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प्रदेश में अगले पांच सालों में फूड एवं फ्रूट प्रोसेसिंग की माइक्रो यूनिट्स के 25 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इनमें करीब 3125 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 90625 लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कैबिनेट ने इस योजना पर अमल के लिए स्माइल पार्क्स इंडस्ट्रीज लि. (एसपीआईएल) और प्रदेश सरकार के बीच एमओयू के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। एसपीआईएल ने पिछले दिनों राम सनेही घाट बाराबंकी में पहले क्लस्टर का शिलान्यास किया है।
प्रदेश कैबिनेट ने इसे 2014-2020 के बीच माइक्रो यूनिट्स के 25 क्लस्टर स्थापित करने की मंजूरी दी है। इसमें पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, मध्य उत्तर प्रदेश तथा बुंदेलखंड में हर साल पांच के हिसाब से 25 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।
प्रदेश सरकार इसके लिए कंपनी को 20 से 30 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने में जरूरी सहयोग देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सकेगा, वहीं रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे गांवों से होने वाला निर्यात भी बढ़ेगा।
एमओयू के लिए सरकार न्याय विभाग की राय लेकर एक शासनादेश जारी करेगी। एमओयू हस्ताक्षर की तिथि से पांच वर्ष के लिए प्रभावी होगा। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के विशेष सचिव को सरकार की ओर से एमओयू के लिए अधिकृत किया गया है।
हर क्लस्टर में होंगी ये सुविधाएं
एसपीआईएल हर क्लस्टर में एक इंटीग्रेटेड फैसिलिटी सेंटर स्थापित करेगी। इसमें पावर बैकअप, पावर हाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, टूल रूम क्वालिटी लैब, पैकेजिंग व प्रिंटिंग, परिवहन, विपणन, प्रशासन व अकाउंट आदि की व्यवस्था होगी। कंपनी क्लस्टर के सभी उद्यमियों से शत प्रतिशत खरीद की गारंटी भी लेगी। इसके अलावा भी बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में अखिलेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
अलीगढ़ होम्योपैथिक कॉलेज के लिए 87.39 करोड़ मंजूर
राज्य सरकार ने अलीगढ़ में बनने वाले राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण के लिए 87.39 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सीएम की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इसकी मंजूरी दे दी गई।
गौरतलब है कि मौजूदा समय में लखनऊ, इलाहाबाद, फैजाबाद, मुरादाबाद, आजमगढ़, गाजीपुर और कानपुर में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज हैं। जबकि अलीगढ़ और गोरखपुर में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन है।
औद्योगिक इकाइयों के विस्तारीकरण पर अब मिलेंगे नए लाभ
अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति के तहत जो लाभ नई औद्योगिक इकाईयों को मिलते हैं, वे सभी लाभ अब विस्तारीकरण व विविधीकरण वाली इकाइयों को भी मिलेंगे। इस संबंध में प्रस्ताव को कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012 में अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश की नीति को मंजूरी दी थी। इसमें नई औद्योगिक इकाइयां लगाने पर विभिन्न सुविधाएं व लाभ देने का प्रावधान किया था। इसके तहत इकाइयों की स्थापना संबंधी अवस्थापना सुविधाओं के लिए गए ऋण पर दिए जाने वाले ब्याज की एक सीमा तक प्रतिपूर्ति की जाती है।
इतना ही नहीं सरकार इन इकाइयों द्वारा प्राविडेंट फंड के लिए दी गई रकम की प्रतिपूर्ति भी करती है। गौरतलब है कि पहले से सूबे में निवेश कर रहे उद्यमी भी विस्तारीकरण परियोजनाओं व अन्य प्रोजेक्ट शुरू करने (विविधीकरण) पर भी ऐसी ही सुविधाएं व लाभ की मांग कर रहे थे। कैबिनेट ने अब इसकी मंजूरी दे दी। साथ ही इस नीति में भविष्य में किसी तरह के संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया।
दो महीने में मेट्रो के लिए भूमि अर्जन होगा पूरा
समझौते के आधार पर लखनऊ मेट्रो के लिए जरूरी भूमि खरीदने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने बुधवार को अपनी मुहर लगा दी है। इसके साथ ही निर्धारित प्रक्रिया को भी हरी झंडी दे दी गई है। अगले दो महीने के भीतर इस संबंध में दर निर्धारित करने का समय कैबिनेट ने तय किया है। अब नई नीति को एलएमआरसी बोर्ड से भी अनुमोदित करवाया जाएगा।
कैबिनेट के सामने आए प्रस्ताव के मुताबिक, डीएम लखनऊ की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। जिसमें एडीएम एलए, एडीएम एफआर, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग, रजिस्ट्रार लखनऊ द्वारा नामित सब रजिस्ट्रार और प्रबंध निदेशक एलएमआरसी बतौर सदस्य सचिव के शामिल होंगे।
समिति आपसी समझौते के आधार पर प्रचलित बाजार दरों पर भूमि एवं परिसंपत्तियों का मूल्य निर्धारण करेगी। समिति सभी मामलों को देखने के बाद एलएमआरसी को अपनी रिपोर्ट भेज देगी। जिसको एलएमआरसी बोर्ड पास करेगा।
इसमें भूस्वामियों से अलग से भी प्रारूप पर सहमति ली जाएगी। दर निर्धारण के बाद जन साधारण के उपयोग संबंधित सूचना प्रकाशित की जाएगी। सभी तरह के भुगतान करने का दायित्व एलएमआरसी का ही होगा।
लोहिया इंस्टीट्यूट के लिए 363.89 करोड़ की मंजूरी
डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमएलआईएमएस) में एकेडमिक ब्लॉक बनने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने इंस्टीट्यूट के पास ही नए परिसर में बनने वाले इस ब्लॉक के लिए 363.89 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने तीन महीने पहले इसका शिलान्यास किया था।
ये हैं विशिष्टताएं
लागत--363.89 करोड़ रुपये
भूमि--4.6 एकड़
फ्लोर--3 बेसमेंट, 10 हाईराइज
विभाग--42
क्षमता--150 एमबीबीएस व 200 पीजी स्टूडेंट्स
पार्किंग--700 वाहन
गजल, दादरा, ठुमरी गायन के लिए ‘बेगम अख्तर पुरस्कार’
मल्लिका-ए-तरन्नुम बेगम अख्तर की जयंती के 100 साल पूरे होने पर राज्य सरकार ने उनके नाम पर पुरस्कार का ऐलान किया है। कैबिनेट की बैठक में ‘बेगम अख्तर पुरस्कार’ शुरू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगी।
‘बेगम अख्तर पुरस्कार’ प्रत्येक वर्ष प्रदेश के उस गायक को मिलेगा, जिसने दादरा, ठुमरी, गजल के क्षेत्र में पहचान बनाई हो। पुरस्कार स्वरूप कलाकार को 5 लाख रुपये की नगद राशि, अंगवस्त्र, प्रशस्तिपत्र मिलेगा।
निशक्तों को रजिस्ट्री पर स्टांप छूट का दायरा बढ़ा
राज्य सरकार ने निशक्तों को संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर स्टांप शुल्क में छूट का दायरा बढ़ा दिया है। गंभीर रूप से निशक्तों को छूट का लाभ 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख और सामान्य रूप से निशक्तों को एक लाख से पांच लाख कर दिया गया है।
यही नहीं अब सरकारी संपत्तियों के साथ अन्य संपत्तियों की खरीद पर पात्रों को यह लाभ दिया जाएगा। यह निर्णय बुधवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
राज्य सरकार ने जुलाई 2005 में सामान्य रूप से निशक्तों को एक लाख तक की सरकारी संपत्तियों की खरीद व पट्टे की जमीन लेने पर स्टांप शुल्क में छूट का लाभ देने की व्यवस्था लागू की थी। इससे अधिक की संपत्ति पर शेष का स्टांप शुल्क लेने की व्यवस्था की गई थी।
इसी तरह दिसंबर 2008 में गंभीर रूप से निशक्तों को 10 लाख की संपत्ति पर स्टांप शुल्क छूट की व्यवस्था दी गई। लेकिन कैबिनेट की बैठक में स्टांप एवं कर निबंधन विभाग के प्रस्ताव पर छूट का दायरा बढ़ाने का निर्णय किया गया।
फैसले के मुताबिक इससे अधिक की संपत्तियों पर स्टांप शुल्क लगेगा। स्टांप एवं कर निबंधन विभाग से संशोधित अधिसूचना जारी होने के बाद निशक्तों को यह लाभ मिलने लगेगा।
सीएसआर फंड से एचसीएल करेगी गांवों का विकास
आईटी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी एचसीएल कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत प्रदेश में चयनित गांवों के समूह को मॉडल के रूप में विकसित करेगी।
प्रदेश कैबिनेट ने बुधवार को इसके लिए एचसीएल फाउंडेशन व सरकार के बीच एमओयू के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार इस काम में फांउडेशन का सहयोग करेगी।
इसके तहत चयनित गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, अवस्थापना, जलापूर्ति व रोजगार जैसे क्षेत्रों में काम होंगे। प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को सरकार की ओर से एमओयू के लिए अधिकृत किया गया है।
परियोजना के कार्यों की नियमित प्रगति की निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति बनेगी। इसके अलावा जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में परियोजना समन्वय समिति गठित होगी। फांउडेशन पांच वर्ष के लिए एमओयू करेगा।
सौर ऊर्जा से मिलने वाली बिजली की दरों को मंजूरी
राज्य सरकार ने प्रदेश में स्थापित की जा रही 105 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं से खरीदी जाने वाली बिजली की दरों को मंजूरी दे दी है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई। अब पावर कॉर्पोरेशन सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनियों के साथ इन दरों पर विद्युत क्रय अनुबंध (पीपीए) करेगा।
गौरतलब है कि 300 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए गत 27 अगस्त को बिड आमंत्रित की गई थी। 110 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए छह बिड आई थीं। तकनीकी मूल्यांकन के बाद 105 मेगावाट क्षमता की पांच बिड उपयुक्त पाई गईं।
कैबिनेट ने 12 वर्ष के लिए 105 मेगावाट सौर ऊर्जा खरीद की दरों को मंजूरी दी है। जैक्शन इंजीनियर्स लिमिटेड दिल्ली से 30 मेगावाट क्षमता के लिए 9.24 रुपये प्रति यूनिट, के एम कंसोर्टियम लखनऊ से 5 मेगावाट क्षमता के लिए 9.250 रुपये प्रति यूनिट, एक्मे सोलर इनर्जी प्रा.लि. गुड़गांव से 30 मेगावाट क्षमता के लिए 8.930 रुपये प्रति यूनिट, जटाधारी मर्चेंडाइज प्रालि उत्तराखंड से 10 मेगावाट क्षमता के लिए 9.27 रुपये तथा सुखबीर एग्रो एनर्जी लि. नई दिल्ली से 30 मेगावाट क्षमता के लिए 9.33 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जाएगी।
खाली पदों पर रिटायर्ड बीडीओ को मिलेगी तैनाती
प्रदेश सरकार ने प्रांतीय विकास सेवा (पीडीएस) से रिटायर हो चुके खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) की फिर से सेवाएं लेने को मंजूरी दे दी है।
रिटायर्ड बीडीओ अधिकतम 100 खाली पदों पर रखे जाएंगे। ये विशेष कार्याधिकारी (खंड विकास) के रूप में बीडीओ की जिम्मेदारी निभाएंगे। प्रदेश कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
शासन इन रिक्त पदों पर रिटायर्ड बीडीओ का चयन विज्ञापन से करेगा। आवेदक का कार्यकाल तीन वर्ष या 65 वर्ष की आयु अथवा राज्य लोक सेवा आयोग से पर्याप्त बीडीओ उपलब्ध होने तक होगा।
नियुक्तियां केवल सीधी भर्ती के उन पदों के विरुद्ध ही की जाएंगी जिनकी सूचना आयोग को भेजी जा चुकी है। इनका चयन विभागीय चयन समिति करेगी।