलैंड से प्रो. शारदा नंद और एमएमटीटीसी निदेशक प्रो. कमल कुमार भी जुड़े। यह वेबसाइट महामना मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र और अंग्रेजी विभाग के साझा प्रयास से तैयार हुई है। इसके जरिये न केवल दुनिया में बसे लाखों गिरमिटिया भारतवंशियों को एक सूत्र में बांधने का प्रयास होगा, बल्कि उनकी ताकत और संख्या के सहारे भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं को विश्व पटल पर और बुलंद करने का लक्ष्य है।
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श्रमिक से सत्ता तक की दास्तान बनेगी पाठ्यक्रम
लखनऊ विश्वविद्यालय अगले शैक्षणिक सत्र से गिरमिटिया समुदाय के ‘श्रमिक से सत्तासीन बनने की गाथा’ पर आधारित पाठ्यक्रम भी शुरू करने जा रहा है। यूजी, पीजी और शोध स्तर पर इतिहास और साहित्य का यह कोर्स छात्रों को नए नजरिये से परिचित कराएगा। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. ओएन उपाध्याय ने कहा कि यह पहल शिक्षा जगत में अपने आप में अद्वितीय है।
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वंशजों की तलाश में मिलेगी मदद लविवि की इस वेबसाइट से गिरमिटिया वंशजों को अपने पूर्वजों की जड़ों को तलाशना आसान होगा। साथ ही एक सुरक्षित व्यवस्था भी बनाई जा रही है, ताकि भारत आने वाले प्रवासी किसी ठगी का शिकार न हों।



जानिये कौन हैं गिरमिटिया
19वीं सदी में ब्रिटिश शासन ने बिहार, बंगाल और यूपी के निर्धन श्रमिकों को ‘गिरमिट’ (एग्रीमेंट) के तहत ठेका मजदूर बनाकर फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका और कैरिबियन देशों (त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना) भेजा। उन्हें गन्ने और केले के बागानों में सस्ते श्रम के लिए काम पर लगाया गया। लेकिन यही मजदूर आगे चलकर उन देशों की सत्ता तक पहुंचे। मॉरीशस, फिजी, गुयाना और त्रिनिदाद जैसे देशों में आज भी गिरमिटिया वंशज प्रधानमंत्री, मंत्री और उच्च पदों पर कार्य कर रहे हैं।
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