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दुष्कर्म के आरोपी पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को अंतरिम जमानत, देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे बाहर
Fri, 04 Sep 2020 01:28 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 04 Sep 2020 01:28 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद प्रदेश के पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को दो माह के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती गायत्री ने कोरोना संक्रमण का हवाला देकर जमानत की याचिका दायर की थी।
न्यायमूर्ति वेद प्रकाश वैश्य ने गायत्री प्रसाद प्रजापति को मेडिकल आधार पर उनकी रिहाई से दो महीने के लिए अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने उनको ढाई-ढाई लाख रुपये की दो संतुष्टि लायक जमानतें और 5 लाख का निजी मुचलका दाखिल करने पर शर्तों के साथ अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों पर दबाव बनाने या प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने प्रजापति को जमानत की दो माह की अवधि समाप्त होने के बाद ट्रायल कोर्ट या जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा है। जमानत की शर्तों में कोर्ट ने प्रजापति को अपने पासपोर्ट का आत्मसमर्पण करने और ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया।
प्रजापति की ओर से अधिवक्ता बालकेश्वर श्रीवास्तव व अन्य वकीलों का कहना था कि वह निर्दोष हैं और उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। वकीलों ने कहा कि प्रजापति कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनका कोई इलाज जेल अस्पताल या किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में नहीं है। वकीलों ने चिकित्सा उपचार का लाभ उठाने के लिए प्रजापति को छोटी अवधि के लिए रिहा करने की मांग की।
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याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने कहा कि प्रजापति को पर्याप्त चिकित्सा दी जा रही है। उनकी पहली जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। अब इस बार प्रजापति ने दलील दी है कि केजीएमयू के जिस विभाग में वह भर्ती है वहां उन्हें कोरोना संक्रमण का खतरा है क्योंकि यह वार्ड कोरोना वार्ड के पास है।
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न्यायमूर्ति वेद प्रकाश वैश्य ने गायत्री प्रसाद प्रजापति को मेडिकल आधार पर उनकी रिहाई से दो महीने के लिए अंतरिम जमानत दी है। कोर्ट ने उनको ढाई-ढाई लाख रुपये की दो संतुष्टि लायक जमानतें और 5 लाख का निजी मुचलका दाखिल करने पर शर्तों के साथ अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें पीड़ित और उसके परिवार के सदस्यों पर दबाव बनाने या प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने प्रजापति को जमानत की दो माह की अवधि समाप्त होने के बाद ट्रायल कोर्ट या जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा है। जमानत की शर्तों में कोर्ट ने प्रजापति को अपने पासपोर्ट का आत्मसमर्पण करने और ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया।
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प्रजापति की ओर से अधिवक्ता बालकेश्वर श्रीवास्तव व अन्य वकीलों का कहना था कि वह निर्दोष हैं और उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। वकीलों ने कहा कि प्रजापति कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनका कोई इलाज जेल अस्पताल या किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में नहीं है। वकीलों ने चिकित्सा उपचार का लाभ उठाने के लिए प्रजापति को छोटी अवधि के लिए रिहा करने की मांग की।
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याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने कहा कि प्रजापति को पर्याप्त चिकित्सा दी जा रही है। उनकी पहली जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। अब इस बार प्रजापति ने दलील दी है कि केजीएमयू के जिस विभाग में वह भर्ती है वहां उन्हें कोरोना संक्रमण का खतरा है क्योंकि यह वार्ड कोरोना वार्ड के पास है।