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Lucknow News: 2.75 करोड़ की कर चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
लखनऊ। फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) बेचकर 2.75 करोड़ की कर चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर सेल, सर्विलांस टीम और इटौंजा पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरोह के चार लोगों को गिरफ्तार किया। गिरोह का सरगना भागा हुआ है जिसकी तलाश चल रही है।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कानपुर नगर के साकेत नगर जूही कॉलोनी निवासी तबस्सुम, कल्याणपुर के प्रशांत बेंजवाल, दीनदयाल पुरम के दौलत राम और लखनऊ के इंदिरानगर सेक्टर-11 निवासी कारोबारी सुमित सौरभ के रूप में हुई है। गिरोह का सरगना तबस्सुम की बहन का दामाद सीतापुर निवासी अम्मार अंसारी है। यह पूरा मामला 2 सितंबर 2025 को सामने आया। राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक ने इटौंजा थाने में दौलतराम के खिलाफ एमएस स्वराज ट्रेडर्स फर्म के जरिये 52 लाख रुपये की कर चोरी का मामला दर्ज कराया था। जांच में पता चला कि गिरोह ने स्वराज ट्रेडर्स की तरह करीब 15 और बोगस फर्में बना रखी थीं। इनका पंजीकरण प्रशांत, तबस्सुम और अम्मार अंसारी ने कराया था।
अधिक धन कमाने के लिए किया फर्जीवाड़ा
डीसीपी के मुताबिक तबस्सुम ने बताया कि उसकी पहली शादी एजाज अहमद से हुई थी। एजाज ने उसे बेच दिया था। फिर कानपुर में उसने नरेंद्र से शादी की। 2017 में नरेंद्र के शादीशुदा होने की जानकारी होने पर उसने उसे छोड़ दिया। 2020 में उसकी पहचान कानपुर स्थित वी मार्ट में कैशियर प्रशांत से हुई। प्रशांत का वेतन 10 हजार रुपये था। दोनों साथ रहकर टिफिन सर्विस चलाने लगे। आमदनी कम होने और कम समय में अधिक धन कमाने के लिए दोनों ने अम्मार अंसारी से संपर्क किया। तीनों ने फर्जी जीएसटी तैयार कर आईटीसी बेचने के फर्जीवाड़े की साजिश रची।
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तबस्सुम और प्रशांत को प्रति फर्म मिलते थे एक लाख रुपये
डीसीपी ने बताया कि तबस्सुम और प्रशांत ऐसे लोगों की तलाश करते जो फर्जी फर्म बनवाने के लिए अपना आधार, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते जैसे दस्तावेज देने के लिए तैयार हो जाते थे। इन दस्तावेज को वे अम्मार को देते थे। आरोपियों ने कुल 16 फर्मों का पंजीकरण कराया था। इनमें से एक फर्म का मालिक दौलतराम को बनाया गया था, जो कानपुर की फैक्टरी में मजदूर है। अम्मार दोनों को प्रति फर्म के हिसाब से एक लाख रुपये देता था। अम्मार जीएसटी का रजिस्ट्रेशन, फर्जी किरायानामा और इन्हीं फर्जी फर्माें की आईटीसी जनरेट करता था। फर्जी फर्मोंं के जरिये कारोबारी कर चोरी करते थे।
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डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कानपुर नगर के साकेत नगर जूही कॉलोनी निवासी तबस्सुम, कल्याणपुर के प्रशांत बेंजवाल, दीनदयाल पुरम के दौलत राम और लखनऊ के इंदिरानगर सेक्टर-11 निवासी कारोबारी सुमित सौरभ के रूप में हुई है। गिरोह का सरगना तबस्सुम की बहन का दामाद सीतापुर निवासी अम्मार अंसारी है। यह पूरा मामला 2 सितंबर 2025 को सामने आया। राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक ने इटौंजा थाने में दौलतराम के खिलाफ एमएस स्वराज ट्रेडर्स फर्म के जरिये 52 लाख रुपये की कर चोरी का मामला दर्ज कराया था। जांच में पता चला कि गिरोह ने स्वराज ट्रेडर्स की तरह करीब 15 और बोगस फर्में बना रखी थीं। इनका पंजीकरण प्रशांत, तबस्सुम और अम्मार अंसारी ने कराया था।
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अधिक धन कमाने के लिए किया फर्जीवाड़ा
डीसीपी के मुताबिक तबस्सुम ने बताया कि उसकी पहली शादी एजाज अहमद से हुई थी। एजाज ने उसे बेच दिया था। फिर कानपुर में उसने नरेंद्र से शादी की। 2017 में नरेंद्र के शादीशुदा होने की जानकारी होने पर उसने उसे छोड़ दिया। 2020 में उसकी पहचान कानपुर स्थित वी मार्ट में कैशियर प्रशांत से हुई। प्रशांत का वेतन 10 हजार रुपये था। दोनों साथ रहकर टिफिन सर्विस चलाने लगे। आमदनी कम होने और कम समय में अधिक धन कमाने के लिए दोनों ने अम्मार अंसारी से संपर्क किया। तीनों ने फर्जी जीएसटी तैयार कर आईटीसी बेचने के फर्जीवाड़े की साजिश रची।
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तबस्सुम और प्रशांत को प्रति फर्म मिलते थे एक लाख रुपये
डीसीपी ने बताया कि तबस्सुम और प्रशांत ऐसे लोगों की तलाश करते जो फर्जी फर्म बनवाने के लिए अपना आधार, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते जैसे दस्तावेज देने के लिए तैयार हो जाते थे। इन दस्तावेज को वे अम्मार को देते थे। आरोपियों ने कुल 16 फर्मों का पंजीकरण कराया था। इनमें से एक फर्म का मालिक दौलतराम को बनाया गया था, जो कानपुर की फैक्टरी में मजदूर है। अम्मार दोनों को प्रति फर्म के हिसाब से एक लाख रुपये देता था। अम्मार जीएसटी का रजिस्ट्रेशन, फर्जी किरायानामा और इन्हीं फर्जी फर्माें की आईटीसी जनरेट करता था। फर्जी फर्मोंं के जरिये कारोबारी कर चोरी करते थे।