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जमानत के लिए दाखिल किए फर्जी दस्तावेज
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लखनऊ। गैंगस्टर एक्ट के आरोपियों ने उच्च न्यायालय से जमानत हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज दिए। इसकी जानकारी होने पर बयान दर्ज कराने गए गोमतीनगर थाना प्रभारी धीरज कुमार सिंह ने फर्जीवाडे़ केखिलाफ थाने में केस दर्ज कराया है। मामले की जांच की जा रही है।
प्रभारी निरीक्षक धीरज कुमार सिंह के मुताबिक, संतोष प्रजापति और उसके भाई मोहन प्रजापति के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा गोमतीनगर थाने में दर्ज हुआ था। दोनों मूल रूप से अजगैन केरहने वाले हैं। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। संतोष और मोहन ने जमानत के लिए अदालत में अर्जी दायर की थी। उन्होंने स्थायी पता नहीं बताया था। बयान देते वक्त अजगैन का जो पता लिखाया गया था, वहां पर आरोपियों के रहने की तस्दीक नहीं हुई। संतोष और मोहन की जमानत के लिए बिठूर सिंहपुर निवासी रमेश कुमार, मुन्नी देवी, विनय कुमार और बाबूलाल ने कागज प्रस्तुत किए थे। जांच में सामने आया कि सिंहपुर स्थित पते पर ये जमानतदार नहीं रहते हैं।
ग्राम प्रधान सिंहपुर ने भी इस बात की तस्दीक की। जमानत कागजों का सत्यापन एसआई अखिलेश कुमार द्वारा किए जाने का पता चला। फर्जीवाडे़ की जांच में पता चला कि थाना बिठूर से संतोष और मोहन के दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया। बिठूर थाने में बीते एक साल में अखिलेश कुमार नाम का कोई दरोगा भी तैनात नहीं हुआ है। ऐसे में जमानत हासिल करने के लिए संतोष और मोहन ने साथियों के साथ मिल कर साजिश रची थी। शुक्रवार को इंस्पेक्टर धीरज सिंह की तरफ से संतोष, मोहन, रमेश कुमार, मुन्नी देवी, विनय कुमार और बाबूलाल के खिलाफ धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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प्रभारी निरीक्षक धीरज कुमार सिंह के मुताबिक, संतोष प्रजापति और उसके भाई मोहन प्रजापति के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा गोमतीनगर थाने में दर्ज हुआ था। दोनों मूल रूप से अजगैन केरहने वाले हैं। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। संतोष और मोहन ने जमानत के लिए अदालत में अर्जी दायर की थी। उन्होंने स्थायी पता नहीं बताया था। बयान देते वक्त अजगैन का जो पता लिखाया गया था, वहां पर आरोपियों के रहने की तस्दीक नहीं हुई। संतोष और मोहन की जमानत के लिए बिठूर सिंहपुर निवासी रमेश कुमार, मुन्नी देवी, विनय कुमार और बाबूलाल ने कागज प्रस्तुत किए थे। जांच में सामने आया कि सिंहपुर स्थित पते पर ये जमानतदार नहीं रहते हैं।
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ग्राम प्रधान सिंहपुर ने भी इस बात की तस्दीक की। जमानत कागजों का सत्यापन एसआई अखिलेश कुमार द्वारा किए जाने का पता चला। फर्जीवाडे़ की जांच में पता चला कि थाना बिठूर से संतोष और मोहन के दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया। बिठूर थाने में बीते एक साल में अखिलेश कुमार नाम का कोई दरोगा भी तैनात नहीं हुआ है। ऐसे में जमानत हासिल करने के लिए संतोष और मोहन ने साथियों के साथ मिल कर साजिश रची थी। शुक्रवार को इंस्पेक्टर धीरज सिंह की तरफ से संतोष, मोहन, रमेश कुमार, मुन्नी देवी, विनय कुमार और बाबूलाल के खिलाफ धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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