{"_id":"5d465d3041141fc60f0e90f8a9635fcf","slug":"freedom-struggle-on-postal-stamps-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डाक टिकटों पर उतरा आजादी का संघर्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डाक टिकटों पर उतरा आजादी का संघर्ष
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 13 Sep 2014 01:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजाद भारत के पहले दिन (15 अगस्त 1947) मुंबई के एक डाकघर से भेजे गए पत्र का लिफाफा हो या फिर 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू होने का साक्ष्य दर्शाता आवरण। अतीत के झरोखे के इन यादगार लम्हों को अब शहरवासी भी देख सकेंगे।
विज्ञापन
जीपीओ में डाक विभाग ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक के सफर को चार कमरों वाले म्यूजियम में संजोकर रखा है। उत्तरप्रदेश के पहले फिलेटिक म्यूजियम का उद्घाटन जीपीओ में चीफ पोस्ट मास्टर जनरल आशुतोष त्रिपाठी ने किया।
विज्ञापन
जीपीओ के पहले तल पर स्थित फिटेलिक ब्यूरो ऑफिस में ही इस म्यूजियम को बनाया गया है। सुबह दस से शाम छह बजे तक शहरवासी नि:शुल्क म्यूजियम की सैर कर सकेंगे।
विज्ञापन
म्यूजियम में 36 फ्रेम में डाक टिकट और आवरण को सजाया गया है। स्वतंत्रता आंदोलन के लिए महात्मा गांधी की दांडी यात्रा पर आधारित डाक टिकट भी उपलब्ध है।
सन 1951 में हुए पहले एशियाई गेम पर आधारित मशाल जलती हुई चित्र वाला डाक टिकट भी मौजूद है। महात्मा गांधी की पहली पुण्यतिथि पर 30 जनवरी 1949 को जारी हुआ। आवरण भी म्यूजियम की शोभा बढ़ा रहा है।
दस मई 1984 को जारी हुआ बेगम हजरत महल पर टिकट, फिल्म अभिनेता राजकपूर और गायिका बेगम अख्तर पर भी टिकट म्यूजियम में लगा हुआ है। लखनऊ घराने का कथक भी डाक टिकट पर उतर आया है।
दिखेंगे डाक के ब्रिटिशकालीन बॉक्स
जीपीओ के म्यूजियम में अंग्रेजों के समय इस्तेमाल होने वाले डाक बॉक्स के अलावा उस समय के दस्तावेज भी जल्द ही मंगाए जाएंगे। निदेशक डाक सेवाएं वीके दक्ष ने बताया कि प्रदेश भर से डाक विभाग के ऐसे ही दुर्लभ वस्तुओं को लखनऊ लाने का आदेश दिया गया है।