यूपीः नौकरी के नाम पर युवाओं के साथ हो रहा है बड़ा धोखा
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उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के टेढ़ी कोठी स्थित मुख्यालय में फर्जी भर्ती बोर्ड चल रहा है। ये फर्जी भर्ती बोर्ड नौकरी के नाम पर युवकों से मोटी रकम ऐंठ रहा है।
पिछले तीन साल में इस सिंडीकेट की ठगी के 10 मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई न होने से इसके हौसले बुलंद हैं। मुख्यालय में 10-15 साल से जमे कर्मियों के इस सिंडीकेट से जुड़े होने की बात कही जा रही है।
फर्जी भर्ती बोर्ड के प्रधान प्रबंधक (कार्मिक) ने जो नियुक्ति पत्र जारी किया है, उसमें 22 मई 2015 को रिक्त पद के अनुपालन में शिवेंद्र कुमार को बुकिंग क्लर्क के 5200 से 20,200 रुपये के वेतनमान एवं 2000 पे बैंड पर नियुक्त किए जाने का उल्लेख है।
18 नवंबर 2015 को जारी यह नियुक्ति पत्र शिवेंद्र को साधारण डाक से घर के पते पर भेजा गया था। पिछले दिनों वह जॉइन करने पहुंचा तो उसे ठगे जाने का पता चला।
गत जुलाई में बाराबंकी के संविदा कंडक्टर राजेश वर्मा ने एक-एक लाख रुपये लेकर बाराबंकी रामनगर के दो युवकों का फर्जी भर्ती बोर्ड से संविदा कंडक्टर का नियुक्ति पत्र जारी करा दिया।
दोनों युवक कैसरबाग बस अड्डे में सिक्योरिटी रकम जमा करने पहुंचे तो कर्मियों ने उन्हें पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। वजीरगंज पुलिस ने ठगे गए युवकों को छोड़ दिया, लेकिन संविदा कंडक्टर को बर्खास्त कर दिया गया।
युवाओं को दिए जा रहे हैं फर्जी नियुक्ति पत्र
परिवहन निगम में पिछले तीन साल के भीतर फर्जी तरीके से नियुक्ति पत्र जारी किए जाने एवं बर्खास्त किए गए संविदा कंडक्टरों की बहाली के 10 से अधिक केस हजरतगंज एवं वजीरगंज कोतवाली में दर्ज हो चुके हैं। हालांकि निगम अफसरों की लचर पैरवी तथा जांच में पुलिस को सहयोग न करने के कारण फर्जी भर्ती बोर्ड के संचालक अब तक पकड़े नहीं जा सके।
इससे पहले परिवहन निगम में तत्कालीन प्रबंध निदेशक वेंकटेश्वर लू के फर्जी आदेश से प्रदेश भर में संविदा कंडक्टरों की भर्ती किए जाने के घोटाले का खुलासा हुआ था।
इस खेल में प्रबंध निदेशक के कैंप की मिलीभगत के शक में सभी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। उच्च स्तरीय जांच में घोटाला करने वाले बेनकाब हुए, लेकिन वेंकटेश्वर लू के तबादले के बाद परिवहन विभाग के एक कमिश्नर ने सभी आरोपियों को बचा लिया।
शिवेंद्र कुमार को फर्जी नियुक्ति पत्र देने का मामला जानकारी में आया है। इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है। शिवेंद्र से संपर्क करने की कोशिश हो रही है, जिससे सिंडीकेट के बारे में जानकारी जुटाकर उसे पकड़ा जा सके।
शाद सईद, प्रधान प्रबंधक (कार्मिक), उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम