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जेनेटिक स्क्रीनिंग से पता चलेंगी बच्चों में होने वाली बीमारियां
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केजीएमयू में शुरू होगा निदान केंद्र।
- फोटो : ??? ?????
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गर्भ में पल रहे बच्चे में कौन-कौन सी अनुवांशिक बीमारियों का खतरा है, थैलेसीमिया कैंसर की आशंका कितनी है, जेनेटिक स्क्रीनिंग से इन सबकी जानकारी आसानी से की जा सकेगी।
इसके लिए बच्चों की जेनेटिक स्क्रीनिंग की जाएगी। केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग यह सुविधा क्वीन मेरी में शुुरू करेगा। चिकित्सा विश्वविद्यालय को इसके लिए सरकारी अनुदान मिला है।
केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग की डॉ. मिली जैन के प्रस्ताव पर सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है। अब क्वीन मेरी में इसकी शुरुआत होनी है।
इस केंद्र में बच्चे के जन्म से पहले ही उनकी जेनेटिक स्क्रीनिंग की जाएगी। इसमें बच्चे के माता और पिता दोनों की मेडिकल हिस्ट्री देखी जाएगी।
इससे बच्चों में होने वाली जन्मजात बीमारियों के बारे में पहले से ही पता लगाना संभव हो सकेगा। बीमारी का खतरा होने पर उसके लिए बरती जाने वाली सावधानियां तथा इलाज की कार्ययोजना भी तैयार की जा सकेगी।
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थैलेसीमिया और कैंसर के इलाज में मिलेगी मदद
जेनेटिक स्क्रीनिंग के माध्यम से सबसे ज्यादा आसानी थैलेसीमिया और कैंसर की बीमारी का पता लगाने में होगी। इन बीमारियों के बारे में पहले से ही चलने पर डॉक्टर उनके लिए अपनी तैयारी कर सकेंगे। इस तरह निदान केंद्र पर जेनेटिक स्क्रीनिंग के माध्यम से शोध होने के साथ ही इलाज की दिशा भी तय की जा सकेगी।
सरकार की सहायता से निदान केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इसके माध्यम से जेनेटिक स्क्रीनिंग की जाएगी। इससे बच्चों की जन्मजात बीमारी के बारे में जानकारी करना आसान होगा।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू
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इसके लिए बच्चों की जेनेटिक स्क्रीनिंग की जाएगी। केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग यह सुविधा क्वीन मेरी में शुुरू करेगा। चिकित्सा विश्वविद्यालय को इसके लिए सरकारी अनुदान मिला है।
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केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग की डॉ. मिली जैन के प्रस्ताव पर सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है। अब क्वीन मेरी में इसकी शुरुआत होनी है।
इस केंद्र में बच्चे के जन्म से पहले ही उनकी जेनेटिक स्क्रीनिंग की जाएगी। इसमें बच्चे के माता और पिता दोनों की मेडिकल हिस्ट्री देखी जाएगी।
इससे बच्चों में होने वाली जन्मजात बीमारियों के बारे में पहले से ही पता लगाना संभव हो सकेगा। बीमारी का खतरा होने पर उसके लिए बरती जाने वाली सावधानियां तथा इलाज की कार्ययोजना भी तैयार की जा सकेगी।
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थैलेसीमिया और कैंसर के इलाज में मिलेगी मदद
जेनेटिक स्क्रीनिंग के माध्यम से सबसे ज्यादा आसानी थैलेसीमिया और कैंसर की बीमारी का पता लगाने में होगी। इन बीमारियों के बारे में पहले से ही चलने पर डॉक्टर उनके लिए अपनी तैयारी कर सकेंगे। इस तरह निदान केंद्र पर जेनेटिक स्क्रीनिंग के माध्यम से शोध होने के साथ ही इलाज की दिशा भी तय की जा सकेगी।
सरकार की सहायता से निदान केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इसके माध्यम से जेनेटिक स्क्रीनिंग की जाएगी। इससे बच्चों की जन्मजात बीमारी के बारे में जानकारी करना आसान होगा।
- डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू