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बहराइच के पूर्व विधायक वारिस अली की पैर फिसलने से तालाब में डूबकर मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बहराइच
Updated Sun, 08 Jul 2018 09:27 PM IST
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बहराइच के पूर्व विधायक वारिस अली
- फोटो : amar ujala
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नानपारा के पूर्व विधायक वारिस अली की रविवार को संदिग्ध हालात में तालाब में डूबकर मौत हो गई। परिवारीजन पैर फिसलने से डूबने की आशंका जता रहे हैं। पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने शव घरवालों को सौंप दिया। देर शाम शव सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
नानपारा के पूर्व विधायक वारिस अली (56) का आवास नगर के पश्चिमी हिस्से में कतर्नियाघाट मार्ग पर है। वे रोज पांच बजे आवासीय परिसर में ही मॉर्निंग वॉक करते थे। परिवारीजनों के मुताबिक रविवार को वह मॉर्निंग वॉक के लिए निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। काफी देर होने पर परिवारीजनों ने खोजबीन की तो उनका शव आवासीय परिसर स्थित तालाब में पड़ा मिला। इस पर चीख पुकार मच गई।
सूचना पाकर एएसपी ग्रामीण रवींद्र सिंह, सीओ विजय प्रताप सिंह और कोतवाली नानपारा के प्रभारी निरीक्षक विनोद अग्निहोत्री ने मौके पर पहुंचकर जांच की। 2007 में नानपारा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर वह विधानसभा पहुंचे थे। लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। पूर्व विधायक की अल्पसंख्यक वर्ग के बड़े नेता के रूप में क्षेत्र में पहचान थी।
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नानपारा के पूर्व विधायक वारिस अली (56) का आवास नगर के पश्चिमी हिस्से में कतर्नियाघाट मार्ग पर है। वे रोज पांच बजे आवासीय परिसर में ही मॉर्निंग वॉक करते थे। परिवारीजनों के मुताबिक रविवार को वह मॉर्निंग वॉक के लिए निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। काफी देर होने पर परिवारीजनों ने खोजबीन की तो उनका शव आवासीय परिसर स्थित तालाब में पड़ा मिला। इस पर चीख पुकार मच गई।
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सूचना पाकर एएसपी ग्रामीण रवींद्र सिंह, सीओ विजय प्रताप सिंह और कोतवाली नानपारा के प्रभारी निरीक्षक विनोद अग्निहोत्री ने मौके पर पहुंचकर जांच की। 2007 में नानपारा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर वह विधानसभा पहुंचे थे। लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। पूर्व विधायक की अल्पसंख्यक वर्ग के बड़े नेता के रूप में क्षेत्र में पहचान थी।
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