लखनऊ के गणपति पूजा पंडालों पर कोरोना का संकट, पूजा को संक्षिप्त करने पर हो रहा विचार
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कोरोना संक्रमण के चलते इस बार शहर में सजने वाले गणपति पूजा पंडालों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गोमती नदी किनारे सजने वाले राजधानी के सबसे बड़े मनौतियों के राजा का विशाल पंडाल की जगह आयोजक संक्षिप्त पूजा करने पर विचार कर रहे हैं।
मुंबई की चर्चित लालबाग के राजा की पूजा में बदलाव के बाद नगर की सबसे बड़ी गणपति पूजा गणेश प्राकट्य कमेटी ने आयोजन को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। कमेटी के संरक्षक भारत भूषण ने गुरुवार को बताया 22 अगस्त से होने वाली गणपति पूजा झूलेलाल मैदान की बजाय दूसरे स्थान पर सामान्य रूप से आयोजित करने पर विचार चल रहा है।
इस पर अंतिम फैसला कमेटी के पदाधिकारियों की रविवार को होने वाली बैठक में लिया जाएगा। हमारी पूजा 10 दिनों तक चलती है, जिसमें 3-4 लाख लोग जुट जाते हैं। ऐसे में करोना गाइडलाइन का पालन मुश्किल होगा। पूजा आयोजन का स्वरूप क्या रहेगा, इसको लेकर कई फैसले कमेटी की बैठक में तय होंगे।
नहीं होंगे सांस्कृतिक आयोजन
पदाधिकारियों के मुताबिक इस बार सामान्य पूजन में बदले स्वरूप के तहत सांस्कृतिक आयोजन नहीं होंगे। एक सभागार में पूजन होंगे, जहां गाइडलाइन के तहत श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन कर सकेंगे। प्रसाद चढ़ाने और वितरण की व्यवस्था नहीं रहेगी।
प्रयास रहेगा कि सोशल मीडिया के तहत श्रद्धालु घर से भी गजानन के दरबार के दर्शन कर सके। कमेटी इस बात पर भी विचार कर रही है कि 10 दिनों के दौरान हर दिन दरबार से कोरोना से जंग के हथियार सैनिटाइजर, मास्क, जरूरतमंदों को राशन आदि वितरण के अलावा रक्तदान शिविर भी लगाया जाए। इन सारी योजनाओं पर फैसला रविवार को होने वाली बैठक में लिया जाएगा।
पूजा से 40 दिन पहले शुरू होता है पंडाल निर्माण
मनौतियों के राजा का पूजा पंडाल की भव्यता का अंदाजा इसी प्रकार लगाया जा सकता है कि हर साल गणपति पूजा शुरू होने से 40-45 दिन पहले पंडाल का निर्माण शुरू हो जाता है।
15 से 18 हजार स्क्वॉयर फीट में बनने वाले मुख्य पंडाल को हर साल किसी न किसी थीम पर तैयार किया जाता है। इसे बंगाल और असम के कारीगर बांस, प्लाई आदि से सजाते हैं। पंडाल का भारी भरकम बीमा होता है।