छह इंजीनियरों के खिलाफ होगी जांच
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गोंडा में पुल व पुलिया के घटिया निर्माण के छह साल पुराने मामले में
हालांकि इनमें से दो इंजीनियर रिटायर हो चुके हैं। जांच की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता बेतवा को सौंपी गई है।
प्रदेश सरकार सिंचाई विभाग
के पुराने दबे मामलों को उजागर करने में लग गई है।
इसी के तहत सरयू नहर
खंड-4 गोंडा में पुल व पुलियों के घटिया निर्माण व टेंडर प्रक्रिया में
गोलमाल की जांच शुरू के आदेश दिए गए हैं।
यह निर्माण कार्य वित्तीय वर्ष
2006-07 से लेकर 2008-09 के बीच हुए थे। टेक्निकल ऑडिट सेल (टीएसी) की
प्रारंभिक जांच में भी इसमें तत्कालीन अधिशासी व सहायक अभियंता दोषी पाए गए
थे।
इन्हें आरोप पत्र देने के लिए सिंचाई विभाग ने सरकार से इजाजत मांगी
थी। सरकार ने आरोप पत्र देकर जांच की अनुमति दे दी है। गुरुवार को इलाहाबाद
के 10 साल पुराने मामले में भी दोबारा जांच कराने के आदेश सरकार ने दिए
थे।
सरकार ने जिनके खिलाफ जांच के निर्देश
दिए हैं उनमें दो अधिशासी व चार सहायक अभियंता शामिल हैं।
इनमें एक अधिशासी
अभियंता हेतराम को रिटायर हुए काफी समय हो गया है। नियम यह है कि
रिटायरमेंट के बाद चार माह तक ही किसी मामले में आरोप पत्र दिया जा सकता
है।
ऐसे में उन्हें आरोप पत्र अब नहीं दिया जा सकता। इस कारण सरकार ने उनके
मामले में सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष अशोक कुमार ओझा
से जांच कर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।
इसमें
पूछा गया है कि हेतराम ने कोई नुकसान पहुंचाया है या नहीं ? यदि नुकसान
पहुंचाया है तो उनके खिलाफ सिविल वाद दाखिल किया जाए।
इनके अलावा पांच अन्य
अभियंताओं के खिलाफ सरकार ने आरोप पत्र स्वीकृत कर दिए हैं। इन पर लगे
आरोपों की जांच दो माह के भीतर खत्म करने के लिए कहा गया है।