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जिसके समय में हुआ था 300 सड़कों के निर्माण में घपला, उसी को सौंप दी जांच
Fri, 12 Apr 2019 12:51 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 12 Apr 2019 12:51 AM IST
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बस्ती में सड़क निर्माण के घपले में एक और बड़ा खेल सामने आया है। दरअसल, पीडब्ल्यूडी में जिस मुख्य अभियंता के कार्यकाल में करोड़ों का घपला हुआ, उसी को मामले की जांच सौंप दी गई है। इससे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद लगभग खत्म होती नजर आ रही है।
2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की। प्रारंभिक जांच में ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं।
मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया। इस टीम ने जांच में करीब 40 करोड़ का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही धनराशि के बड़े हिस्से के गबन की आशंका भी जताई। इसके लिए प्रांतीय खंड के तत्कालीन एक्सईएन आलोक रमण को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की गहन जांच की आवश्यकता भी बताई गई।
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2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की। प्रारंभिक जांच में ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं।
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मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया। इस टीम ने जांच में करीब 40 करोड़ का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही धनराशि के बड़े हिस्से के गबन की आशंका भी जताई। इसके लिए प्रांतीय खंड के तत्कालीन एक्सईएन आलोक रमण को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की गहन जांच की आवश्यकता भी बताई गई।
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आलोक रमण के खिलाफ तत्काल अनुशासन अपील नियमावली-1999 के नियम-7 के तहत जांच के आदेश दे दिए गए और आलोक रमण को सस्पेंड कर दिया गया। अब शासन ने मामले की जांच गोरखपुर मंडल के मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना को सौंपी है।
बता दें कि इस घपले को वित्त वर्ष 2017-18 और उससे अगले वित्त वर्ष के 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2018 के मध्य अंजाम दिया गया। जबकि, मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना के ही पास 1 अप्रैल से 30 जुलाई 2018 तक बस्ती का भी चार्ज था।
नियमानुसार, उन्हें इस मामले की जांच नहीं सौंपी जा सकती है। पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि शासन के इस निर्णय से जांच प्रभावित होना तय है। शुरू से ही इस मामले में लीपापोती की कोशिश की जा रही है।
संबंधित मामलों के अभिलेखों का अध्ययन किया जा रहा है। नियमानुसार शासन को पूरी स्थिति से अवगत कराया जाएगा।-वीके सिंह, विभागाध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी
बता दें कि इस घपले को वित्त वर्ष 2017-18 और उससे अगले वित्त वर्ष के 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2018 के मध्य अंजाम दिया गया। जबकि, मुख्य अभियंता एसपी सक्सेना के ही पास 1 अप्रैल से 30 जुलाई 2018 तक बस्ती का भी चार्ज था।
नियमानुसार, उन्हें इस मामले की जांच नहीं सौंपी जा सकती है। पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि शासन के इस निर्णय से जांच प्रभावित होना तय है। शुरू से ही इस मामले में लीपापोती की कोशिश की जा रही है।
संबंधित मामलों के अभिलेखों का अध्ययन किया जा रहा है। नियमानुसार शासन को पूरी स्थिति से अवगत कराया जाएगा।-वीके सिंह, विभागाध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी