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केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में न्यूरो सर्जरी वार्ड फुल
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 10 May 2014 08:06 AM IST
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एक निजी अस्पताल में जन्म लेने वाली बच्ची की जान बचाने के लिए उसके परिवार को छह दिन का इंतजार करना पड़ा। बच्ची के सिर के पीछे का हिस्सा नहीं बना था। पैदाइशी विकृति के कारण उसके सिर से खून रिसता रहा था।
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परिवार वाले डॉक्टर की सलाह पर उसे लेकर तुरंत ट्रॉमा सेंटर भागे लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिला। इसके बाद वो पांच दिन से लगातार वहां दौड़-दौड़कर जाते रहे। तब जाकर शुक्रवार को उसे भर्ती किया जा सका।
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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और संजय गांधी पीजीआई जैसे तीन बड़े चिकित्सा संस्थान होने के बावजूद सिर की चोट का इलाज मिलना मुश्किल होता जा रहा है।
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सिर्फ एक नन्हीं सी बच्ची ही नहीं कई मरीजों को बिना इलाज के वापस लौटना पड़ रहा है। छह दिन के बाद बच्ची को ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जरी विभाग में जब भर्ती किया गया, उस समय भी वहां बेड खाली नहीं थे।
24 बेड न्यूरो सर्जरी वार्ड में पैर रखने की जगह भी नहीं थी, क्योंकि बेड के अलावा जमीन पर गद्दे डालकर और स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा था।
हालत ये थी कि वार्ड की गैलरी में हर तरफ एक मरीज पड़ा कराह था। किसी का इलाज नर्स कर रही थी तो कहीं जूनियर डॉक्टर इलाज में जुटे हुए थे।
राजधानी में भले ही न्यूरो सर्जरी विभाग तीन चिकित्सा संस्थानों में है लेकिन इमरजेंसी इलाज की सुविधा सिर्फ केजीएमयू में ही है।
वहां के ट्रॉमा सेंटर में राजधानी ही नहीं पूर्वांचल सहित आस-पास के जिलों से सिर की चोट के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। जबकि हालत ये है कि केजीएमयू के न्यूरो सर्जरी विभाग में सिर्फ चार सर्जन हैं।
ये पोस्ट वहां 1989 में सृजित हुई थीं। मरीज बढ़ते गए लेकिन सुविधाएं और स्टाफ नहीं बढ़ाया गया। इसके अलावा दो बड़े संस्थानों डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में दो असिस्टेंट प्रोफेसर और दो सीनियर रेजीडेंट, एसजीपीजीआई में पांच न्यूरो सर्जन और 12 सीनियर रेजीडेंट हैं।
लेकिन इन दोनों संस्थानों मेें दुर्घटना में घायल मरीजों के इलाज की व्यवस्था ही नहीं है। एसजीपीजीआई में इमरजेंसी सेवाएं हैं लेकिन वहां ट्रॉमा के केस नहीं लिए जाते। जबकि लोहिया इंस्टीट्यूट में इमरजेंसी सेवाएं ही नहीं हैं।
280 बेडे के ट्रॉमा सेंटर में शुक्रवार शाम तक 320 से अधिक मरीजों को भर्ती किया जा चुका था। सबसे बुरी हालत न्यूरो सर्जरी विभाग की थी जहां जमीन में गद्दे डाले गए थे।
बुधवार को बढ़ाए गए 50 स्ट्रेचर भी मरीज भर्ती थी। न्यूरो सर्जरी विभाग में रविशंकर, नीलम, सुरेश जैसे कई सिर केचोट के मरीज जमीन पर इलाज के लिए भर्ती किए गए थे।
ट्रॉमा प्रशासन की मानें तो बीते 24 घंटे में वहां 91 मरीजों की भर्ती हुई जिनमें 30 बेड के सर्जरी विभाग में 56 मरीज, 24 बेड के न्यूरो सर्जरी वार्ड में भी दोगुने मरीज भर्ती हो चुके थे।