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पार्किंग ठेके के विवाद में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र ने मारी थी प्रापर्टी डीलर को गोलियां
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पार्किंग ठेके के विवाद में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों ने मारी थीं प्रॉपर्टी डीलर को गोलियां, मां-बेटी समेत चार गिरफ्तार
चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में बिहार के हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र ठाकुर को इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र फिरदौस उर्फ शादाब अख्तर और मिक्ताउल ने गोलियां मारी थीं।
रेलवे के एसपी सौमित्र यादव ने केस का खुलासा करने की जानकारी देते हुए बताया कि वीरेंद्र ठाकुर अपनी दबंगई के बूते बीते सात साल से बिहार के नरकटियागंज नगर परिषद का ठेका रिश्तेदारों को दिला रहा था।
उसके वर्चस्व को खत्म करने और पार्किंग ठेका हासिल करने के लिए फिरदौस ने साजिश रची। उसने अपने साथी मिक्ताउल हक, मेहराजुल हक, चाचा के बेटे मेहराजुद्दीन तथा रिश्तेदार महिला और उसकी बेटी को साथ लेकर वारदात अंजाम दी।
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पुलिस ने मां-बेटी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि मुख्य आरोपी फिरदौस और मिक्ताउल भागे हुए हैं। एसपी ने बताया कि दोनों की लोकेशन दिल्ली में मिली है। उन्हें पकड़ने के लिए टीम भेजी जा रही है।
एसपी ने बताया कि बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित शिकारपुर नरकटियागंज निवासी व छह साल से यहां निलमथा में रह रहे वीरेंद्र ठाकुर पर दो जुलाई की दोपहर चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में हमला हुआ था।
छानबीन में पता चला कि वीरेंद्र बिहार का शातिर अपराधी है और वहां उसके खिलाफ विभिन्न थानों में हत्या, हत्या की कोशिश, लूट, डकैती, रंगदारी समेत कई गंभीर धाराओं में 23 मुकदमे दर्ज हैं।
यह भी पता चला कि बिहार के शिकारपुर स्थित बरवा बरौली के फिरदौस से उसकी रंजिश चल रही है। पुलिस ने वीरेंद्र और फिरदौस के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली तो सारी तस्वीर साफ हो गई।
एसपी ने बताया कि वीरेंद्र का नरकटियागंज में खासा दबदबा है। सात साल से नरकटियागंज नगर परिषद का पार्किंग ठेका उसके इशारे पर ही उठता है।
वीरेंद्र ने पार्किंग ठेका अपने रिश्तेदारों व करीबियों को दिलाकर करोड़ों रुपये कमाए हैं। उक्त पार्किंग ठेके पर फिरदौस की भी नजर थी।
उसने वीरेंद्र के वर्चस्व को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। इसके बाद उसने वीरेंद्र को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
वीरेंद्र इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन गलत संगत के चलते आपराधिक वारदातें करने लगा।
उसने अपने साथ ही पढ़ने वाले बिहार के ही बैरिया निवासी अपने साथी मिक्ताउल, मानकनगर के तेजीखेड़ा निवासी दोस्त मेहराजुल हक, चाचा के बेटे मेहराजुद्दीन और अपनी एक रिश्तेदार महिला व उसकी बेटी को भी साजिश में शामिल कर वारदात को अंजाम दिया।
बकौल एसपी, फिरदौस ने अपनी रिश्तेदार को फर्जी आईडी से सिमकार्ड दिलाकर वीरेंद्र से बातचीत कराई। धीरे-धीरे वीरेंद्र महिला के जाल में फंसने लगा।
दो जून की दोपहर महिला ने फोन कर वीरेंद्र को मिलने के लिए चारबाग रेलवे स्टेशन बुलाया था। वहां बाकी आरोपी पहले से तैयार खड़े थे।
वीरेंद्र जैसे ही महिला से मिलने आया, फिरदौस और मिक्ताउल ने उसे ताबड़तोड़ गोलियां मारीं और असलहे लहराते हुए भाग निकले।
दोनों ने अपने मोबाइल व सिमकार्ड तोड़कर फेंक दिए और दिल्ली चले गए जबकि मेहराजुद्दीन ने महिला व उसकी बेटी को मेट्रो में बैठा दिया।
दोनों लखनऊ से कोलकाता चली गईं। पुलिस ने मां-बेटी को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है जबकि मेहराजुद्दीन व मेहराजुल को लखनऊ से दबोच लिया गया।
यह थी घटना
निलमथा में रहकर प्रापर्टी डीलिंग कर रहे बिहार के वीरेंद्र ठाकुर पर लखनऊ जंक्शन स्थित जीआरपी चौकी के सामने दो जुलाई की दोपहर बाइक सवार दो बदमाशों ने हमला कर दिया था। उस पर ताबड़तोड़ तीन गोलियां चलाई गईं जिसमें से दो कमर में लगी थीं। वारदात के बाद बदमाश चारबाग रेलवे स्टेशन से रिजर्वेशन सेंटर होते हुए केकेसी की तरफ भाग निकले थे। उसकी पत्नी प्रियंका की तरफ से अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
चारबाग के होटल में ठहरे थे आरोपी
एसपी ने बताया कि फिरदौस और उसके सभी साथी 29 जून को लखनऊ पहुंच गए थे। यहां चारबाग के एक होटल में सभी ठहरे हुए थे। इस दौरान वीरेंद्र से फोन पर बाचचीत कर रही महिला ने उसे कई बार मिलने के लिए बुलाया। कभी वह हजरतगंज तो कभी बादशाहनगर में बुलाती, लेकिन वीरेंद्र उसे अपने ठिकाने पर आने को कहता। दो जुलाई को महिला ने चारबाग बुलाया तो वह मिलने आ गया।
दोस्त ने किया था तमंचे व बाइक का इंतजाम
वारदात के लिए तमंचे और बाइक का इंतजाम फिरदौस के मानकनगर निवासी दोस्त मेहराजुल ने किया था। पूछताछ में उसने बताया कि उसने अपने परिचित से एक बाइक व एक असलहा तस्कर से पांच तमंचे लिए थे। पुलिस असलहा तस्कर की तलाश कर रही है।
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चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में बिहार के हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र ठाकुर को इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र फिरदौस उर्फ शादाब अख्तर और मिक्ताउल ने गोलियां मारी थीं।
रेलवे के एसपी सौमित्र यादव ने केस का खुलासा करने की जानकारी देते हुए बताया कि वीरेंद्र ठाकुर अपनी दबंगई के बूते बीते सात साल से बिहार के नरकटियागंज नगर परिषद का ठेका रिश्तेदारों को दिला रहा था।
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उसके वर्चस्व को खत्म करने और पार्किंग ठेका हासिल करने के लिए फिरदौस ने साजिश रची। उसने अपने साथी मिक्ताउल हक, मेहराजुल हक, चाचा के बेटे मेहराजुद्दीन तथा रिश्तेदार महिला और उसकी बेटी को साथ लेकर वारदात अंजाम दी।
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पुलिस ने मां-बेटी समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि मुख्य आरोपी फिरदौस और मिक्ताउल भागे हुए हैं। एसपी ने बताया कि दोनों की लोकेशन दिल्ली में मिली है। उन्हें पकड़ने के लिए टीम भेजी जा रही है।
एसपी ने बताया कि बिहार के पश्चिमी चंपारण स्थित शिकारपुर नरकटियागंज निवासी व छह साल से यहां निलमथा में रह रहे वीरेंद्र ठाकुर पर दो जुलाई की दोपहर चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में हमला हुआ था।
छानबीन में पता चला कि वीरेंद्र बिहार का शातिर अपराधी है और वहां उसके खिलाफ विभिन्न थानों में हत्या, हत्या की कोशिश, लूट, डकैती, रंगदारी समेत कई गंभीर धाराओं में 23 मुकदमे दर्ज हैं।
यह भी पता चला कि बिहार के शिकारपुर स्थित बरवा बरौली के फिरदौस से उसकी रंजिश चल रही है। पुलिस ने वीरेंद्र और फिरदौस के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली तो सारी तस्वीर साफ हो गई।
एसपी ने बताया कि वीरेंद्र का नरकटियागंज में खासा दबदबा है। सात साल से नरकटियागंज नगर परिषद का पार्किंग ठेका उसके इशारे पर ही उठता है।
वीरेंद्र ने पार्किंग ठेका अपने रिश्तेदारों व करीबियों को दिलाकर करोड़ों रुपये कमाए हैं। उक्त पार्किंग ठेके पर फिरदौस की भी नजर थी।
उसने वीरेंद्र के वर्चस्व को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। इसके बाद उसने वीरेंद्र को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
वीरेंद्र इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन गलत संगत के चलते आपराधिक वारदातें करने लगा।
उसने अपने साथ ही पढ़ने वाले बिहार के ही बैरिया निवासी अपने साथी मिक्ताउल, मानकनगर के तेजीखेड़ा निवासी दोस्त मेहराजुल हक, चाचा के बेटे मेहराजुद्दीन और अपनी एक रिश्तेदार महिला व उसकी बेटी को भी साजिश में शामिल कर वारदात को अंजाम दिया।
बकौल एसपी, फिरदौस ने अपनी रिश्तेदार को फर्जी आईडी से सिमकार्ड दिलाकर वीरेंद्र से बातचीत कराई। धीरे-धीरे वीरेंद्र महिला के जाल में फंसने लगा।
दो जून की दोपहर महिला ने फोन कर वीरेंद्र को मिलने के लिए चारबाग रेलवे स्टेशन बुलाया था। वहां बाकी आरोपी पहले से तैयार खड़े थे।
वीरेंद्र जैसे ही महिला से मिलने आया, फिरदौस और मिक्ताउल ने उसे ताबड़तोड़ गोलियां मारीं और असलहे लहराते हुए भाग निकले।
दोनों ने अपने मोबाइल व सिमकार्ड तोड़कर फेंक दिए और दिल्ली चले गए जबकि मेहराजुद्दीन ने महिला व उसकी बेटी को मेट्रो में बैठा दिया।
दोनों लखनऊ से कोलकाता चली गईं। पुलिस ने मां-बेटी को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है जबकि मेहराजुद्दीन व मेहराजुल को लखनऊ से दबोच लिया गया।
यह थी घटना
निलमथा में रहकर प्रापर्टी डीलिंग कर रहे बिहार के वीरेंद्र ठाकुर पर लखनऊ जंक्शन स्थित जीआरपी चौकी के सामने दो जुलाई की दोपहर बाइक सवार दो बदमाशों ने हमला कर दिया था। उस पर ताबड़तोड़ तीन गोलियां चलाई गईं जिसमें से दो कमर में लगी थीं। वारदात के बाद बदमाश चारबाग रेलवे स्टेशन से रिजर्वेशन सेंटर होते हुए केकेसी की तरफ भाग निकले थे। उसकी पत्नी प्रियंका की तरफ से अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
चारबाग के होटल में ठहरे थे आरोपी
एसपी ने बताया कि फिरदौस और उसके सभी साथी 29 जून को लखनऊ पहुंच गए थे। यहां चारबाग के एक होटल में सभी ठहरे हुए थे। इस दौरान वीरेंद्र से फोन पर बाचचीत कर रही महिला ने उसे कई बार मिलने के लिए बुलाया। कभी वह हजरतगंज तो कभी बादशाहनगर में बुलाती, लेकिन वीरेंद्र उसे अपने ठिकाने पर आने को कहता। दो जुलाई को महिला ने चारबाग बुलाया तो वह मिलने आ गया।
दोस्त ने किया था तमंचे व बाइक का इंतजाम
वारदात के लिए तमंचे और बाइक का इंतजाम फिरदौस के मानकनगर निवासी दोस्त मेहराजुल ने किया था। पूछताछ में उसने बताया कि उसने अपने परिचित से एक बाइक व एक असलहा तस्कर से पांच तमंचे लिए थे। पुलिस असलहा तस्कर की तलाश कर रही है।