फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Four people were found guilty of filing a false case under SC-ST Act, court pronounced the sentence, the decision became a precedent

Lucknow News: एससी-एसटी एक्ट में झूठा मुकदमा कराना चार को पड़ा भारी, कोर्ट ने सुनाई सजा, नजीर बने फैसले

Wed, 18 Jun 2025 02:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Jun 2025 02:29 AM IST
विज्ञापन
Four people were found guilty of filing a false case under SC-ST Act, court pronounced the sentence, the decision became a precedent
लखनऊ। अनुसूचित जाति और जनजाति को संरक्षण देने, उनके खिलाफ होने वाले अत्याचारों और शोषण से सुरक्षा के लिए 1989 में एससी-एसटी एक्ट बनाया गया था। एक्ट को बनाने के बाद ऐसे मामलों में त्वरित न्याय दिलाने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना की गई। इस एक्ट ने पीड़ितों को राहत तो पहुंचाई, लेकिन काफी हद तक इसका दुरुपयोग भी किया जा रहा है। इस बात का प्रमाण हाल में ही चार मामलों में एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी की ओर से सुनाया गया फैसला है। विशेष न्यायाधीश ने झूठा केस दर्ज कराने वाले चार लोगों को कड़ी सजा और जुर्माने से दंडित किया है। इससे झूठे केस दर्ज कराने वालों को कड़ी नसीहत मिली है।
विज्ञापन

पीड़ितों को सरकार से मिलती है सहायता
एससी-एसटी एक्ट की धारा 23 की उपधारा एक में दी गई शक्तियों का प्रयोग करके समुदाय के सदस्यों के साथ होने वाले अपराधों के अनुसार उन्हें एक लाख से आठ लाख 25 हजार तक की सहायता केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर देती है।
विज्ञापन

केस-1: सहदेव ने कोर्ट के जरिये 12 अप्रैल 2024 को गाजीपुर थाने में सत्यनारायण और उनके बेटे संजय के खिलाफ 16 दिसंबर 2023 को बीस हजार रुपये और मोबाइल फोन लूटने के अलावा एससी एसटी एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना में केस गलत पाया गया। लिहाजा, पुलिस ने रिपोर्ट कोर्ट को भेज दी। इस मामले में सुनवाई के बाद कोर्ट ने सहदेव को दो अप्रैल को झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर सात साल की कैद और दो लाख एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस-2: रमेश रावत का अरुण, इरफान अली, मोहम्मद जिशान और रिजवान से रुपयों का लेनदेन था। रमेश ने अनुसूचित जाति का सदस्य होने का फायदा उठाने के लिए चारों के खिलाफ वर्ष 2022 में चिनहट थाने में एससी-एसटी एक्ट के साथ ही मारपीट की रिपोर्ट दर्ज करा दी। विवेचना में केस झूठा पाया गया था। विवेचक ने छह दिसंबर 2022 को रमेश के मुकदमे में जुर्म को खारिज करने वाली अंतिम रिपोर्ट लगा दी। कोर्ट ने रमेश रावत के खिलाफ सुनवाई करके उसे आठ मई को पांच साल की कैद और 50 हजार के जुर्माने से दंडित किया।
केस-3 : लाखन सिंह का सुनील दुबे से पांच बीघे जमीन के लिए विवाद चल रहा था। लाखन सिंह ने 15 फरवरी 2014 को कोर्ट के जरिये सुनील दुबे और उसके अन्य साथियों के खिलाफ विकासनगर थाने में हत्या का प्रयास, जानमाल की धमकी, तोड़फोड़, गाली गलौज व एससी एसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज करा दी। विवेचना में केस झूठा पाया गया। लिहाजा विवेचक ने लाखन सिंह के मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी और केस चलाने की मांग की। कोर्ट ने 16 मई को लाखन सिंह को 10 साल की कैद और दो लाख 51 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

केस-4: बाराबंकी के जैदपुर की रहने वाली रेखा देवी ने थाना जैदपुर में 29 जून 2021 को राजेश और भूपेंद्र के खिलाफ जानमाल की धमकी, सामूहिक दुष्कर्म और एससी एसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटनास्थल के आधार पर विवेचना बीकेटी स्थानांतरित हो गई। विवेचना में आरोप गलत पाए गए। इसके बाद विवेचक ने रेखा के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कोर्ट से मांग की। इसपर कोर्ट ने 16 जून को रेखा देवी को सात साल छह माह की कैद और दो लाख एक हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed