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Lucknow News: जड़ी-बूटी प्रिंट वाले कपड़ों ने खींचा ध्यान
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निरालानगर स्थित सरस्वती मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को हस्तशिल्प एवं हथकरघा मेले का शुभारंभ हुआ
लखनऊ। निरालानगर स्थित सरस्वती मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को हस्तशिल्प एवं हथकरघा मेले का शुभारंभ हुआ। मेले में पारंपरिक शिल्प और वस्त्रों की विविधता ने दर्शकों को आकर्षित किया। खासतौर पर तुलसी की माला और 12 जड़ी-बूटियों से प्रिंट किए गए कपड़ों ने लोगों का ध्यान खींचा।
प्रदर्शनी में 1930 के दशक की रेशम, किनार, चंदेरी, मसलिन और कॉटन की साड़ियां आकर्षण का केंद्र रहीं। देवी अहिल्याबाई होल्कर की नगरी महेश्वर की साड़ियां और मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध बाग प्रिंट भी लोगों को खूब भाया।
संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम, भोपाल की ओर से आयोजित इस मेले का शुभारंभ स्थानीय निकाय की निदेशक ऋतु सुहास ने किया। उन्होंने पंचधातु व बेल मेटल की मूर्तियों के साथ शिफॉन, मलबरी, क्रेप, कोसा और इंडिगो प्रिंट की साड़ियों की सराहना की।
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मेले में हथकरघा की चादरें, एक जिला एक उत्पाद के तहत उत्पाद, चंदेरी, जूट, जरी-जरदोजी, लकड़ी के खिलौने और बाग-बटिक जैसे हस्तशिल्प भी प्रदर्शित किए गए हैं।
मध्यप्रदेश से आए शिल्पी कृष्ण कुमार शुक्ला ने बताया कि उनके स्टॉल पर तुलसी से निर्मित उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनमें तुलसी की माला और औषधीय उपयोग की वस्तुएं विशेष आकर्षण हैं।
मेले के प्रभारी अरविंद शर्मा के अनुसार, राज्य स्तरीय यह प्रदर्शनी 3 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें 35 से 40 बुनकर और शिल्पी अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन और विपणन कर रहे हैं। इस दौरान बुनकर चौपाल, कार्यशालाएं और शहनाई वादन सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में डॉ. ऋचा आर्या, पुष्पेंद्र सिंह चौहान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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प्रदर्शनी में 1930 के दशक की रेशम, किनार, चंदेरी, मसलिन और कॉटन की साड़ियां आकर्षण का केंद्र रहीं। देवी अहिल्याबाई होल्कर की नगरी महेश्वर की साड़ियां और मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध बाग प्रिंट भी लोगों को खूब भाया।
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संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम, भोपाल की ओर से आयोजित इस मेले का शुभारंभ स्थानीय निकाय की निदेशक ऋतु सुहास ने किया। उन्होंने पंचधातु व बेल मेटल की मूर्तियों के साथ शिफॉन, मलबरी, क्रेप, कोसा और इंडिगो प्रिंट की साड़ियों की सराहना की।
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मेले में हथकरघा की चादरें, एक जिला एक उत्पाद के तहत उत्पाद, चंदेरी, जूट, जरी-जरदोजी, लकड़ी के खिलौने और बाग-बटिक जैसे हस्तशिल्प भी प्रदर्शित किए गए हैं।
मध्यप्रदेश से आए शिल्पी कृष्ण कुमार शुक्ला ने बताया कि उनके स्टॉल पर तुलसी से निर्मित उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनमें तुलसी की माला और औषधीय उपयोग की वस्तुएं विशेष आकर्षण हैं।
मेले के प्रभारी अरविंद शर्मा के अनुसार, राज्य स्तरीय यह प्रदर्शनी 3 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें 35 से 40 बुनकर और शिल्पी अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन और विपणन कर रहे हैं। इस दौरान बुनकर चौपाल, कार्यशालाएं और शहनाई वादन सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में डॉ. ऋचा आर्या, पुष्पेंद्र सिंह चौहान समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

निरालानगर स्थित सरस्वती मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को हस्तशिल्प एवं हथकरघा मेले का शुभारंभ हुआ

निरालानगर स्थित सरस्वती मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को हस्तशिल्प एवं हथकरघा मेले का शुभारंभ हुआ

निरालानगर स्थित सरस्वती मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को हस्तशिल्प एवं हथकरघा मेले का शुभारंभ हुआ