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यूपी में अखिलेश से पहले हैं चार 'मुख्यमंत्री'
अतुल भरद्वाज/लखनऊ
Updated Mon, 07 Oct 2013 01:20 PM IST
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किसानों की समस्या को लेकर यूपी सरकार के मुखिया अखिलेश यादव से मुलाकात करना आसान नहीं है। उनसे मिलने के रास्ते में कुछ बैरियर लगे हुए हैं।
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वह अकेले मुख्यमंत्री नहीं है। उनसे पहले ‘चार मुख्यमंत्रियों’ से सामना हो जाता है।
रविवार को राजधानी में भारतीय किसान यूनियन के कार्यक्रम में नेता स्व. महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए यह बात कही।
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हालांकि, टिकैत ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा सपा सरकार के चार बड़े कद्दावर नेताओं की ओर था। टिकैत से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि ये चार मुख्यमंत्री आजम खां, शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव और राजेंद्र चौधरी हैं।
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किसान आंदोलन की रणनीति आगे तय करने के लिए अब सिसौली मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 17-18 अक्टूबर को बुलाई गई है।
भारतीय किसान यूनियन ने रविवार को राजधानी के लक्ष्मण पार्क में अपने नेता स्व. महेंद्र सिंह टिकैत का 79वां जन्मदिवस ‘किसान जागृति दिवस’ के रूप में मनाया।
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यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की समस्या को दूर करने के लिए कोई सरकार काम नहीं कर रही। कुछ लोग हैं जो यूपी सरकार को काम ही नहीं करने दे रहे हैं।
किसान को मंडी में समर्थित मूल्य से भी कम कीमत गन्ना, धान या गेहूं बेचने पर मिल रही है। अधिकारी कुछ नहीं करते।
कार्यक्रम में पूर्वी यूपी के जिलों से आए किसानों की समस्याएं भी सुनी गईं। इसके बाद एक ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को सौंपा गया।
मुजफ्फरनगर दंगों में किसानों का ही नुकसान हुआ
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि मुजफ्फरनगर के गांवों में दंगा पूरी तरह सियासी था। अधिकारियों को काम नहीं करने दिया गया। घटनाक्रम के बीच एकतरफा कार्रवाई की गई। इसकी वजह से हालात बिगड़े।
सबसे ज्यादा नुकसान यहां किसानों का ही हुआ। किसानों की गन्ना और आलू की फसल तबाह हो गई। उनके लिए कोई राजनेता संवेदनशील नहीं है।
कई महीने से अपराधियों को वहां थानों से छुड़ाने का काम सियासतदां कर रहे थे। कुछ को एमपी का चुनाव लड़ने केलिए टिकट नहीं मिला तो दंगा करा दिया।
टिकैत ने मुजफ्फरनगर में हुए दंगे की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की। किसान यूनियन पर आरोप लगाना गलत है।
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