हाई अलर्ट के बावजूद भी जंगल में घुस गए तीन माफिया
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कतर्नियाघाट रेंज में हाई अलर्ट जारी होने के बाद सोमवार को ही लखीमपुर के तीन वन माफिया घुस आए। माफिया जब पेड़ों पर आरा चला रहे थे तभी पहुंची वन विभाग की टीम पर माफिया ने फायरिंग शुरू कर दी। फॉरेस्ट टीम और माफिया के बीच लगभग 35 मिनट तक मुठभेड़ चली।
आठ चक्र चली फायरिंग के दौरान टीम ने घेराबंदी कर एक माफिया को धर दबोचा, जबकि दो फरार हो गए। मौके से खैर का एक कटा पेड़ बरामद हुआ है। क्रिसमस और नव वर्ष के मद्देनजर कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित है।
खुफिया एजेंसियों ने शिकारियों और माफिया के घुसपैठ की आशंका जताई थी। इसके चलते रात में जंगल की विशेष सुरक्षा की जा रही है। सोमवार रात वन दरोगा मयंक पांडेय, वन रक्षक अजीज अहमद टीम के साथ गश्त कर रहे थे तभी रात एक बजे के आसपास कतर्नियाघाट रेंज के मझरा बीट में पेड़ काटने की आहट मिली।
टीम जब मौके पर पहुंची तो खैर के पेड़ों की कटान कर रहे माफिया और उसके साथियों ने कट्टे से फायरिंग शुरू कर दी। पेट्रोलिंग टीम ने भी जवाबी फायरिंग की। लगभग 35 मिनट तक मुठभेड़ चली। इस दौरान घेराबंदी कर एक माफिया को दबोच लिया गया।
खैर का पेड़ काट रहा था माफिया
उसकी पहचान रूका सिंह पुत्र महेंद्र सिंह निवासी नानकपुर तिकुनिया लखीमपुर के रूप में हुई है। घटनास्थल पर काटा गया एक खैर का पेड़ भी बरामद किया गया। सूचना पाकर वन क्षेत्राधिकारी जेएन सिंह भी रात में ही मौके पर पहुंच गए।
उन्होंने गिरफ्तार रूका सिंह को वन संपदा व वन्यजीव संरक्षण अधिनियम तथा पेट्रोलिंग टीम पर फायरिंग करने के आरोप में जेल भेजा है। मौके से बरामद खैर के कटान को सीज कर दिया गया है। वन क्षेत्राधिकारी जेएन सिंह ने बताया कि फरार आरोपियों की पहचान कर ली गई है।
वह दोनों ही लखीमपुर के तिकुनिया नानकपुर निवासी हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लखीमपुर पुलिस से संपर्क साधा गया है, दबिश दी जा रही है। खैर के पेड़ की लकड़ी का प्रयोग कत्था बनाने में किया जाता है, जिसके चलते खैर का पेड़ काफी मूल्यवान होता है।
डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि रात में वन माफिया द्वारा फायरिंग की घटना के मद्देनजर लखीमपुर और नेपाल से लगने वाली जंगल की सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। 24 घंटे कर्मचारियों की टीमों को गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं।